अगर किसानों को बनना है मालामाल, तो इस तरह करें कद्दू की खेती, आइये जाने कैसे

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kaddu ki kheti
कद्दू की खेती से किसान बनेंगे मालामाल

कद्दू की खेती से किसान बनेंगे मालामाल

देश के ज्यादातर किसान अब नगदी फसलों की खेती की तरफ रख कर रहे हैं. खासकर सब्जी फसलों की तरफ क्योंकि यह फसले किसानों को आर्थिक रूप से काफी मजबूत बनाती हैं. इसी कड़ी में आज हम लोग सब्जी की एक ऐसी फसल की बात करने वाले हैं .जो किसानों को अच्छा खासा मुनाफा दे सकती है. जी हां, हम बात करने वाले हैं कद्दू की खेती (kaddu ki kheti) के बारे में.

कद्दू की खेती की फसल बहुत ही कम समय में तैयार हो जाती है. साथ ही इसमें मौजूद पोषक तत्वों के कारण यह काफी स्वास्थ्यवर्धक होती है. इसीलिए बाजार में इसकी मांग भी काफी ज्यादा रहती है. इस कारण इसका बाजार भाव भी अन्य सब्जी फसलों की अपेक्षा काफी अच्छा रहता है. तो आईए जानते हैं, कद्दू की खेती (kaddu ki kheti) के बारे में पूरी जानकारी, जिससे किसान भाई इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकें.

कद्दू के फायदे

अन्य सब्जियों की तरह कद्दू की सब्जी में भी काफी पोषक तत्व पाए जाते हैं. जिससे यह हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक साबित होती है. कद्दू के बीज मटर के बीजों की तरह द्विबीजीय श्रेणी में आते हैं. कद्दू का इस्तेमाल सब्जी से लेकर दाल में तथा अन्य व्यंजनों को बनाने में किया जाता है. इसके अलावा इसके बीजों को भी खाने के उपयोग में लाया जाता है.
कद्दू का उपयोग विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनाने में भी किया जाता है. पीले रंग के कद्दू का उपयोग करने से हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. इसका पीला रंग कैरोटीन की अधिक मात्रा के साथ जिंक भी पाए जाने के कारण होता है. इससे यह हमें सर्दी खांसी जुकाम और वायरस जैसे संक्रामक से भी बचाता है.

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कद्दू की खेती के लिए मिट्टी एवं जलवायु

कद्दू की खेती (kaddu ki kheti)के लिए दोमट मिट्टी सबसे सर्वोत्तम मानी गई है. लेकिन जल भराव वाली जमीन इसकी खेती के लिए हानिकारक होती है. इसलिए किसान भाई इस बात का ध्यान रखें खेत से जल निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए. कद्दू की खेती के लिए भूमिका पी०एच० मान 5 से 7 के बीच सबसे उपयुक्त माना गया है.

वहीं अगर जलवायु की बात की जाए, तो कद्दू की अच्छी फसल के लिए गर्म और सर्द दोनों प्रकार की जलवायु सर्वोत्तम मानी जाती है. देश में कद्दू की खेती अधिकतर बरसात के सीजन में की जाती है. लेकिन कद्दू के पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए गर्मियों का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है. वहीं सर्दियों के मौसम में गिरने वाला पाला इसकी खेती के लिए हानिकारक माना जाता है. वहीं बरसात के मौसम में इसके फूलों को अधिक बारिश से नुकसान होने का डर बना रहता है. क्योंकि अधिक बारिश से इसके फूल खराब हो जाते हैं.

कद्दू की उन्नत किस्म

कद्दू (pumpkin) की अच्छी उपज के लिए अच्छी किस्म का चुनाव करना सबसे जरूरी होता है. अगर कद्दू की उन्नत फसलों की बात की जाए तो पूसा विश्वास, काशी उज्जवल, डी०ए०जी०एच०16,काशी धवन, पूसा हाइब्रिड-1 आदि उन्नत किस्म है.

खेत तैयारी कैसे करें किसान

कद्दू (cultivate pumpkin) की अच्छी फसल के लिए सबसे जरूरी होता है. खेत की अच्छी तरह तैयारी करना. इसके लिए किसान भाई खेत को दो से तीन बार अच्छी तरह से गहरी जुताई करनी चाहिए. वही आखिरी जुताई के समय गोबर की सड़ी हुई खाद डालकर खेत की भूमि में मिला देनी चाहिए. ऊपर से पाटा लगाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए. इसके उपरांत किसान भाई कद्दू की फसल को लगाने के लिए खेत में तैयारी तैयार कर लेनी चाहिए.

कद्दू की खेती (kaddu ki kheti ) के लिए उपयुक्त समय एवं रोपाई का तरीका

देश के अधिकतर किसान कद्दू की रोपाई जून माह में बारिश के पहले करते हैं. जोकि इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम होता है. लेकिन पर्वती क्षेत्र में जहां बारिश कम होती है और सिंचाई की कम जरूरत होती है, वहां यह मार्च और अप्रैल महीने में बोया जाता है. लेकिन देश के विभिन्न क्षेत्रों में अगस्त महीने में भी इसको उगाया जाता है.

किसान भाइयों को एक हेक्टेयर कद्दू की खेती के लिए 3 से 4 किलो बीजों की जरूरत पड़ती है. किसान भाई इन बीजों को हाथ से ही रोपाई कर सकते हैं. बीजों को बुवाई से पहले थीरम या बोविस्टीन के घोल में उपचारित करना इसकी खेती के लिए लाभदायक होता है. वही खेत की तैयारी कर क्यारियां तैयार कर लेना चाहिए. इन क्यारियों में इनकी रोपाई करनी चाहिए. क्यारियों के बीच में 4 से 5 मीटर की दूरी होना बहुत जरूरी है. वहीं बीजों की रोपाई करते समय आप एक से डेढ़ फीट की दूरी रख सकते हैं. इससे पौधों का विकास अच्छा होता है और इसकी फसल अधिक उपज देती है.

कद्दू की फसल में सिंचाई

कद्दू की फसल की अच्छी उपज के लिए सिचाई की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए. क्योंकि सिंचाई की पर्याप्त मात्रा से इसमें अधिक मात्रा में फल लगते हैं. पौधे को नमी की जरूरत होती है. इसलिए 3 से 4 दिन के अंतराल पर सिंचाई जरूर करनी चाहिए. वहीं गर्मियों में सप्ताह में 1 से दो बार पानी आवश्यकतानुसार दे सकते हैं. लेकिन बरसात के मौसम में यदि बारिश अच्छी हुई तो सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है.

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कद्दू की फसल में उर्वरक एवं खाद

कद्दू की अच्छी पैदावार के लिए किसान भाई खेत में संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरक का प्रयोग जरूर करें. वही जुताई के समय गोबर की खड़ी हुई खाद का इस्तेमाल करें. इसके लिए किसान भाई एक हेक्टेयर में 15 गाड़ी खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा कंपोस्ट खाद भी डाली जा सकती है. रासायनिक खाद की बात की जाए तो 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम पोटाश और 50 किलोग्राम फास्फोरस की मात्रा इसकी फसल को जरूरत होती है. जोकि किसान भाई आखरी जुताई के समय खेत में प्रयोग कर सकते हैं. वही 40 किलोग्राम नाइट्रोजन सिंचाई के साथ दो बार में डालें.

कद्दू की फसल की तुड़ाई एवं उपज

किसान भाई कद्दू की फसल की रोपाई करने के बाद पौधे से 100 से 110 दिन के अंतराल पर इसमें कद्दू के फल लगने लगते हैं. कद्दू के फलों के ऊपर पीले सफेद रंग के दिखाई दें तब यह समझ लेना चाहिए कि इसके फलों को अब तोड़ लेना चाहिए. वही किसान भाई इसके हरे फलों को 70 से 80 दिन में ही तोड़ सकते हैं.

कद्दू की उपज की बात की जाए तो एक हेक्टेयर के खेत में किसान भाई 400 कुंतल तक कद्दू की पैदावार ले सकते हैं. देखा जाए तो हमारे यहां लोकल मार्केट में इसका भाव 10 से 20 रुपए के बीच रहता है. इस हिसाब से किसान भाई एक हेक्टर कद्दू की फसल से लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं.

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