बारिश के इस मौसम में अपने पशुओं की देखभाल कैसे करे ?

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बारिश में पशुओं की देखभाल
बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल 

बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल 

 नमस्कार किसान भाई-बहनों, अगर आप पशुपालन करते है तो पशुओं की ख़ास देखभाल की जरुरत होती है. बदलते मौसम के हिसाब से पशुओं के रहवास और खान-पान में भी तब्दीली जरुरी है. इस लिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में आप अपने पशुधन की बरसात के इस मौसम में कैसे देखभाल करगे, पूरी जानकारी देगा. जिससे आप अपने पशुधन को पूरी तरह सुरक्षित रख सके.

बारिश के मौसम रखे ये सावधानियां 

बारिश के मौसम में हर जगह हरा चारा आसानी से उग आता है. लेकिन पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बारिश के मौसम में पशुओं को बाहर नही चराना चाहिए. क्योकि बारिश के मौसम में कई तरह के कीड़े जमीन से निकल कर घास पर बैठ जाते है. जिसे खाने से पशुओं को कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है. इन बीमारियों का अगर सही से इलाज न किया जाय तो पशुओं की म्रत्यु भी हो सकती है.

इस समस्या से बचने के लिए घर में पशुओं पशुओं को हरा चारा खिलाएं और उस हरे चारे में एक प्रतिशत लाल दवा यानि पौटेशियम परमैग्नेट दाल कर देना चाहिए.

इसके अलावा इस मौसम में पशुओं में जूं, कीड़ी लग जाती है, और पशुओं के जख्मी हो जाने से उस जगह मक्खियाँ बैठने से उसमें कीड़े लगने का ख़तरा बना रहता है. ऐसे में पशुओं के बाड़े की साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

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परजीवी से करे बचाव

आमतौर पर दुधारू पशुओं में दो प्रकार परजीवी लगने की आशंका रहती है.

  1. भीतरी परजीवी जैसे- पेट के कीड़े
  2. बाहरी परजीवी जैसे – दाद, जूं, किलनी आदि
  • भीतरी परजीवी से नवजात और वयस्क दोनों तरह के पशुओं में पेट के कीड़े होने की आशंका रहती है. इसके अलावा इससे दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है.

समाधान – इसके लिए नवजात पशुओं को 15 दिन के अन्दर कीड़े मारने की दवा जरुर दे. बरसात का मौसम शुरू होते ही दवा की एक-एक खुराक पिलाते रहे. वही बड़े पशुओं को छः से सात महीने के अंतराल पर साल में दो बार पेट की कीड़े मारने की दवाई देनी चाहिए.

  • बाहरी परजीवी रिंगवर्म, खाज-खुजली, आदि इनफेक्शन जैसी बीमारियाँ दुधारू पशुओं में देखि जा सकती है.

रिंगवर्म क्या है ? 

रिंगवर्म कम बाल वाले या बाल रहित शरीर के भाग पर गोल धब्बे की तरह होता है. जिसे फुंसियाँ से लेकर पपड़ी बन जाती है और खुजली होती है.

समाधान 

  • दाद पर बाल और पपड़ी हटाकर नीको या नीम साबुन से धोकर सुखा लेना चाहिए.
  • इसके उपरांत 10 प्रतिशत टिंचर आयोडीन या बेन्जाइक एसिड या 10 प्रतिशत सल्फर का मलहम लगाना चाहिए.

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खाज-खुजली का उपचार कैसे करे ?

खाज-खुजली में पशु की त्वचा मोटी पड़ जाती है. साथ ही त्वचा पर पपड़ी बन जाती है. खुजली के कारण पशु बेचैन व परेशान हो जाता है.

समाधान – इसके उपचार के लिए पशु के जिस स्थान पर खुजली हो उस स्थान को नीको से साफकर सुखा लेना चाहिए. सुखाने के बाद लोरेक्सन क्रीम या एक्सिवियाल क्रीम का लेप एक दिन के अंतराल पर लगाना चाहिए.

संकर नस्ल के पशुओं का बाहरी परजीवी से बचाव 

संकर नस्ल के पशुओं को बाहरी परजीवी से बचाव के लिए 15 दिन के अंतराल पर पशुओं व पशुशाला में कुछ दवाएं जैसे बूटाक्स किल का छिड़काव करना चाहिए.

बरसात के इस मौसम में ये निम्न सावधानियां रख, किसान पशुपालक भाई व बहन अपने पशुधन को सुरक्षित रख सकते है. धन्यवाद

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