Black bengal goat in Hindi : पशुपालक किसानों के लिए बकरी की ये नस्ल देगी लाखों का मुनाफा,आइये जाने इसकी पूरी जानकारी

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Black bengal goat in Hindi
बकरी की ब्लैक बंगाल नस्ल की जानकरी

Black bengal goat in Hindi | बकरी की ब्लैक बंगाल नस्ल की जानकरी 

Black bengal goat in Hindi : देश के ज्यादातर किसान भाई खेती के साथ-साथ पशुपालन का भी कार्य करते है. जिसमें बकरी पालन बड़े स्तर पर किया जा रहा है. बकरी पालन से किसानों काफी अच्छा मुनाफा भी कमाते है. लेकिन कभी-कभी अच्छे नस्लों का चुनाव न होने से कभी-कभी घाटा भी उठाना पड़ता है. ऐसे में किसानों को अच्छी नस्लों की जानकारी होना बहुत जरुरी है. इसी कड़ी में आज हम आपको बकरी की एक ऐसी नस्ल की जानकरी देते है, जिसका नाम ब्लैक बंगाल है.

बकरी की यह नस्ल किसानों के लिए काफी लाभकारी हो सकती है. इस नस्ल का रंग मुख्यतः काला होता है. इसी काले रंग के कारण इसे ‘ब्लैक बंगाल’ कहा जाता है. काले रंग के अलावा कुछ बकरियों में भूरा एवं सफ़ेद बाल देखने को भी मिल जाता है. तो आइये आप को सभी को बकरी की इस ब्लैक बंगाल नस्ल की पूरी जानकरी देते है-

ब्लैक बंगाल नस्ल का शारीरिक आकार

बकरी की यह नस्ल छोटे कद की होती है. साथ ही इसका शरीर गठीला एवं वेज कोपकर होता है. इस नस्ल के कान छोटे, खड़े एवं आगे की ओर निकले रहते है.

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इस नस्ल के नर एवं मादा दोनों में 3 से 4 इंच का सींग आगे की ओर निकला हुआ होता है. वयस्क नर का वजन 20 से 25 किलो ग्राम एवं मादा का वजन 15 से 20 किलोग्राम तक होता है.

ब्लैक बंगाल नस्ल की प्रजनन क्षमता

बकरी की ब्लैक बंगाल नस्ल की प्रजनन क्षमता काफी अच्छी पायी जाती है. इसी बेहतर प्रजनन क्षमता होने के कारण इनकी संख्या में भी वृध्दि दर अन्य नस्लों की अपेक्षा अधिक होती है. यह प्रत्येक आठ माह पर प्रति बियान में 2 से 3 बच्चों को जन्म देने की क्षमता रखती है. जिनका औसतन वजन लगभग लगभग एक किलोग्राम रहता है.

मांस एवं दूध देने की क्षमता

बकरी की यह नस्ल 8 से 10 महीने की उम्र में वयस्क होकर तैयार हो जाती है. एवं 15 से 16 महीने की उम्र में पहली बार बच्चा देने लायक हो जाती है. इस नस्ल की बकरियां मांस उत्पादन की द्रष्टिकोण से बहुत उपयोगी पायी जाती है. इस नस्ल के बकरे की खाल भी काफी उत्तम होती है.

इस नस्ल की बकरियों में दुग्ध उतपादन क्षमता बहुत कम होती है. जो प्रति ब्यात 15 से 20 लीटर तक होती है.

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ब्लैक बंगाल नस्ल के लिए अनुकूल क्षेत्र

बकरी की यह नस्ल मुख्य रूप से झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा एवं बांग्लादेश में पायी जाती है. देश के इस राज्यों के पशुपालक किसान भाई इस नस्ल को पालकर अच्छा मुनाफा कमा सकते है.

इसके अलावा पशुपालक किसान भाई बात का ध्यान रखे सबसे पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में जाकर इस बात की जानकरी जरुर ले ले, कि उनके क्षेत्र में कौन सी बकरी की नस्ल अच्छी तरह रह सकती है. और अच्छा मुनाफा देने में सक्षम है.

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