अलसी की खेती में इन रोगों से करे बचाव, तो किसानों का होगा दो गुना फायदा

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अलसी की खेती के रोगों का नियंत्रण कैसे करे?

अलसी की खेती के रोगों का नियंत्रण कैसे करे?

अलसी देश के विभिन्न भागों में तिलहन के रूप में उगाई जाती है. यह एक बहुमूल्य औद्योगिक तिलहन फसल के रूप में जानी जाती है. असली की बाजरी कीमत काफी अच्छी रहती है. क्योकि इसके प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में उपयोग किया जाता है. अलसी को केवल खाने वाले तेल के रूप में ही नही बल्कि इससे दवाइयां भी बने जाती है. 

अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो अलसी की खेती हमारे देश में लगभग 2.96 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में की जाती है. जोकि विश्व का कुल 15 प्रतिशत है. इस हिसाब से देश में बहुत सारे किसान अलसी की खेती करे है. ऐसे में किसान अलसी की खेती से अच्छा उत्पादन ले सके इसके लिए सबसे जरुरी होता है असली की फसल को रोगों से बचाना. तो आइये आज के इस लेख में हम अलसी के रोगों के बारे में पूरी जानकरी को जान सकेगें.

अलसी की खेती के प्रमुख रोग 

1 – अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा (झुलसा रोग) 

अलसी की खेती का यह रोग काफी नुकसान दायक होता है. इसका असर पौधे के सभी भागों पर होता है. सबसे पहले इस रोग में पत्तियों के उपरी सतह पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बन जाते है. जो छल्ले दार होते है. यह रोग ऊपर की ओर बढ़कर तने शाखाओं, पुष्पक्रमों एवं फलियों को भी प्रभावित करता है. रोग की उग्र अवस्था में फलियाँ काली पड़कर मर जाती है और हल्का सा झटका लगने पर टूट कर गिर भी जाती है. 

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रोग की रोकथाम ऐसे करे 

किसान भाई इस रोग की रोकथाम के लिए निम्न उपाय कर सकते है –

  • बीज को 2.5 ग्राम थीरम प्रति किग्रा० बीज की दर से शोधित करके बोना चाहिए. 
  • बुवाई नवम्बर के प्रथम सप्ताह में कर लेनी चाहिए.
  • वही बुवाई के लिय रोग प्रतिरोधी किस्मों जैसे गरिमा, श्वेता, शुभ्रा, शिखा, शेखर आदि को बोना चाहिए.
  • अधिक प्रकोप होने पर किसान भाई खड़ी फसल पर मेन्कोजेब 2.5 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 40 से 50 दिन पर छिड़काव करना चाहिए. दूसरा और तीसरा छिड़काव 15 दिन के अन्तराल पर करे. 

2 – रतुआ या गेरुई रोग

यह रोग भी अलसी की फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. इस रोग में सर्वप्रथम पत्तियों, पुष्प, शाखाओं तने पर रतुआ के नारंगी रंग के फफोले दिखाई देने लगते है. 

रोग की की रोकथाम कैसे करे किसान 

इस रोग की रोकथाम के लिए किसान भाई मेन्कोजेब 2.5 किग्रा० अथवा घुलनशील गंधक 3 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करना चाहिए.

3 – अलसी का उकठा रोग 

उकठा रोग भी अलसी के उत्पादन को काफी कम कर देता है. इस रोग से ग्रस्त पौधे की पत्तियां नीचे से ऊपर की ओर पीली पड़ने लगती है. बाद में पौधा सूख जाता है.     

रोग की रोकथाम इस तरह करे किसान 

इस रोग से बचाव के लिए किसान भाइयों को दीर्घ अवधि का फसल चक्र अपनाना चाहिए. इसके अलावा इसके नियंत्रण के लिए ट्राईकोडर्मा विरिडी 1 प्रतिशत या  ट्राईकोडर्मा हारजिएनम 2 प्रतिशत डब्लू०पी० की 4.० ग्राम प्रति किग्रा० बीज की दर से बीज शोधन करके बुवाई करनी चाहिए. 

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4 – बुकनी रोग है खतनाक 

अलसी की फसल के इस रोग से पत्तियों पर सफ़ेद चूर्ण सा फैल जाता है. और बाद में पौधे की पत्तियां सूख कर नीचे गिर जाती है. 

किसान भाई इस रोग से कैसे करे बचाव 

अलसी के इस रोग की रोकथाम के लिए किसान भाई घुलनशील गंधक 3 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए. 

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