सफ़ेद मूसली की खेती कैसे करे – Chlorophytum borivilianum

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सफ़ेद मूसली की खेती
सफ़ेद मूसली की खेती कैसे करे - Chlorophytum borivilianum

सफ़ेद मूसली की खेती कैसे करे – Chlorophytum borivilianum

नमस्कार किसान भाईयों, वर्तमान समय में सफ़ेद मूसली एक अति महत्वपूर्ण एवं लाभकारी औषधि है. यह काफी बलवर्धक व पौष्टिक होती है. इसकी खेती किसान भाईयों के लिए एक लाभकारी आयाम है. साथ ही इसकी खेती किसान भाई अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज सफ़ेद मूसली की खेती (Chlorophytum borivilianum) की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भी इसकी अच्छी उपज प्राप्त कर सके. तो आइये जानते है. सफ़ेद मूसली की खेती (Chlorophytum borivilianum) की पूरी जानकारी-

सफ़ेद मूलसी के फायदे 

औषधि के रूप में इसका कन्द उपयोगी है. जिसका उपयोग मुख्य रूप से बलवर्धक के रूप में किया जाता है. जोकि शरीर की किसी भी कमजोरी को दूर करता है. इसका उपयोग स्त्रियों में दूध की मात्रा बढाने, प्रसव के बाद होने वाले रोग, मधुमेह, नपुंसकता आदि बीमारियों में किया जाता है. इसके अलावा खांसी, अस्थमा, बवासीर, चर्मरोग, पीलिया, पेशाब सम्बन्धी रोगों में भी इसका उपयोग किया जाता है. इस की इसी खासियत के चलते इस की मांग पूरे साल खूब बनी रहती है. जिसका अच्छा दाम मिलता है.

खेती के क्षेत्र 

इस की उपयोगिता को देखते हुए इस की कारोबारी खेती की जाती है. देश में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल व वेस्ट बंगाल आदि राज्यों में की जाती है.

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भूमि एवं तैयारी 

सफ़ेद मूसली कन्द वाला पौधा है. अतः इसके लिए बलुवार दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. व मिट्टी में जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए.

गर्मी की ऋतु में खेत में 10 से 15 ट्राली प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद मिलाकर खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाय. पाटा की सहायता से खेत को समतल करके फावड़ा या रीजर की सहायता से 3.5 फीट चौड़ी व 6.5 फीट ऊँची क्यारी पूरे खेत में बना देनी चाहिए.प्रत्येक दो क्यारी के बीच में सिंचाई, जल निकास व कृषि कार्यों हेतु 1.5 फीट चौड़ी जगह छोड़ देने चाहिए.

कन्द रोपण का समय व विधि 

पहले से बनायी गयी क्यारियों में कन्द का रोपण वर्षा प्रारंभ होते ही करना चाहिए. रोपण हेतु एक कन्द का भार लगभग 5 से 10 ग्राम होना चाहिए. तथा कन्द पर छिलका लगा होना चाहिए. और उसके साथ तने का छोटा सा भाग भी लगा रहना चाहिए. मूसली का कन्द गुच्छों के रूप में होती है. जिसे तेज चाकू की सहायता से अलग कर लिया जाता है. कन्द को काटते समय यह ध्यान रखना चाहिए. कि प्रत्येक कन्द के साथ तने का छोटा भाग जिसमें एक कलिका हो, अवश्य होना चाहिए.

एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 10 से 12 कुंटल कन्द की आवश्यकता पड़ती है. कन्द को पतली खुरपी की सहायता से क्यारियों में 6″x6″ की दूरी पर पंक्तियों में लगाना चाहिए व इसकी गहराई 1 इंच रखनी चाहिए.

कन्द को लगाने से पहले बीमारी से मुक्त होने के लिए बावस्टीन के घोल में दो मिनट तक रखना चाहिए. कन्द लगाते समय यह ध्यान रखना चाहिए की कन्द से लगा हुआ तने का भाग ऊपर व अंतिम शिरा नीचे होना चाहिए. रोपण के उपरान्त बारीक मिट्टी से कन्द को ढक देना चाहिए. रोपाई के समय में मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए.

खाद एवं उर्वरक  

मूसली की लाभकारी खेती के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट का प्रयोग करना चाहिए जिसकी मात्रा 10 से 15 ट्राली प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए. अच्छी फसल के लिए ढैंचा या सनई की हरी खाद का प्रयोग बुवाई के पहले करना चाहिए. अच्छे औषधीय गुणों व निर्यात हेतु सफ़ेद मूसली को उगाने के लिए आर्गेनिक खाद का ही प्रयोग करना चाहिए.

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण 

समय से वर्षा न होने पर मिट्टी को नाम बनाने के लिए सिंचाई करना आवश्यक होता है. एवं अधिक वर्षा होने पर जल का निकास करते रहना चाहिए. वर्षा ऋतु के पश्चात खेत में 10 से 15 दिनों के अंतराल पर खेत की हल्की सिंचाई करना चाहिए. छिड़काव यंत्र से सिंचाई करने से फसल की उपज बढ़ जाती है. और सिंचाई के जल की बचत भी बचत होती है. फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिए समय-समय पर खेत की निकाई करते रहना चाहिए.

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कन्द की खुदाई एवं उपज 

रोपण के 90 से 100 दिन बाद मूसली के पत्ते सूखने लगते है. किन्तु उसकी कन्द सफ़ेद रहती है. अथ इसको दो माह बाद अर्थात जनवरी माह में कन्द भूरी होने पर मूसली की खुदाई करनी चाहिए..

एक पौधे से लगभग 10 से 12 कन्द प्राप्त होते है. व उसका वजन 10 ग्राम प्रति कन्द होता है. इस प्रकार एक हेक्टेयर में लगभग 10 कुंटल सूखी मूसली प्राप्त होती है. जोकि 90 से 100 कुंटल हरी मूसली को सुखाकर प्राप्त किया जाता है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है, गाँव किसान (Gaon Kisan) के इस लेख से सफ़ेद मूसली की खेती (Chlorophytum borivilianum) के बारे में जानकारी मिल पायी होगी. अगर इस लेख समबन्धित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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