माहू (Aphids) कीट से सरसों कुल की फसलों को कैसे बचाए ?

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माहू (Aphids) कीट
माहू (Aphids) कीट से सरसों कुल की फसलों को कैसे बचाए ?

माहू (Aphids) कीट से सरसों कुल की फसलों को कैसे बचाए ?

नमस्कार किसान भाईयों, माहू (Aphids) कीट सरसों कुल की फसलों का भयंकर शत्रु है. हर साल यह किसान की तिलहनी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाता है. जिससे किसान भाईयों को काफी हानि उठानी पड़ती है. इसलिए गाँव गाँव आज अपने इस लेख में माहू (Aphids) कीट से सरसों कुल की फसलों को कैसे बचाए, पूरी जानकारी अपनी भाषा हिंदी में देगा. जिससे किसान भाई अपनी फसलों को इस कीट से रक्षा कर पाए और उनकी उपज अधिक हो. जिससे वह अच्छा मुनाफा कमा सके. तो आइये जानते है माहू (Aphids) की पूरी जानकारी व प्रबधन कैसे करे ?

माहू (Aphids) कीट 

भारत में तिलहनी फसलों में सरसों का प्रमुख स्थान है. इस फसल में माहू (Aphids) कीट का अधिक प्रकोप होता है. इसके भयंकर प्रकोप से सरसों का उत्पादन में एक गंभीर समस्या बन जाती है. माहू दिसम्बर से फरवरी तक सक्रिय रहता है. जिससे 15 से 50 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो जाती है. जब तापक्रम घटकर 4 से 8 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है. और आसमान में काले बादल और घना कुहरा छा जाता है. उस समय इसके प्रकोप की तीव्रता बढ़ जाती है. सरसों के अलावा यह मूली, पातगोभी एवं फूलगोभी इत्यादि को भी भयंकर रूप से हानि पहुंचाता है.

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फसलों को हानि कैसे पहुंचाता है ? 

इस कीट की सभी अवस्थाएं (निम्फ तथा प्रौढ़) पत्तियों, पुष्पक्रमों तथा फलियों पर समूह में रहती है और रस चूसती रहती है. जिसके फल स्वरूप पौधे कमजोर एवं बदरंग हो जाते है. तथा इसके बीज का निर्माण नही होता है. माहू अपने शरीर से एक प्रकार का द्रव विसर्जित करते है. जिसके कारण पत्तियों पर एक काले रंग का कवक विकसित हो जाता है. जो पत्ती की सामान्य क्रियाओं में बाधक होता है. इसके भुजांग चुभाने व चूसने वाले होते है.

कीट की सामान्य पहचान 

यह कीट हलके हरे रंग का तथा आकार में 2 से 2.5 मिमी० लंबा एवं गोलाकार होता है. शरीर के पिछले भाग की उपरी सतह से दो छोटी मधुनलिकाएं निकलती है. इसके प्रौढ़ के लम्बे सफ़ेद पंख होते है. किन्तु अधिकतर यह पंख रहित भी होते है.

कीट का जीवन चक्र 

या कीट सरसों की फसलों पर नवम्बर के अंत में या दिसम्बर के शुरू में दिखाई देते है. सबसे पहले जो कीट दिखाई देते है वे पंखहीन होते है. और बिना मैथुन के शिशुओं को पैदा करते है. इनकी मादा सीधे अंडे न देकर बच्चे पैदा करती है. इस प्रकार इनकी संख्या तेजी से बढती है. और यह काफी बड़े क्षेत्र में फैल जाते है. बाद में पंख वाली मादा बनती है. यह दिसम्बर से फरवरी तक सबसे सक्रिय रहती है. क्योकि इस समय पंख वाले तथा पंखहीन दोनों प्रकार के प्रकार के प्रौढ़ पाए जाते है. इसकी कई पीढियां ठंढे मौसम में पायी जाती है.

माहू कीट नियंत्रण  

  • चूँकि ठंडा एवं बादल वाला मौसम इसके प्रकोप को प्रोत्साहित करता है. इसलिए फसल को समय से बोना चाहिए. तोरिया की फसल इसके प्रकोप से बहुत कम प्रभावित होती है. क्योकि माहू की वृध्दि के लिए प्रभावी मौसम जब आता है. उससे पहले तोरिया काटने की स्थिति में आ जाती है.
  • संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करे.
  • एलो ट्रैप (पीला प्रपंच) माहू ग्रसित क्षेत्र में लगाने से माहू का नियंत्रण हो जाता है.
  • माहू से ग्रसित टहनियों को शुरुवात में ही काटकर नष्ट कर देना चाहिए.
  • जब 30 प्रतिशत से अधिक पौधों पर माहू दिखाई पड़ने लगे तो कीटनाशी दवा का छिड़काव करने से नियंत्रण किया जाता है.

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सरसों में माहू की दवा 

सरसों की फसल में माहू (Aphids) कीट के नियंत्रण के लिए निम्न में से किसी एक माहू की दवा की उचित मात्रा 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करवा सकते है-

  • इंडोसल्फान 35 ई०सी० की 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करवा सकते है.
  • मेटासिस्टाक 25 ई०सी० की एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करवा सकते है.
  • मैलाथियान 50 ई०सी० की 1.50 से 2.50 लीटर प्रति हेक्टेयर दर से छिड़काव करवा सकते है.
  • डाईमिथोएट 30 ई०सी० की एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करवा सकते है.

यदि इन दवाओ का छिड़काव आप नही कराते तो आप फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत धूल या मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल का 20 से 25 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करके इस कीट का नियंत्रण किया जा सकता है.

इन दवाओं का प्रयोग आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर करना चाहिए.

दवा छिड़काव में सावधानियां 

छिड़काव हमेंशा कीट की प्रारम्भिक अवस्था में ही कर देना चाहिए. इसके अलावा छिड़काव शाम के समय करना चाहिए. जिससे इसको लाभ पहुँचाने वाले परभक्षीयों (लेडीबर्ड बीटल, सिरफिड लार्वा इत्यादि) तथा परागण करने वाले कीटों (मधुमक्खी इत्यादि) को कम से कम नुकसान हो.

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