Coccidiosis in chickens : मुर्गियों की इस खतरनाक बीमारी से पोल्ट्री किसान कैसे बचाव करे

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Coccidiosis in chickens
मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस

मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस लक्षण और बचाव | Coccidiosis in chickens 

देश के ज्यादातर किसान भाई खेती-किसानी के साथ-साथ इससे जुड़े हुए व्यवसाय (Business) भी करते है। जिससे वह अपनी आमदनी को बढ़ सके। इन्ही व्यवसायों सबसे अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय मुर्गी पालन (Poultry farming) है। जिससे किसान भाई लाखों रुपये कमाते है, और अपनी आमदनी को बढ़ते है।

मुर्गी पालन किसानों के लिए लिए एक फायदेमंद व्यवसाय साबित होता है। लेकिन इस व्यवसाय मे मुर्गियों की सेहत का विशेष ध्यान देना पड़ता है। क्योंकि उनमे की रोगों के होने की संभावना बनी रहती है। रोग लग जाने पर किसान भइयों को इस व्यवसाय से नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए इनको विभिन्न बीमारियों एवं रोगों से बचना चाहिए।

वैसे तो मुर्गियों मे कई रोगों एवं बीमारियों की संभावना रहती है। लेकिन बरसात के इस मौसम मे जिस बीमारी का सबसे ज्यादा डर बना रहता है। उस बीमारी का नाम है, कॉक्सीडियोसिस (Coccidiosis in chickens). आज के इस लेख मे आप सभी मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस, लक्षण और बचाव के बारे मे विस्तार से जान पायेगें –

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कॉक्सीडियोसिस: एक परिचय

कॉक्सीडियोसिस एक पंखधारी पक्षियों की एक आम बीमारी है। यह एक प्रकार की परजीवी (Protozoan) परजीवी संक्रमण से होती है। जिसे Eimeria नामक परजीवी समूह से संबंधित है। जिसे अंग्रेजी में “Coccidiosis” कहा जाता है। मुर्गियों में एक आम बीमारी है। यह बीमारी विशेष रूप से छोटी उम्र के चूजों को प्रभावित करती है। यह अधिकतर पोल्ट्री उत्पादकों को परेशान करती है, क्योंकि इससे उनके मुनाफे को कमी होती है और मुर्गियों के पालन में भी दिक्कतें होती हैं। इसलिए, कॉक्सीडियोसिस को पहचानकर और बचाव के उपायों को जानना महत्वपूर्ण है ताकि मुर्गियों की सेहत को सुनिश्चित किया जा सके।

मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस के लक्षण

मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस के लक्षण को पहचानना आवश्यक है ताकि उचित समय पर उपचार किया जा सके। इस रोग के कुछ मुख्य लक्षण हैं:

  1. पतले दस्त: बीमार मुर्गियों के बीट आमतौर पर बहुत पतले और दस्त होते हैं। यह एक प्रमुख लक्षण है जो कॉक्सीडियोसिस के प्रकार को दिखाता है।
  2. कम खाने की इच्छा: बीमार मुर्गियां कम खाती हैं और उनमें दुर्बलता दिखाई देती है। उन्हें खाने की इच्छा कम होती है जिससे उनका पोषण सम्पूर्ण नहीं हो पाता।
  3. श्वसन में तकलीफ: मुर्गियों को कॉक्सीडियोसिस होने पर उन्हें श्वसन में तकलीफ हो सकती है। उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है और वे दिक्कत से सांस लेते हैं।
  4. उत्पादन में कमी: कॉक्सीडियोसिस के कारण मुर्गियों की अच्छी उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। वे कम अंडे देती हैं और उनका वजन भी ठीक से नहीं बढ़ता है।
  5. पेट में सूजन: कॉक्सीडियोसिस के कारण मुर्गियों के पेट में सूजन हो सकती है और वे दुखिया और अक्षम दिखते हैं।

नोट : इन लक्षणों को देखकर यदि आपके मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस का संदेह हो तो आपको तुरंत वेटरिनरी चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और उचित उपायों से इलाज करवाना चाहिए। 

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कॉक्सीडियोसिस से बचाव के उपाय

कॉक्सीडियोसिस से बचने के लिए निम्नलिखित उपायों को अपनाना महत्वपूर्ण है:

  1. स्वच्छता और संगठन: मुर्गियों के लिए साफ़ पानी, चारा और स्थान उपलब्ध कराने से उनके संजीवन में सुधार होता है। साफ़ पानी के संचयन और परिपालन के लिए सही प्रबंधन करना जरूरी है ताकि उनके सेहत और प्रदर्शन में सुधार हो सके।
  2. उच्च गुणवत्ता वाले चारा का उपयोग: मुर्गियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले चारा खिलाना चाहिए जो खारिजी तत्वों से मुक्त हो। इससे उन्हें उनकी पोषक आवश्यकताएं पूरी होती हैं और वे स्वस्थ रहते हैं।
  3. समय पर टीकाकरण: मुर्गियों को समय-समय पर वेटरिनरी चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा टीकाकरण कराना चाहिए। यह उन्हें विभिन्न रोगों से बचाता है, जिसमें से एक कॉक्सीडियोसिस भी शामिल है।
  4. प्रोबायोटिक्स का उपयोग: प्रोबायोटिक्स मुर्गियों के पाचन तंत्र को सुधारकर उन्हें कॉक्सीडियोसिस से बचाने में मदद करते हैं। ये गुट बैक्टीरिया होते हैं जो मुर्गी के पाचन तंत्र में संतुलन बनाए रखते हैं और सेहत को सुधारते हैं।
  5. संदर्भित जाँच और इलाज: यदि किसी मुर्गी में कॉक्सीडियोसिस के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत वेटरिनरी चिकित्सक से संपर्क करें और संदर्भित इलाज करवाएं। वेटरिनरी चिकित्सक उचित जांच करेंगे और उचित दवाओं का प्रेस्क्रिप्शन करेंगे जिससे मुर्गी की सेहत में सुधार होगा।

ये उपाय अपनाकर कॉक्सीडियोसिस से बचा जा सकता है और मुर्गियों की सेहत और उत्पादकता को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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