आलू की खेती करने वाले किसान इन रोगों एवं कीटों से रहे सतर्क, नहीं तो उठाना पड़ेगा घाटा

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major diseases and pests in potato cultivation
प्रमुख रोग एवं कीटों का नियंत्रण 

आलू की खेती मे लगने वाले प्रमुख रोग एवं कीटों का नियंत्रण 

आलू की खेती सब्जी फसलों मे प्रमुख रूप से की जाती है। क्योंकि पूरे देश इसकी मांग बारहों महीने बनी रहती है। इसलिए इसकी कीमत बाजार मे अच्छी बनी रहती है। लेकिन आलू की खेती करने वाले किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। इसमें लगने वाले रोग और कीट, जो कि इसकी फसल को नुकसान पहुंचाते है। जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है।

वही ठंड और पाले के इस मौसम मे आलू की खेती मे रोगों की अधिक संभावना बनी रहती है। जिससे किसानों को अपनी फसलों को बचाने की जरूरत होती है। तो आइए आज के इस लेख मे यह जानने की कोशिश करते है कि आलू की खेती मे लगने वाले प्रमुख रोग एवं कीट कौन से है और किसान भाई इनका नियंत्रण कैसे कर सकते है –

आलू की खेती के प्रमुख रोग एवं कीट

आलू की खेती मे इसकी फसल मे कई प्रकार के रोग एवं कीटों का प्रकोप होता है लेकिन आज यहाँ पर आपको मुख्य-मुख्य रोगों एवं कीटों की जानकारी दी जाएगी। जो मुख्य रूप से आलू की फसल को अधिक अधिक नुकसान पहुंचते है। तो आईये इनके बारे मे विस्तार पूर्वक जाने –

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आलू का पिछेता झुलसा रोग (लेट ब्लाइट)

आलू की फसल यह रोग अधिक ठंड पड़ने की दशा मे अधिक फैलता है। यह एक फफूंद वाला एक आलू का भयानक रोग है। इस रोग के प्रकोप से आलू की पत्ती, तने तथा कंदों के सभी भागों पर फैल जाता है। इस रोग का प्रकोप की अधिकता तब होती है, जब बदली युक्त मौसम के साथ तापमान 10 ये 20 डिग्री0 सेल्सियस एवं आर्द्रता 80 प्रतिशत होती है।

रोग का नियंत्रण कैसे करे किसान

आलू की फसल मे जब यह रोग दिखाई दे तो किसान भाईओं की फसल की सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। यदि सिंचाई की आवश्यकता हो तो फसल की हल्की सिंचाई करे। वही रोग के लक्षण यदि फसल मे दिखाई दे रहे हो तो पहले ही बीमारी की रोकथाम के लिए जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू0 पी0 1.5-2.0 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर दवा का घोल बनाकर छिड़काव 8 से 10 दिन के अंतराल पर करना लाभदायक साबित होता है।

आलू का अगेता झुलसा रोग

आलू की फसल के इस रोग से आलू के पौधे की पत्तियां और कंदों दोनों ही प्रभावित होते है। शुरुवात मे इस रोग से पौधे के निचली और पुरानी पत्तियों पर छोटे गोल से अंडाकार भूरे धब्बे से दिखाई पड़ते है। वही इस रोग से प्रभावित कंदों पर दबे धब्बे तथा नीचे का गूदा भूरा एवं शुष्क भी हो जाता है।

रोग का नियंत्रण कैसे करे किसान

किसान भाई इस रोग से बचाव के लिए रोग अवरोधी किस्मों का चयन करके ही बुवाई करे। वही रोग का प्रकोप होने पर इसके नियंत्रण के लिए 0.3 प्रतिशत कॉपर ऑक्सीक्लोराइड फफूँदनाशक का घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना लाभदायक साबित होता है।

आलू की पत्ती मुड़ने वाला रोग (पोटेटो लीफ रोल)

आलू की फसल की यह बीमारी एक वायरल बीमारी है। जो कि पी0एल0आर0वी0 नामक वायरस से फैलती है। इससे पौधे की पत्तियां प्रभावित होती है। जिससे आलू के पौधे को नुकसान पहुंचता है। जिसके कारण आलू की फसल के उत्पादन मे गिरावट आती है।

रोग का नियंत्रण कैसे करे किसान

आलू की फसल के इस रोग की रोकथाम के लिए किसान भाई बुवाई के लिए ऐसे बीज का चयन करे जो रोग से रहित हो। वही फसल मे रोग फैलाने पर रोग के वाहक एफ़िड की रोकथाम के लिए किसान भाई दैहिक कीटनाशक तथा फ़ॉस्फ़ोमिडान का 0.04 प्रतिशत घोल मिथाइलऑक्सीडिमीटान अथवा डाइमिथोएट का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर 1-2 छिड़काव दिसम्बर से जनवरी के बीच कर ले।

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किसान भाई दीमक कीट से करे बचाव 

आलू की खेती दीमक का प्रकोप बहुतायत होता है। लेकिन ज्यादातर अगेती आलू की फसल मे इसका अधिक प्रकोप होता है। इस कीट से प्रभावित आलू के पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ मुड़ जाती है। वही जब इसका अधिक प्रकोप होता है तो पौधे की पत्तियां स्मंजीमतल हो जाती है। इसके अलावा पौधे की पत्तियों की निचली सतह पर तांबा के रंग जैसे धब्बे भी दिखाई पड़ती है।

कैसे करे कीट की रोकथाम किसान भाई

किसान भाई दीमक कीट की रोकथाम के लिए कलोर क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ई0सी0 2-3 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ मे उपयोग कर सकते है। इसके अलावा अधिक प्रकोप होने पर यही प्रक्रिया 7 से 10 बाद पुनः दोहराए।

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