इस राज्य के ग्रामीण इलाकों में चल रहा है वैक्सीन महाअभियान, क्योंकि यह बीमारी बन रही है पशुओं की मौत का कारण

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Goiter Disease in Patna 
बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन महाअभियान

पशुओं के गलघोटू बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन महाअभियान | Goiter Disease in Patna 

ठंड का मौसम शुरू होते ही पशुओं में कई तरह की बीमारियां होने की आशंका बनी रहती है. जिसके कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है. जिससे पशुपालक किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. वही बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में गलघोटू बीमारी की वजह से कई पशुओं की मृत्यु हो चुकी है. जिससे किसानों को काफी नुकसान भी हुआ है. इसी को देखते हुए वहां की राज्य सरकार द्वारा राजधानी पटना में पशुओं को बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन महाअभियान की शुरुआत की है. यह महाअभियान 15 दिसंबर तक चलाया जाएगा.

बिहार की राज्य सरकार ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में गलघोटू और लंगडी जैसी संक्रामक  बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए महाअभियान की शुरुआत की है. इसके लिए पटना के धनरूआ प्रखंड में 19 वैक्सीनेशन टीम गठित की गई है. वहीं मसौढ़ी में 17 और पुनपुन में 13 टीमों का गठन किया गया है.यह टीमे 15 दिसम्बर तक गाँव में डोर तो डोर पशुपालकों के यहाँ जाकर टीकाकरण किया जायेगा.

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ट्रांसपोर्ट फीवर क्या है?

ट्रांसपोर्ट फीवर को शिपिंग फीवर भी कहा जाता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार गलघोटू बीमारी से ग्रसित पशुओं को अगर समय पर उपचार नहीं मिलता है, तो उनकी मौत निश्चित हो जाती है. यह बीमारी पाश्चररूल्ला माल्टोसेड़ा नामक जीवाणु से फैलती है. वही यह बीमारी गाय और भैंसे पर पड़ने वाले दबाव के समय ज्यादा फैलती है. इसी कारण से इस बीमारी का नाम शिपिंग फीवर या ट्रांसपोर्ट फीवर कहा जाता है. ठंड के मौसम में जब वातावरण में बदलाव होता है. तो पशु पर एक दबाव की वजह से टॉन्सिल और नाक में रहने वाले यह जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं. जिससे पशु बीमारी से लड़ने में अक्षम हो जाता है. जिसके कारण इसकी मौत भी हो जाती है.

एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से फैलती है यह बीमारी

पशु चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से फैल जाती है. इसलिए इसे छुआछूत की भी बीमारी कहा जाता है. यदि कोई स्वस्थ पशु एकगलघोटू से ग्रसित पशु के समीप बांधा जाए, तो वह पशु भी इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है. क्योंकि बीमार पशु से स्वस्थ पशु में यह सांस द्वारा, उसके बचाए हुए झूठ भोजन को खाने से या उसके संपर्क में आने से, बीमार पशु के मुंह से गिरने वाली लार से या गांव के जौहर में पशु बीमार पशु के जाने से यह अधिक फैलती है.

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राज्य के पशुपालन विभाग द्वारा राजधानी पटना से इस महाअभियान वैक्सीन की शुरुआत कर दी गई है. सभी वैक्सीनेटर को विभिन्न पंचायत में उन्हें युद्ध स्तर पर पशुओं को टीका देने के लिए टीकाकरण की शुरुआत कर दी गई है. वहीं पशुपालन पदाधिकारी डॉक्टर सचदेव के अनुसार धनरूआ प्रखंड में 19 पंचायतें हैं सभी पंचायत के लिए टीम बनाकर टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी गई है. डॉक्टर धनंजय कुमार ,डॉक्टर रेनू सिंह को तैनात किया गया है.

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