मुलेठी की खेती कैसे करें ? – mulethi farming

0
807
मुलेठी की खेती
मुलेठी की खेती कैसे करें ? - mulethi farming

मुलेठी की खेती कैसे करें ? – mulethi farming

नमस्कार किसान भाईयों, मुलेठी की खेती देश में प्राचीन काल से की जाती है. यह एक औषधीय फसल है.  इसकी खेती किसानों के लिए काफी लाभकारी है. इसलिए लिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में मुलेठी की खेती कैसे करे ? की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई इसकी खेती अच्छी प्रकार करके, अच्छी उपज प्राप्त कर सके. तो आइये जानते है मुलेठी की खेती कैसे करे –

मुलेठी के फायदे 

यह एक गुणकारी औषधीय जड़ी-बूटी फसल है. इसका जयादातर इस्तेमाल सर्दी-जुकाम एवं खांसी में किया जाता है. गले की खराश में इसका उपयोग असदार होता है. इसके अलावा यह कई रोगों में लाभकारी है. इसके सेवन से वाट और पित्त दोष को कम करती है. यह त्वचा रोगों और बालों के लिए फायदेमंद होती है. यह खून को भी साफ़ करती है. इसका उपयोग टूथपेस्ट बनाने में भी किया जाता है. इसका मुख्य उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने में किया जाता है.

क्षेत्र एवं विस्तार 

मुलेठी का वानस्पतिक नाम ग्लिहाइझा ग्लब्रा (Glycyrrhiza glabra) है. यह फैबेसी (Fabaceae) कुल का पौधा है. इसकी उत्पत्ति स्थान अरब देशों के अलावा ईरान, तुर्किस्तान और अफगानिस्तान को माना जाता है. भारत में इसकी खेती लगभग सभी राज्यों में होती है.

यह भी पढ़े : सर्पगन्धा की खेती कैसे करे ? – Indian snakeroot

भूमि एवं जलवायु 

इसकी खेती के लिए शुष्क और गर्म जलवायु में अच्छी होती है. इसके पौधे गर्मी के मौसम में अच्छी तरह विकसित होते है. जबकि जाड़े के मौसम में इनका विकास अच्छा नही होता है. इसकी खेती के लिए 50 से 100 सेंटीमीटर वर्षा उपयुक्त होती है. इसकी खेती छायादार स्थानों पर नही की जा सकती है.

मुलेठी की अच्छी उपज के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है. भूमि का पी० एच० मान 6 से 8.2 के मध्य होना चाहिए. भूमि से जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए.

उन्नत किस्में

मुलेठी की उन्नत किस्मों में हरियाणा मुलेठी नंबर 1, जी० ग्लाब्रा, जी० इनफ़्लाटा आदि प्रमुख किस्में है.

खेत की तैयारी 

मुलेठी की अच्छी उपज के लिए खेत की अच्छी प्रकार जुताई करके खेत को तैयार कर ले. इसके अलावा गोबर की सड़ी हुई गोबर की खाद जरुर डाले. जुताई के बाद पाटा जरुर लगाए, जिससे खेत समतल और मिट्टी भुरभुरी बन जाय.

बीज की मात्रा 

इसकी खेती में बीज के लिए इसकी जड़ों का उपयोग किया जाता है. एक एकड़ मुलेठी की बुवाई के लिए 100 से 125 किलों मुलेठी की जड़ों की आवश्यकता पड़ती है. बुवाई वाली जड़ों की लम्बाई 7 से 9 इंच के मध्य होनी चाहिए.

रोपाई 

इसके बुवाई का उचित समय गर्मी एवं बरसात का मौसम होता है. एक बार इसकी रोपाई करने बाद यह ढाई से तीन साल तक पैदावार देती है.

सिंचित दशा में जनवरी-फरवरी तथा असिंचित दशा में जुलाई-अगस्त में रोपड़ करना उचित होता है.

रोपड़ का फासला 90 x 45 सेमी० तक होना चाहिए. इसको मेढ़ों या समतल खेत में करना चाहिए. बिजाई वाली कलमों का चौथाई भाग भूमि के ऊपर रखना चाहिए.

सिंचाई 

रोपड़ के बाद सिंचाई आवश्यक है. इसके बाद आवश्यकतानुसार इसकी फसल को पानी देते रहना चाहिए. जब फसल पूर्ण विकसित हो जाय तो अधिक पानी की आवश्यकता नही पड़ती है.

खरपतवार नियंत्रण 

इसकी अच्छी के लिए खरपतवार नियंत्रण आवश्यक है. इसके लिए खुरपी से इसकी निराई करनी चाहिए. प्रारंभिक वर्षों में इसके साथ सहफसली खेती भी की जा सकती है.

यह भी पढ़े : सतावर की लाभकारी खेती – Asparagus farming

मुलेठी की खुदाई 

इसकी करीब 3 वर्ष की फसल है. इसकी जड़ों को खुदाई करके निकाल लेते है. खुदाई से पहले इसके खेत में हल्की सिंचाई कर देने चाहिए. जिससे खुदाई आसानी से की जा सके.

उपज 

मुलैठी की खुदाई के लिए पतझड़ का समय सबसे उपयुक्त होता है. प्रति हेक्टेयर 60 कुंटल सूखी जड़े प्राप्त हो जाती है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon kisan) के इस लेख से मुलेठी की खेती कैसे करे ? से सम्बंधित जानकारी मिल पायी होगी. फिर भी आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here