चिया की उन्नत खेती – Chia seed Farming

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चिया की उन्नत खेती
चिया की उन्नत खेती - Chia seed Farming

चिया की उन्नत खेती – Chia seed Farming

नमस्कार किसान भाईयों, चिया की उन्नत खेती (Chia seed Farming) देश के विभिन्न भागों में की जाती है. इसकी खेती किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा साबित हो रही है. इसलिए यह किसानों को काफी लुभा रही है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में चिया की उन्नत खेती (Chia seed Farming) के बारे में पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई इसकी अच्छी उपज प्राप्त कर अच्छा लाभ कमा सके. तो आइये जानते है चिया की उन्नत खेती (Chia seed Farming) की पूरी जानकारी-

चिया के फायदे 

चिया के बीज देखने में काफी छोटे होते है लेकिन स्वास्थ्य और पौष्टिकता से भरपूर होते है. इसके बीज में 30 से 35 प्रतिशत उच्च गुणवत्ता वाला तेल पाया जाता है. जो कि ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फेटि एसिड का बेहतरीन स्रोत है. यह तेल स्वास्थ्य और ह्रदय के लिए अति उत्तम पाया गया है.

इसके बीज में अधिक मात्रा में प्रोटीन (20-22 प्रतिशत), खाने योग्य रेशा (लगभग 40 प्रतिशत) तथा एंटी ओक्सिडेंट, खनिज लवण (कैल्शियम, फ़ॉस्फोरस, पोटेशियम) और विटामिन्स (नियासिन, राइबोफ्लेविन और थायमिन) विद्यमान होते है.

चिया में नियासिन विटामिन की मात्रा मक्का, सोयाबीन और चावल से अधिक होती है. चिया के बीज में दूध की तुलना में 6 गुना अधिक कैल्शियम, ग्यारह गुना अधिक फ़ॉस्फोरस और चार गुना अधिक पोटैशियम पाया गया है. चिया बीज में अपने वजन से 12 गुना अधिक मात्रा में पानी सोखने की क्षमता होती है. जिससे इसे खाद्य उद्योग के लिए अधिक उपयोगी माना जा रहा है.

चिया बीज से बने आहार और व्यंजन शक्ति के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते है. बीज का इस्तेमान खाद्यान (रोटी, दलिया या हलवा) या बीज अंकुरित कर सलाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है. दूध या छाछ के साथ इसका पाउडर मिलाकर पौष्टिक पेय के रूप में भी इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. चिया के हरे ताजे या सूखे पत्तों से निर्मित चाय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताई जाती है.

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क्षेत्र एवं विस्तार 

चिया का वैज्ञानिक नाम साल्विया हार्पेनिया (Salvia Hispanica) है. यह लैमिएसी (Lamiaceae) कुल का पौधा है. इसकी खेती मैक्सिको, बोलीविया, पेरू, ग्वाटेमाला,अर्जेंटीना, अमेरिका आदि देशों में बड़े स्तर पर की जाती है. भारत में चिया की खेती तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में की जाती है.

जलवायु एवं भूमि 

प्रकाश सवेंदी फसल होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में चिया के पौधों में पुष्पन और बीज निर्माण बहुत कम होता है. पौधों की बेहतर बढ़वार और अधिक उपज के लिए चिया की फसल की बुवाई वर्षा ऋतु-खरीफ में जून-जुलाई के पश्चात और शरद ऋतु-रबी में अक्टूबर-नवम्बर में करना श्रेष्ठतम पाया गया है.

चिया की खेती सभी प्रकार की उपजाऊ और कम उर्वरक भूमिओं में सफलता पूर्वक की जा सकती है. लेकिन इसकी खेती के लिए हल्की भुरभुरी तथा रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है.

नर्सरी की तैयारी 

अच्छी प्रकार से तैयार खेत में वांक्षित आकार की उठी हुई क्यारियाँ बना ले. चिया के बीज आकार में छोटे होते है. इसलिए क्यारी की मिट्टी भुरभरी और समतल कर लेना चाहिए. चिया के 100 ग्राम बीज को एक किलों रेत में रेत या सूखी मिट्टी के साथ मिलाकर तैयार क्यारी में एक साथ बोने के उपरांत बारीक वर्मी-कम्पोस्ट या मिट्टी से ढक कर हल्की सिंचाई करना चाहिए. क्यारी में नियमित रूप से झारे की मदद से हल्की सिंचाई करते रही जिससे क्यारी की मिट्टी नम बनी रहें.

मुख्य खेत की तैयारी और पौधरोपण 

पौध रोपण हेतु खेत की भली भांति साफ सफाई करने पश्चात जुताई कर भुरभुरा और समतल कर लेना चाहिए. खेत की अंतिम जुताई के समय निम्न प्रकार खाद डालनी चाहिए.

  • केचुवा की खाद/वर्मी कम्पोस्ट : पौधे के लिए पोषक तत्व प्रदान कर्ता है.
  • नीम की खली : जमीन में उपस्थिति कीटों को मारता है.
  • जिप्सन पाउडर : जमीन को भुरभुरा रखने में मदद करता है.
  • ट्राइकोडर्मा फफूंद नाशक पाउडर : जो जमीन में उपस्थिति हानिकारक फफूंद को मारने में उपयोगी होता है. ये सभी खाद और उर्वरक एक साथ खेत में फैलाकर मिट्टी में अच्छी प्रकार मिला देना चाहिए.

अब खेत में 30 सेमी० की दूरी पर कतारें बनाकर पौधे से पौधे 5 सेमी० का फांसला रखते हुए पौधे रोपना चाहिए. शीत ऋतु-रबी में कतार से कतार 3 सेमी० और पौधे से पौधे के मध्य 20 सेमी० की दूरी रखना चाहिए. क्योकि ठण्ड के मौसम में पौधे की बढ़वार कम होती है. पौध रोपण के तुरंत बाद खेत में हल्की सिंचाई करना अनिवार्य होता है. ताकि पौधे सुगमता से स्थापित हो सके. भूमि में नमी के स्तर और मौसम के अनुसार 8 से 10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करते रहे.

निराई-गुड़ाई 

फसल को खरपतवार प्रकोप से बचाने के लिए खेत में 2 से 3 बार हाथ की मदद से निराई-गुड़ाई करना चाहिए. खेत में खाली स्थानों में पौध रोपण का कार्य भी रोपण के 10 से 15 दिन के अंदर सपन्न कर लेना चाहिए.

फसल की कटाई 

फसल तैयार होने में 90 से 120 दिन लगते है. पौध रोपण के 40 से 50 दिन के अन्दर फसल में पुष्पन प्रारंभ हो जाता है. पुष्पन के 25 से 30 दिन में बीज पककर तैयार हो जाते है. फसल पकते समय पौधे और बालियाँ पीली पड़ने लगती है. पकने पर फसल की कटाई-गहाई कर दानों की साफ़-सफाई कर उन्हें सुखाकर बाजार में बेच दिया जाता है. अथवा बेहतर बाजार भाव की प्रतीक्षा में उपज को भंडारित कर लिया जाता है.

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फसल उपज 

मौसम और प्रबंधन के आधार पर चिया फसल से प्रति एकड़ 600 से 700 किग्रा० उपज प्राप्त हो जाती है.

बीज प्राप्त करने का स्थान 

चिया का बीज किसान भाई आप ऑनलाइन खरीद सकते है. इसके अलावा सरकारी उद्यानिकी विभाग या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जानकारी ले सकते है.

प्रिय किसान पाठक भाइयों उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा. कमेन्ट करके जरुर बताएं. इसके अलावा इस जानकारी को आप शेयर जरुर करे. जिससे इस जानकारी से अधिक से अधिक लोगो का सहयोग हो सके. धन्यवाद.

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