सरसों की अच्छी उपज के लिए कितनी उर्वरक और सिंचाइयाँ करे किसान ? आइए जाने

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Fertilizer and irrigation for good yield of mustard
उर्वरक एवं सिंचाइयाँ 

सरसों की अच्छी उपज के लिए उर्वरक एवं सिंचाइयाँ 

देश मे सरसों की खेती रबी फसलों मे तिलहन के रूप मे की जाती है। वही इस साल देश के किसानों ने लगभग 100 लाख हेक्टेयर रकबे से भी ज्यादा इसकी बुवाई की गई है। जो पिछले साल के मुकाबले 2.27 लाख हेक्टेयर ज्यादा एरिया है। इसकी खेती का बढ़ाना रकबा भारत को खाद्य तेलों की न‍िर्भरता की ओर ले जाने का सूचक है।

लेकिन सरसों की अच्छी उपज के लिए किसानों के इसमें कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखना होगा। पहला इसकी खेती उचित खाद एवं उर्वरक का उपयोग,वही दूसरा इसकी खेती मे की जाने वाली सिंचाईयों का विशेष ध्यान रखना होगा। जिससे किसान भी सरसों की खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त हो। तो आइए इस लेख के जरिए ये जानने की कोशिश करे कि किसान भाई इसकी खेती मे कितनी मात्रा मे उर्वरक एवं कितनी सिंचाई करे।

सरसों की खेती मे खाद एवं उर्वरक

किसान भाई खेती की फसलों मे उपयोग होने वाली खाद एवं उर्वरक का उपयोग मिट्टी के जांच के बाद ही करना उचित रहता है। इसलिए जिस भी खेत मे सरसों की खेती की जानी है। उस खेत की मिट्टी की जांच जरूर करा लेनी चाहिए।

सरसों की खेती मे खाद एवं उर्वरक का उपयोग सिंचाई के साधन की उपलब्धता के अनुसार करना लाभदायक साबित होता है। क्योंकि सिंचित क्षेत्रों के लिए अलग मात्रा मे खाद दी जाती है और असिंचित क्षेत्रों मे खाद एवं उर्वरक की अलग मात्रा मे सरसों की खेती को उर्वरक दी जाती है।

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अगर सिंचित क्षेत्रों मे उर्वरक की मात्रा की बात करे तो किसान भाई 120 किग्रा0 नत्रजन, 60 किग्रा0 फॉस्फेट एवं 60 किग्रा0 पोटाश का प्रति हेक्टेयर उपयोग करना सरसों की फसल की के लिए लाभदायक साबित होता है। यहाँ फास्फोरस का उपयोग सिंगिल सुपर फॉस्फेट के रूप मे करना अधिक लाभदायक साबित होता है। क्योंकि इससे फसल को सल्फर भी मिल जाती है। यदि किसान भाई सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग न करे तो गंधक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 40 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर गधंक का उपयोग कर ले।

वही जो भी किसान भाई सरसों की खेती असिंचित क्षेत्रों मे करते है। तो ऊपर बताई गई उर्वरक की मात्रा आधी कर उसे बेसल ड्रसिंग के रूप मे उपयोग करे। यदि किसान भाई डी0ए0पी0 का उपयोग करते है। तो किसान भाई बुवाई के समय 200 किग्रा0 जिप्सन प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करना सरसों की फसल के लिए काफी लाभदायक साबित होता है।

वही अगर सरसों की खेती मे खाद की बात करे तो इसकी खेती की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए किसान भाई 60 कुंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए।

किसान भाई यहाँ इस बात का ध्यान रखे कि सिंचित क्षेत्रों मे नत्रजन की आधी मात्रा व फॉस्फेट एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय कूड़ों मे बीजों के 2-3 सेमी0 नीचे नाई या चोगें से कर सकते है। वही नत्रजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई (बुवाई के 25-30 दिन बाद) के बाद टॉप ड्रेसिंग मे कर लेना लाभदायक साबित होता है।

सरसों की खेती कितनी सिंचाई करे 

सरसों की खेती में अच्छे उत्पादन के लिए सिंचाईयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्योंकि सरसों की खेती मे यही नमी की कमी हो जाये तो इसमें फूल आने का समय, दाना भरने की अवस्थाओं पर विशेष असर पड़ता है।

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सरसों की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सिंचाई करनी आवश्यक होती है। जहां पर किसान भाई भारी मात्रा मे उर्वरक (120 किग्रा0 नत्रजन, 60 किग्रा0 फॉस्फेट एवं 60 किग्रा0 पोटाश का प्रति हेक्टेयर) करते है और मिट्टी हल्की है तो बढ़िया उपज प्राप्त करने के लिए 2 सिंचाईयों की आवश्यकता होती है। जिसमें पहली सिंचाई फसल की बुवाई के 30-35 दिन बाद और दूसरी सिंचाई वर्षा न होने की दशा मे 55-60 दिन के अंतराल पर करना लाभदायक साबित होता है।

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