Basil cultivation in Hindi – तुलसी की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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Basil cultivation in Hindi
तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) कैसे करे ?

तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) कैसे करे ?

नमस्कार किसान भाईयों, तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) देश के कई राज्यों में की जाती है. जिससे किसान भाई काफी लाभ ले रहे है. तुसली की खेती एक वर्षीय फसल के रूप में भी की जा सकती है. तथा तीन माह की फसल के रूप में भी. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) की पूरी जानकारी अपनी भाषा हिंदी में देगा. जिससे किसान इसकी खेती उन्नत विधि से कर पाए. तो आइये जानते है तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) की पूरी जानकारी –

तुसली के फायदे (benefits of Basil)

भारत के अधिकांश घरों में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है. आयुर्वेद में तुसली के फायदे का विस्तृत वर्णन मिलाता है. हमारे ऋषियों को लाखों वर्ष पूर्व तुसली के औषधीय गुणों का ज्ञान था इसलिए इसको दैनिक जीवन में प्रयोग हेतू इतनी प्रमुखता से स्थान दिया है. तुलसी का औषधीय उपयोग बुखार, गला ख़राब, किडनी स्टोंस, ह्रदय सम्बन्धी रोगों, श्वास, थकान, त्वचा, नेत्र रोगों, दांतों की बीमारियाँ तथा सिरदर्द आदि रोगों में उपयोग किया जाता है. इसके अलावा इसके पत्तों से तेल निकाला जाता है. जिसका उपयोग टूथपेस्ट एवं सुगंधीय पदार्थ बनाने में किया जाता है.

तुलसी का उत्पत्ति एवं वितरण (Origin and distribution of Basil)

तुसली का वानस्पतिक नाम ओसिमम सेक्टम (Ocimum sanctum Linn) है. यह लेमिएसी कुल का पौधा है. यह एक भारतीय पौधा है. इसकी खेती पूरे भारत में की जा सकती है. देश में वाणिज्यिक रूप से इसकी खेती मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब आदि राज्यों में की जाती है.

तुलसी के लिए जलवायु एवं मिट्टी (Climate and soil for basil)

तुलसी की खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय एवं उपोष्ण कटिबंधीय दोनों तरह की जलवायु सर्वोत्तम होती है. इसकी खेती के लिए बरसात का मौसम सबसे उपयुक्त है.

इसकी खेती विभिन्न प्रकार की भूमि में की जा सकती है. लेकिन दोमट, बलुई मिट्टी जिसमें जीवांश की मात्रा इसकी अच्छी उपज के लिए उपयुक्त होती है. भूमि से पानी निकास का उचित प्रबन्धन होना चाहिए.

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तुलसी की उन्नत किस्में (Advanced varieties of Basil)

तुलसी को पुरसा, ग्राम्या, सुलभा, बहुमंजारी, तथा होली आदि नामों से अलग-अलग कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे बेसिल कहते है. विश्व में इसकी लगभग 150 प्रजतियां पायी जाती है. तुलसी की प्रमुख प्रजातियाँ निम्न प्रकार है-

बेसिल तुलसी या फ्रेंच बेसिल – इसमें मुख्य रूप से स्वीट फ्रेंच बेसिल, कर्पूर तुलसी, काली तुलसी, वन तुलसी या राम तुलसी, जंगली तुलसी आदि प्रमुख किस्में है.

होली बेसिल – इसमें मुख्य रूप से श्री तुलसी या श्यामा तुलसी प्रमुख किस्म है.

तुलसी के लिए खेत तैयारी (Field preparation for basil)

तुलसी की अच्छी उपज के लिए खेत की तैयारी अच्छी प्रकार करनी चाहिए. इसके लिए खेत की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. भूमि से जल निकास की उचित प्रबन्धन करना चाहिए.

तुलसी की बुवाई या रोपाई (Sowing or transplanting of basil)

तुसली की खेती बीज द्वारा की जाती है. लेकिन खेत में बीज की बुवाई सीधे न करे. इसके लिए सबसे पहले बीज को पौधशाला में बोये और तैयार पौध को खेत में रोपाई करनी चाहिए.

तुलसी की पौध तैयार करना (Preparing basil plant)

तुलसी की पौध तैयार करने के लिए जमीन की 15 से 20 सेमी० तक अच्छी प्रकार खुदाई कर खरपतवार मुक्त कर लेनी चाहिए. इसके बीज की बुवाई के लिए 1 x 1 मीटर आकार की जमीन की सतह से उभरी हुई क्यारियाँ बना कर उचित्त खाद एवं उर्वरक मिट्टी में मिला देना चाहिए. एक हेक्टेयर तुसली की बुवाई के लिए 750 ग्राम से 1 किग्रा बीज पर्याप्त होता है. इसके बीज की बुवाई 1:10 के अनुपात में रेत या बालू मिलकर 8 से 10 सेमी० की दूरी पर पंक्तियों पर की जाती है. बीज की गहराई अधिक नही होनी चाहिए. जमाव के 15 से 20 दिन बाद 20 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से नत्रजन डालना उपयोगी होता है. पांच से छः सप्ताह में पौधे रोपाई तैयार हो जाती है.

तुलसी की रोपाई (Transplanting of Tulsi)

तुलसी रोपाई सूखे मौसम में की जानी चाहिए. इसके लिए दोपहर के बाद ही रोपाई करनी चाहिए. जब पौधे की रोपाई कर ले तो इसकी हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए. अगर रोपाई वाले दिन हल्की बारिश या बादल हो तो सर्वोत्तम होता है. रोपाई में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सेमी० तथा पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी० रहनी चाहिए.

तुलसी के लिए खाद एवं उर्वक (Fertilizers for basil)

तुलसी में खेत की तैयारी करते समय 15 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर के दर से खेत में डाल देना चाहिए. इसके अलावा 75 से 80 किग्रा० नत्रजन एवं 40-40 किलोग्राम फास्फोरस व पोटाश की आवश्यकता होती है. रोपाई से पहले एक तिहाई नत्रजन तथा फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत की मिट्टी  में मिला देना चाहिए. बाकी बची हुई नत्रजन की मात्रा दो बार में खड़ी फसल में देनी चाहिए.

तुलसी का खरपतवार नियंत्रण (Basil Weed Control)

तुलसी की अच्छी उपज के लिए निराई-गुड़ाई बहुत ही आवश्यक है. इससे खेत साफ रहता है और खरपतवार का नियंत्रण रहता है. पहली निराई गुड़ाई पौध रोपाई के एक महीने बाद करनी चाहिए. इसके बाद दूसरी निराई-गुड़ाई पहली गुड़ाई के 3 से 4 सप्ताह बाद करनी चाहिए. इसकी फसल की लिए दो ही निराई-गुड़ाई पर्याप्त होती है.

 तुलसी की फसल कटाई (Harvesting of basil)

तुलसी की फसल कटाई के लिए जब पौधे में पूरी तरह फूल आ जाय तथा नीचे के पत्ते पीले पड़ने लगे तो इसकी कटाई कर लेनी चाहिए. रोपाई के 10 से 12 सप्ताह के बाद यह कटाई के लिए तैयार हो जाती है.

तुलसी की फसल का आवसन (Basil crop cultivation)

तुलसी का तेल पूरे पौधे के आसवन से प्राप्त होता है. इसका आवसन, जल तथा वाष्प, आवसन, दोनों विधि से किया जा सकता है. लेकिन वाष्प आवसन सबसे सर्वोत्तम होता है. कटाई के बाद तुलसी के पौधे को 4 से 5 घंटे छोड़ देना चाहिए. इससे आवसन में सुविधा होती है.

तुलसी की उपज (Basil yield)

तुलसी की फसल की औसत उपज 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर तथा तेल की पैदावार 80 से 100 किग्रा० हेक्टेयर तक होती है.

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तुलसी के प्रमुख कीट एवं रोग प्रबन्धन (Major pest and disease management of Basil)

तुलसी के प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन 

पत्ती धब्बा रोग – तुलसी के इस रोग से फंगस जैसा पाउडर पत्तों एवं पौधों को प्रभावित करता है.

रोकथाम – इस रोग की रोकथाम के लिए मेन्कोजेब 4 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.

पौधों का झुलसा रोग – तुलसी के पौधे के यह रोग एक फंगस रोग है. जो बीजों और नए पौधों को नष्ट कर देता है.

रोकथाम – इस रोग की रोकथाम के लिए फाईटों सेनेटरी विधि अपनाते है.

तुलसी के प्रमुख कीट एवं प्रबन्धन 

पत्ता लपेट सुंडी कीट – तुलसी में लगने वाला यह कीट पत्तों कली और फसल को खाती है. यह पत्तों की सतह पर हमला करता है और उसे लपेट देता है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए 300 मिली० कुइनल्फ़ॉस को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करे.

तुलसी के पत्तों का कीट – यह कीट तुलसी के पौधे के पत्ते को खाकर अपना मल भी छोड़ देते है. जोकि पत्तों को काफी प्रभावित करता है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए ऐजाडिरैकटिन 10,000 पी०पी०एम० कंसंट्रेशन 5 मिली० प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

निष्कर्ष (The conclusion)

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) का तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा तुलसी के फायदे से तुलसी के कीट एवं रोग प्रबंधन तक की सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी आप सभी का तुलसी की खेती (Basil cultivation in Hindi) से सम्बंधित कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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