Beetroot cultivation | चुकंदर की खेती कैसे करे जिससे हो अच्छा मुनाफा ?

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Beetroot cultivation
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Beetroot cultivation – चुकंदर की खेती कैसे करे ?

नमस्कार किसान भाईयों, चुकंदर की खेती (Beetroot cultivation) देश में पूरे साल की जाती है. यह अगल-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर उगाई जाती है. यह स्वास्थ्य के काफी लाभदायक होती है इसलिए पूरे साल बाजार में इसकी मांग बनी रहती है. किसान भाई चुकंदर की खेती व्यावसायिक रूप से कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है. इसलिए गाँव किसान (GAON KISAN) आज आपको चुकंदर की खेती (Beetroot cultivation in hindi) की पूरी जानकारी देगा. जिससे आप इसकी अच्छी उपज प्राप्त कर सके.

चुकंदर की खेती के फायदे  (Benefits of beetroot farming)

चुकंदर एक स्वास्थ्यवर्धक सब्जी है. जिसे कचचा या पकाकर खाया जाता है. इसे मीठी सब्जी भी कहा जाता है. इसमें फाइबर के अलावा विटामिन ए और सी से भरपूर मात्रा में पाया जाता है. चुकंदर में आयरन भी अधिक मात्रा में पाया जाता है. चुकंदर का उपयोग एनीमिया, अपच, कब्ज, पित्ताशय विकारों, कैंसर, हृदय रोग, बवासीर और गुर्दे के विकारों आदि रोगों में काफी फायदेमंद होता है.

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चुकंदर की खेती के लिए मिट्टी (Soil for Beet Cultivation)

चुकंदर की अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट मिट्टी की जरुरत होती है. जलभराव वाली भूमि में इसकी खेती में नुकसान उठाना पड़ता है क्योकि जलभराव की स्थिति में फलों में सडन शुरू जाती है. इसकी खेती के लिए भूमि का P.H. मान 6 से 7 के मध्य होना चाहिए.

उपयुक्त जलवायु और तापमान (Beetroot Cultivation Suitable Climate and Temperature)

चुकंदर की खेती (beetroot farming) के लिर ठन्डे राज्यों को उपयुक्त माना जाता है. साथ ही सर्दियों का मौसम इसके पौधों के विकास के लिए काफी उपयुक्त होता है. चुकंदर की खेती में ज्यादा बारिश की जरुरत नहीं होती है, अधिक वर्षा इसकी उपज को प्रभावित कर देती है. इसके पौधों के विकास के लिए सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है, तथा 20 डिग्री तापमान को इसके एकदम लिए उपयुक्त माना जाता है.

चुकंदर की खेती के लिए उपयुक्त समय (Beetroot cultivation time)

देश के अधिकतर क्षेत्रों में अगस्त व सितंबर से इसकी खेती की जाती है. लेकिन दक्षिण भारत में फरवरी मार्च में इसकी खेती की जाती है.घर पर सब्जी के इस्तेमाल करने के लिए कोई भी व्यक्ति इसे अपने किचन गार्डन या गमले में भी उगा सकता है.

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चुकंदर की खेती के लिए खेत की तैयारी (beetroot farming Field Preparation)

चुकंदर की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए खेत को अच्छी प्रकार से तैयार करना चाहिए. इसके लिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए. इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसे ही छोड़ देना चाहिए, जिससे खेत की मिट्टी में अच्छी तरह से धूप लग जाये.

इसके उपरान्त जुते हुए खेत में गोबर की सड़ी हुई खाद को डालकर दो से तीन जुताई कर खाद को मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए. खाद को मिट्टी में मिलाने के बाद खेत में पानी लगा कर पलेव कर दे. तदुपरांत जब खेत की मिट्टी ऊपर से सूखी दिखाई देने लगे तब फिर से सघन जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाकर पाटा लगा दे.

चुकंदर की किस्में (Beetroot Improved Varieties)

एम. एस. एच. – 102 किस्म 

चुकंदर की इस की फसल को तैयार होने में लगभग तीन माह का समय लगता है. चुकंदर की इस किस्म की पैदावार काफी अधिक है. यह किस्म लगभग 250 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है

क्रिमसन ग्लोब किस्म

चुकंदर की क्रिमसन ग्लोब किस्म कम समय में अधिक पैदावार देने के लिए जानी जाती है. इसकी फसल 70 से 80 दिन में तैयार हो जाती है. इसके फलो का रंग बाहर और अंदर हल्का लाल होता है. इस किस्म का उत्पादन लगभग 300 कुंतल प्रति हेक्टेयर है.

इन किस्मों के अलावा भी चुकंदर की कई अन्य किस्मे पाई जाती है. जिसमे अर्ली वंडर, रोमनस्काया, डेट्रॉइट डार्क रेड, मिश्र की क्रॉस्बी आदि प्रमुख किस्मे है.

चुकंदर के बीजो की रोपाई (Beet seed planting) 

चुकंदर की रोपाई के लिए उन्नत किस्म के बीजो को ही खरीदना चाहिए. स्थ ही बीजो को रोपाई से पहले उपचारित कर लेना चाहिए, इससे चुकंदर के पौधों में लगने वाले रोगो का खतरा कम हो जाता है. एक हेक्टेयर के खेत की बुवाई के लिए में लगभग 8 किलो बीज की जरुरत पड़ती है.

इसके बीजो की रोपाई समतल और मेड दोनों ही तरह की भूमि में की जा सकती है. समतल भूमि में इसकी रोपाई के लिए छोटी-छोटी क्यारियां तैयार कर ली जाती है, इन क्यारियों में लगभग एक फ़ीट की दूरी रखते हुए पंक्तियो में बीजो की रोपाई कर सकते है. इसमें पंक्ति से पंक्ति के बीच में एक फीट की दूरी रखते है. इसके अलावा बीज से बीज की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इसी प्रकार किसान भाई मेडों पर भी इसकी रोपाई कर सकते है.

चुकंदर की सिंचाई (Beet Plants Irrigation)

Chukandar ki kheti में पौधों के अच्छे विकास के लिए नमी की जरुरत होती है. इसलिए बीजो की रोपाई के तुरन्त बाद इसकी पहली सिंचाई करनी चाहिए, तथा बीज अंकुरण के बाद इसमें पानी की मात्रा को कम कर देना चाहिए. चुकंदर में लगभग 10 दिनों के अंतराल पर हल्का पानी देना उचित होता है.

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चुकंदर की खुदाई का तरीका (Beet Plants Method)

चुकंदर की फसल तीन से चार महीने में तैयार हो जाती है.पौधों की पत्तिया पीले रंग की दिखाई देने लगे तो समझ लेना चाहिए फल खुदाई के लिए तैयार है. उस समय इसकी खुदाई कर लेनी चाहिए. इसके फलो की खुदाई से पहले खेत में थोड़ा पानी लगा देना चाहिए, जिससे फलो को जमीन से निकालते समय आसानी हो जाती. फलो की खुदाई करने के बाद इन्हें अच्छी प्रकार धुलकर मिट्टी को साफ कर लेनी चाहिए. इसके बाद इन्हें छाया में सुखाकर बाजार भेज सकते है.

चुकंदर की उपज और लाभ (Beetroot Yield)

चुकंदर की किस्मो के आधार पर लगभग 150 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार ली जा सकती है. चुकंदर के बाजार भाव किस्म और फल के हिसाब से लगभग  20 से 50 रूपए के बीच का होता है. इस हिसाब से एक हेक्टेयर में किस्सान भाई चुकंदर की खेती से लगभग दो से तीन लाख रुपये की अच्छी कमाई कर सकते है.

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