पुदीना की खेती कैसे करे ? – Mint Farming (हिंदी में)

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पुदीना की खेती
पुदीना की खेती (Mint Farming) कैसे करे ? 

पुदीना की खेती (Mint Farming) कैसे करे ? 

नमस्कार किसान भाईयों, पुदीना की खेती (Mint Farming) देश में सभी स्थानों पर की जाती है. यह अपने अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है. देश में पुदीना के तेल की काफी मांग रहती है.जिसको पूरा करने के लिए लाखों रुपये का तेल हर साल विदेशों से मंगाना पड़ता है. किसान भाई इसकी खेती काफी लाभ ले सकते है इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में पुदीना की खेती (Mint Farming) की पूरी जानकारी देगा वह भी अपने देश की भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई इसकी अच्छी उपज ले सके. तो आइये जानते है पुदीना की खेती (Mint Farming) की पूरी जानकारी-

पुदीना के फायदे 

पुदीना की हरी व सूखी हुई पत्तियां चटनी बनाने के काम में ली जाती है. जो देश में बड़े चाव से खायी जाती है. सूखी पत्तियों का चूर्ण, दही व छाछ के संयोग से बनने वाले कई व्यंजनों में डाला जाता है. पुदीना मांस, मछली, सूप, व सॉस को सुगन्धित करने में भी काम आता है. इसके चूर्ण से गर्मियों के मौसम में कई स्वादिष्ट पेय पदार्थ बनाए जाते है. मसालों के अलावा कई घरेलू औषधियों में भी पुदीने का उपयोग होता है.

पुदीने की खेती इसके तेल अथवा मेन्थाल के लिए की जाती है. इसके ताजे पौधे में फसल कटाई की अवस्था के अनुसार 0.12 से 0.45 प्रतिशत वाष्पशील तेल पाया जाता है. इसके तेल का उपयोग दन्त मंजन, दाढ़ी बनाने वाली क्रीम, साबुन व दवाओं को सुगन्धित बनाने के काम में लिया जाता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

पुदीना का वानस्पतिक नाम मेंथा स्पाइकेटा (Mentha spicata Linn.) है. यह लेमिएसी (Lamiaceae) कुल का पौधा है. इसकी उत्पत्ति का स्थान चीन माना गया है. विश्व में इसकी खेती ब्राजील, पेरागुवा, चीन, अर्जेंटीना, जापान, थाईलैंड, अंगोला तथा भारत में की जाती है. भारत में उत्तर प्रदेश और पंजाब में इसकी खेती मुख्य रूप से की जाती है.

जलवायु एवं भूमि 

पुदीना की वानस्पतिक जाती के अनुसार जलवायु व भूमि सम्बन्धी आवश्यकता थोड़ी बहुत बदल सकती है. फिर भी मोटे तौर पर पुदीना के लिए 14.5 से 18.0 डिग्री से तापमान तथा 110 सेमी० वार्षिक वर्षा उपयुक्त है. समुद्र तल से 250 से 400 मीटर की उंचाई वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है.

पुदीने की खेती कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है. परन्तु अच्छे जल निकास वाली जीवांश युक्त दोमट अथवा बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उत्तम पाई गई है. भारी व बलुई मिट्टी पुदीने की खेती के लिए अनुपयुक्त है. इसी तरह से लवणीय या क्षारीय मिट्टी भी पुदीने के लिए ठीक नही है.

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पुदीना की उन्नत किस्में 

पुदीना की उन्नत किस्मों में मास-1, हाइब्रिड-77, शिवालिक, ई० सी०-41911, गोमती, हिमालय, कोसी, सक्षम, कुशल, पंजाब स्प्रेमिंट-1 आदि प्रमुख है. इन किस्मों में उपज भी बहुत अच्छी है.

खेत की तैयारी 

खेत की तैयारी के लिए पहली गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए. इसके बाद 2 से 3 कल्टीवेटर से कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. और पाटा लगाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए. जुताई करते समय भूमि में उचित नमी होनी चाहिए. पाटा लगाने के बाद सिंचाई सुविधानुसार 5 x 3 मीटर या इससे बड़ी क्यारियों बना लेना चाहिये.

बुवाई

पुदीने की फसल भूस्तारियों के टुकड़ों को रोप कर लगाईं जाती है. ये भूस्तारी सर्दी के दिनों में प्रसुप्त अवस्था में रहते है. मैदानों में बुवाई का उचित समय जनवरी-फरवरी है. पहाड़ी क्षेत्रों में इसे मार्च-अप्रैल में बोया जाता है. बुवाई में देरी करने से फसल की वृध्दि कम हो जाती है. क्योकि दीर्घ-प्रकाशपेक्षी होने के कारन बुवाई तथा पुष्पन के बीच का समय कम हो जाता है.

पुदीने की बुवाई के लिए रोग-रहित खेत से भूस्तारी, जड़ों सहित खोद लेते है. स्वस्थ भूस्तारी प्रायः सफ़ेद रंग के व अधिक रसीले होते है. बुवाई के लिए 3 से 4 पर्व संधियों वाले 5 से 6 सेमी० लम्बे टुकडे उपयुक्त रहते है. इन टुकड़ों को खोदने के बाद तुरंत बो देना चाहिए. अगर किसी कारण से तुरंत बोना संभव नही हो, तो इनको गीली मिट्टी में दबाकर रख दे. बुवाई प्रायः 40 से 50 सेमी० दूर पंक्तियों में की जाती है. हर पंक्ति में भूस्तारी के टुकड़ों को सिरे से सिरा मिलाकर 3 से 5 सेमी० गहरा बोते है. अधिक उथली या गहरी रखने पर अंकुरण कम हो जाता है. असमतल अथवा पानी रुकने वाले खेतों में इसकी बुवाई मेड़ों पर करना चाहिए.

उपरोक्त विधि से बुवाई करने के लिए 200 से 250 किलोग्राम भूस्तारी प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होगी. बवाई के तुरंत बाद एक हल्की सिंचाई कर दे. अनुकूल वातावरण में भूस्तारी 8 से 15 दिन में ज़मने लगते है तथा 15 से 25 दिनों को अंकुरण हो जाता है.

खाद एवं उर्वरक 

पुदीने की अच्छी फसल के लिए 20 से 30 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट खेत की तैयारी के समय देना चाहिए. इसके अतरिक्त 120 से 130 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 से 60 किलोग्राम फ़ॉस्फेट, व 40 से 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. फ़ॉस्फेट व पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की 1/5 भाग बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए. नाइट्रोजन के शेष 4 भागों में से एक बुवाई के 2 महीने बाद व दूसरा 3 महीने बाद, तीसरा पहली कटाई के तुरंत बाद व चौथा पहली कटाई के 50 से 60 दिन बाद सिंचाई के साथ देना चाहिए. पुदीने की जड़े उथली होती है.तथा इसकी फसल काफी लम्बे समय तक चलती है.

सिंचाई 

पुदीना की पहली सिंचाई तुरंत बाद करनी चाहिए. इसके बाद भूमि की किस्म, तापमान व वर्षा के अनुसार 8 से 15 के अंतराल से की जानी चहिये. पानी की कमी से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. पहली कटाई के बाद ऊतकों के पुनरोद्भवन के लिए पर्याप्त नमी होनी चाहिए.

निराई-गुड़ाई 

पुदीने के खेत में शुरू के दिनों में नमी का स्टार काफी अधिक रखा जाता है. जिससे खरपतवार अधिक संख्या में उगती है. अतः फसल के प्रथम दो महीनों तक तक निराई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए. इसके बाद आवश्यकतानुसार समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खेत को खरपतवार विहीन रखा जाना चाहिए. प्रथम कटाई से पहले निराई की अधिक जरुरत रहती है. इसके बाद एक या दो बार आवश्यकतानुसार कर दी जाती है.

पुदीना के प्रमुख रोग एवं कीट रोकथाम 

प्रमुख रोग एवं रोकथाम 

जड़ गलन रोग – या रोग फफूंद से पैदा होता है. रोग का आक्रमण अधिकतर मई या सितम्बर-अक्टूबर में होता है. जड़ों पर कत्थई रंग के धब्बे पद जाते है. जो कुछ समय बाद काले होकर फैलाने लगते है. अंत में पूरी जड़ सड़ जाती है. इसकी रोकथाम के लिए भूस्तारी रोग रहित खेत में बुवाई करनी चाहिए तथा बुवाई मेड़ों पर करनी चाहिए. बुवाई से पहले खेत में 10 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ब्रेसिकाल डालने से यह रोग नही होता है.

किट्ट रोग – यह रोग बसंत ऋतु या गरमी शुरू होने में अधिक होता है. रोग की अवस्था में पत्तियां कुछ फूली व ऐंठी हुई लगने लगते है. रोग ग्रसित पौधों की पत्तियां गिरने लग जाती है. भूस्तारी को गर्म पानी से दस मिनट के लिए उपचारित करने बोने से रोग की संभावना कम हो जाती है. कड़ी फसल में 0.2 प्रतिशत तांबायुक्त कवकनाशी या 0.5 प्रतिशत घुलनशील गंधक के 1000 लीटर घोल का छिड़काव करना चाहिए. तथा इस छिड़काव को 10 से 15 दिन के अंतराल से पहली कटाई तक दुहराते रहे.

प्रमुख कीट एवं रोकथाम 

दीमक – पुदीने की फसल पर विशेष भूमि में नमी की कमी होने की अवस्था में दीमक का आक्रमण हो जाता है. खेत में बुवाई से पहले हेप्टाक्लोर 3 प्रतिशत के 45 से 55 किलोग्राम चूर्ण प्रति हेक्टेयर की दर से डालने अथवा कड़ी फसल में सिंचाई के साथ एल्ड्रिन 30 ई० सी० की 4 लीटर प्रति हेक्टेयर देने से दीमक की रोकथाम की जा सकती है.

बालदार गिडार – यह कीट पौधों की पत्तियां खाकर उपज कम है. आक्रमण की प्राम्भिक अवस्था में 5 प्रतिशत दिप्त्रेक्स या 10 प्रतिशत बी० एच० सी० अथवा मिथाइल पेराथियान 2 प्रतिशत का 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करने से इस कीट की रोकथाम की जा सकती है.

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कटाई 

पुदीने के पौधों से तेल एवं मेंथाल की मात्रा पौधों की आयु के साथ-साथ बढती है. तथा फूल आने के समय त्यह सर्वाधिक स्तर पर पहुँच जाती है. फूल आने के बाद तेल व मेन्थाल दोनों की मात्रा घटने लगती है. अतः फसल कटाई के का श्रेष्ठ समय फूल आने की अवस्था है. कटाई में जल्दी या देरी करने से न सिर्फ तेल का उत्पादन कम होगा, बल्कि इसमें मेन्थाल की मात्रा भी घट जायेगी. कटाई के वक्त आकाश विल्कुल साफ़ होना चाहिए. तथा वर्षा की संभावना नही होनी चाहिए. साथ ही ध्यान रखना चाहिए ओस सूख गयी है या नही. कटाई ओस सूखने पर ही करे.

कटाई अधिकतर हंसिया से करते है. भूमि की सतह से 10 से 12 सेमी० ऊपर से पौधों को काट लेते है. कटाई के बाद फसल को 2 से 4 घंटे के लिए खेत में छोड़ देते है. फिर पौधों को छोटी-छोटी पूलियों में बांधकर छाया में सुखाते है. सुखाते समय पूलीयों को पलटते रहना चाहिए. लम्बे समय तक ढेर में रखने से पत्तियां सड़ने लगती है.

उपज  

उन्नत सस्य क्रियाएं को भली-भांति अपनाने तथा अनुकूल वातावरण मिलने पर पुदीने (शाक) की पैदावार 300 से 400 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है. जिससे करीब-करीब 80 किलोग्राम तेल प्राप्त होता है.

निष्कर्ष

किसान भाईयों उम्मीद है, गाँव किसान (Gaon Kisan) के पुदीना की खेती (Mint Farming) से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा पुदीना के फायदे से लेकर पुदीना की उपज तक की सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी पुदीना की खेती (Mint Farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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