बटेर पालन (Quail Rearing) – घर बैठे हर महीने अच्छा पैसा कमाये

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Quail Rearing
बटेर पालन (Quail Rearing)

बटेर पालन (Quail Rearing) कर कमाए अच्छा मुनाफा 

नमस्कार किसान भाईयों, किसान भाई अपनी आमदनी बढ़ने के लिए खेती के साथ-साथ खेती से जुड़े अन्य व्यवसाय भी करते है.जैसे मुर्गी पालन, बकरी पालन, पशुपालन आदि. इन्ही व्यवसायों से उत्साहित किसानों को अब एक नई खेती मिल गई है बटेर पालन. बटेर फार्मिंग एक बेहतर व्यवसाय है. जिसमें ज्यादा न मेहनत है न ही ज्यादा पैसे का खर्च हैं.

यह एक जंगली पक्षी है, जो ज्यादा दूर तक नहीं उड़ पाता है. यह पक्षी अपना घौंसला जमीन पर ही बनाता हैं. इस पक्षी के स्वादिष्ट एवं पौष्टिक गुणवत्ता वाले मांस (Meat) के कारण लोग इसे खाना अधिक पसंद करते है. वन्य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत इनका शिकार करना प्रतिबंधित है, लेकिन सरकार द्वारा लायसेंस लेकर बटेर पालन किया जा सकता है. आज गाँव किसान अपने इस लेख में बटेर पालन (Quail Rearing) की पूरी जानकारी देगा जिससे आप इसका पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सके.

बटेर पालन से क्या-क्या लाभ है? (Benefits of Quail farming)

  • बटेर पक्षी आकार में काफी छोटा होता हैं इसलिए इन्हें कम जगह में इसका पालन किया जा सकता है.
  • यह पक्षी जल्दी ही तैयार हो जात हैं इसकी मादा पक्षी 6 से 7 सप्ताह में ही अण्डे देना प्रारंभ कर देती है तथा बटेर केवल 5 सप्ताह में बाजार में बेचने लायक तैयार हो जाता है.
  • मादा बटेर एक साल में लगभग 250 से 300 अंडे देने की क्षमता रखती है.
  • मुर्गी की अपेखा बटेर का मांस काफी स्वादिष्ट लगता है, इसमें वसा (Fat) की मात्रा भी बहुत कम पायी जाती है. जिससे लोगो को मोटापा (Obesity) कम करने में काफी मदद मिलती है.
  • बटेर पालन (Quail Rearing) में बहुत कम लागत में इसका रखरखाव व आहार हो जाता है.
  • खेती या मुर्गी पालन के साथ किसान भाई कुछ संख्या में बटेर पालकर इस व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं.
  • मानव आहार को संतुलित बनाने के लिए मांस और अंडे की जरूरत पड़ती है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि बटेर पालन कर अनेक लाभ लिए जा सकते हैं.

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बटेर की उन्नत नस्लें (Breeds of Quail birds)

आज दुनिया में लगभग 18 नस्ल की बटेर पायी जाती है, जिसमें से लगभग सभी भारत की जलवायु (Indian climate) में पाली जा सकती हैं. इन बटेर की नस्लों में कुछ नस्लें मांस और अंडे के लिए प्रचलित है. किसान भाई अपनी सुविधानुसार नस्लों का चयन कर सकते है.

बटेर की बोल व्हाइट नस्ल :- बटेर की यह नस्ल मांस उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती है. बटेर की यह नस्ल अमेरिकन है.

बटेर की व्हाइट बेस्टेड नस्ल :- बटेर की यह नस्ल भारतीय प्रजाति की ब्रायलर है. यह मांस के लिए सबसे उपयुक्त नस्ल है.

बटेर कीअण्डे देने वाली नस्ले :- अंडे देने वाली नस्लों में ब्रिटिश रेंज, इंग्लिश व्हाइट, मंचूरियन गोलन फिरौन एवं टक्सेडो आदि प्रमुख नस्लें है.

बटेर पालन में आवास  (Housing system in Quail farming)

बटेर पालन (Quail farming Commercial quail farming) में आवास बहुत महत्वपूर्ण होता है. बटेर आवास के लिए दो प्रकार की प्रणाली का उपयोग कर इसका पालन किया जा सकता है पहली बिछावन प्रणाली (Laying system) तथा दूसरी पिंजरा विधि है, इसमें पिंजरा विधि ज्यादा प्रचलित है इसका का प्रयोग  कर अधिक लाभ मिलता है तथा यह सुविधाजनक भी होता है.बटेर की आयु जब दो सप्ताह की हो जाय तो पक्षियों को पिंजरे में रखा जा सकता है. इन पक्षियों को 3 X 2.5 X 1.5 वर्ग फीट आकार वाले पिंजरे में रखना सबसे बढ़िया रहता है.

इसके अंडों के उत्पादन के लिए कई पिंजरे रखने पड़ते हैं, और पहर पिंजरे के अंदर 10-12 अंडे देने वाली बटेर को रखना पड़ता है. बेहतर प्रजनन के लिए तीन मादा बटेर के साथ एक नर बटेर रखा जाता है. बटेर आवास के अन्दर ताजी हवा और प्रकाश की बेहतर व्यवस्था रखने की आवश्यता होती है.

छोटे चूजो के आवास में खिड़कियां और रोशनदान होना बहुत ही आवश्यक होता है जिससे एक समान रोशनी और हवा चूजों को हर समय मिलती रहे. बटेर के चूजों को पहले दो सप्ताह तक 24  घंटे प्रकाश की आवश्यकता होती है, हर समय गर्मी बनी रहे इसके के लिए बिजली की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए. एक दिन के बटेर के चूजों के लिए बिजली ब्रूडर का तापमान प्रथम सप्ताह में 950 फोरेनहाइट होना चाहिए, बाद में 50 फोरेनहाइट प्रति सप्ताह कम करते रहना चाहिए.

बटेर पालन में आहार (Dietary plan in Quail farming)

बटेर का वजन एक किलों करने के लिए 2-2.5 किलो आहार की आवश्यकता पड़ती है जिससे बटेर का अच्छा शारीरिक विकास व स्वास्थ्य हो. जिससे उत्पादन को बढ़ाया जा सके. बटेर पालन से ज्यादा  लाभ प्राप्त करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला संतुलित आहार खिलाना बहुत ही आवश्यक होता है. एक व्यस्क बटेर को प्रतिदिन 20-35 ग्राम आहार की जरुरत पड़ती है. एक नवजात शिशु बटेर के लिए आहार में लगभग 27% प्रोटीन तथा व्यस्क के लिए 22-24 % प्रोटीन होनी जरुरी होती है.

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बटेर पालन में उचित देखभाल एवं प्रबंधन (Care and management of Quail Rearing)

अन्य पक्षियों के पालन के तुलना में बटेर पालन (Quail Rearing) में रोगों के प्रति बहुत प्रतिरोधी (Resistant) होती है इसलिए बटेर में टीकाकरण (Vaccination) की जरुरत नहीं या कम पड़ती है. बटेर पालन में बढ़िया उत्पादन तथा पक्षियों को रोगों से बचाने के लिए अच्छी देखभाल, अच्छे आवास एवं संतुलित आहार की जरुरत होती है. बटेर पालन में नियमित आहार में विटामिन एवं खनिज मिश्रण पर्याप्त मात्रा में देने की आवश्यकता होती है.

बटेर के लिए बाजार (Quail marketing)

आज बाजार में बटेर के मांस एवं अंडों की बहुत अधिक मांग रहती है. बटेर पालन के उत्पादों को आसानी से नजदीकी स्थानीय बाजार में या नजदीकी शहरों में बेच सकते है. इसलिए आज देश में व्यावसायिक स्तर पर बटेर पालन आय एवं रोजगार का एक अच्छा विकल्प बन गया है.

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