IMPROVED VARIETIES OF PEAS : मटर की इन किस्मों को लगाकर किसान भाई ले सकते हैं अधिक पैदावार, आइए जाने पूरी जानकारी

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IMPROVED VARIETIES OF PEAS
 मटर की अधिक पैदावार वाली उन्नत किस्में

 मटर की अधिक पैदावार वाली उन्नत किस्में | IMPROVED VARIETIES OF PEAS 

देश के उत्तरी क्षेत्र और पहाड़ी क्षेत्रों में मटर की खेती (Matar ki kheti) मुख्य रूप से की जाती है. जिसमें पहाड़ी इलाकों में इसकी खेती गर्मियों और पतझड़ के मौसम में होती है. वही मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती सर्दियों के मौसम में उपयुक्त रहती है. लेकिन सर्दियों में पढ़ने वाला पाला इसकी फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है.

मटर हमारे शरीर के लिए काफी लाभदायक होती है. क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम और विटामिन हमारे शरीर के लिए काफी उपयोगी होते हैं.

आज हमारे बाजारों में मटर की ढेर सारी किस्मे उपलब्ध है. जिनसे किसान भाई अच्छा उत्पादन प्राप्त करते हैं. लेकिन कुछ किसान भाई इन अच्छी किस्मों से आज भी अनभिज्ञ है. इसीलिए आज के इस लेख में हम मटर की उचित किस्मों (Matar ki kismen) का चयन कर, किसान भाइयों को इसकी पूरी जानकारी देंगे. जिससे किसान भाई मटर के खेती के सीजन में मटर की अच्छी पैदावार ले सके. तो आइए जानते हैं, मटर की खेती में उपयुक्त उन्नत किस्में (IMPROVED VARIETIES OF PEAS) कौन-कौन सी हैं-

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मटर की खेती में उन्नत किस्में

मटर की उन्नत किस्म अर्केल 

मटर की इस किस्म की फलियां काफी चमकदार तथा बीज झुर्रीदार होते है.इस किस्म की उपज लगभग 10 से 13 टन प्रति हेक्टेयर के करीब पाई गई है. इस की फली में प्रति फली औसतन 6 से 7 दाने पाए जाते हैं. इस किस्म के मटर के पौधे की लंबाई लगभग डेढ़ फुट के आसपास होती है. इसके अलावा इस किस्म की बुवाई के बाद लगभग 50 से 60 दिन बाद पहली तुड़ाई के लिए मटर तैयार हो जाते हैं.

मटर की काशी शक्ति (वीआरपी-7) किस्म 

मटर की इस किस्म के पौधे मध्यम आकार के पाए जाते हैं. जिनकी लंबाई लगभग 55 सेंटीमीटर तक होती है. वही इसकी फलियों की लंबाई 10 सेंटीमीटर के आसपास पाई जाती है. साथ ही इसके प्रति फली में 5 से 6 दाने पाए जाते हैं. इस किस्म के मटर की बुवाई के बाद पहली तुड़ाई लगभग 70 से 78 दिन बाद होती है. इस किस्म के मटर की उपज लगभग 130 से 150 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक पाई जाती है. वही यह किस्म कई तरह के जीवाणुओं से जनित रोगों के प्रति काफी सहनशील होती है.

मटर की काशी नंदिनी (वीआरपी-5) किस्म

मटर की यह उन्नत किस्म एक अगेती किस्म है. जिसके पौधों की लंबाई 42 से 43 सेंटीमीटर तक होती है. जो हरे रंग के होते हैं. इस किस्म की बुवाई के लगभग 35 दिन बाद 7 से 8 गांठ से फूल आने शुरू हो जाते हैं. इसके अलावा इसकी फलिया हल्की मुड़ी हुई पाई जाती हैं. साथ ही फलियों में 7 से 8 दाने पाए जाते हैं.इस किस्म की मटर की बुवाई के बाद पहली तुड़ाई लगभग 55 दिन बाद की जाती है. इस किस्म के मटर में जीवाणु रोग जनित कुछ रोगों का प्रभाव कम देखने को पाया जाता है.

मटर की काशी उदय (वीआरपी-6) किस्म 

मटर की उन्नत किस्म को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा 2005 में विकसित किया गया था. जिस की बुवाई मुख्यता उत्तर प्रदेश. बिहार और झारखंड के जिले में की जाती है. मटर की इस किस्म की फली की लंबाई लगभग 9 से 10 सेंटीमीटर पाई जाती है. वहीं इसकी पहली तुड़ाई बुवाई के लगभग 60 से 65 दिन बाद होती है. इसके अलावा इस किस्म की पैदावार लगभग 105 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है. साथ ही यह किस्म कई तरह के जीवाणु जनित रोगों के प्रति काफी सहनशील होती है.

मटर की काशी अगेती किस्म

मटर की यह किस्म मध्यम समय में उपज देने के लिए जानी जाती है. इसके पौधों की लंबाई 2 फीट के लगभग होती है. इसके अलावा इसके पौधों पर लगने वाली फलिया सीधी और गहरी होती हैं. इस किस्म की पहली तुड़ाई रोपाई के 50 दिन बाद की जाती है. वही इसकी पैदावार 10 टन प्रति हेक्टेयर के लगभग पाई जाती है. साथ ही इस किस्म के पौधों पर जीवाणु जनित रोगों का प्रभाव कम होता है.

मटर की पूसा प्रगति किस्म

इस किस्म के पौधे मटर की जल्दी पैदावार देने के लिए जाने जाते हैं. वही इसकी पहली तुड़ाई लगभग रोपाई के 60 दिन बाद की जाती है.मटर की इस किस्म की फलियों में लगभग 8 से 10 दाने पाए जाते हैं. वही इसकी उपज हरी फली के रूप में 7 टन प्रति हेक्टेयर के लगभग होती है. मटर की यह किस्म पाउडरी मिल्ड्यू रोग के प्रति सहनशील होती है.

मटर की पंत मटर 155 किस्म

मटर की यह किस्म पंत मटर 13 और डीडीआर 27 के संकरण से तैयार की गई है. इस मटर की उपज लगभग 130 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. जबकि इस किस्म की हरी फलियां पहली तुड़ाई के लिए बुवाई के बाद लगभग 50 से 60 दिन का समय ले लेती हैं.मटर की इस किस्म के 100 दानों का वजन लगभग 20 ग्राम के आसपास पाया जाता है. वही मटर की यह प्रजाति प्रमुख बीमारी चूर्णी फफूंदी एवं गेरुई जैसे रोगों के लिए तथा फली छेदक कीट के लिए अवरोधी पाई जाती है .

मटर की पंत मटर 157 किस्म

मटर की  यह किस्म एफ सी-1 और पंत मटर 11 के संकरण से विकसित की गई है. इसकी औसतन उपज 1695 किलोग्राम प्रति एकड़ तक होती . जो कि मानक किस्मों से अधिक पाई गई है.वही किसानों के खेतों में किए गए परीक्षणों में इसकी औसतन पैदावार 2290 किलोग्राम प्रति एकड़ तक पाई गई है. इस किस्म के 100 दानों का वजन लगभग 19 ग्राम तक पाया गया है. मटर की यह किस्म प्रमुख बीमारी चूर्णी फफूंदी और गेरुई जैसे रोगों तथा फली छेदक कीटों के प्रति काफी अवरोधी पाई गई है.

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मटर की जवाहर मटर-1 किस्म

मटर की इस किस्म को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में विकसित किया गया है. इसकी सबसे खास बात यह होती है कि इसके पौधे झाड़ीदार होते हैं. जिनकी ऊंचाई 2 से ढाई फीट तक पाई गई है. वही इस किस्म की पहली तुड़ाई बुवाई के लगभग 65 से 70 दिन बाद की जाती है. फलियों की औसत लंबाई 7 से 8  सेंटीमीटर तक पाई जाती है. प्रत्येक फली में 5 से 8 दाने पाए जाते हैं. फलियों के दाने काफी ठोस होते हैं. इसकी औसतन पैदावार 125 से 140 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पाई जाती है.

मटर की आजाद मटर-1 

मटर की यह किस्म मध्यम समय में तैयार हो जाती है. वहीं इसके फलियों की लंबाई 8 से 10 सेंटीमीटर तक पाई जाती है. हल्की-हल्की मुड़ी हुई और गहरे रंग की पाई जाती हैं. इसके बीज सिकुड़े हुए हल्के हरे रंग के होते हैं. पौधों में फलिया जोड़ों में आती हैं.

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