मछली पालन आखिर क्यों करे किसान ? आइये जाने मछली पालने के फायदे और करने के तरीके के बारे में

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मछली पालन आखिर क्यों करे किसान

मछली पालन आखिर क्यों करे किसान

देश की अर्थव्यवस्था और खाद्यान में मछली पालन का बहुत योगदान है. किसान भाई खेती के साथ-साथ मछली पालन कर अपनी आय को बढ़ा सकते है. मछली पालन से खाद्यान समस्या के भर को भी कम किया जा सकता है. इसके लिए गावों अनुपयुक्त तालाब, पोखरे एवं अन्य जलाशयों को भी उपयोग में लाया जा सकता है. और इनमे वैज्ञानिक ढंग से मत्स्य पालन किया जा सकता है.

मत्स्य पालन कृषि की तरह ही एक प्रकार की खेती है. जोकि पानी में ही किया जाता है. कृषि की ही भांति मत्स्य पालन में भी अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए समय-समय पर कार्बनिक एवं अकार्बनिक उर्वरकों एवं देखभाल की जरुरत पड़ती है. मत्स्य पालन क्यों, कहाँ और कैसे करना चाहिए आइये इसके बारे में पूरी जानकारी दी है –

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मछली पालन आखिर क्यों ?

  • मछली एक अत्यधिक पौष्टिक एवं शीघ्र पचने वाला आहार है.
  • मछली पालन करके देश को पौष्टिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ उत्पादन में स्वावलंबी बनाया जा सकता है. एवं कुपोषण की समस्या को समाप्त किया जा सकता है.
  • खाद्य सामग्री उत्पादन में भाग लेने वाले जलाशयों से पौष्टिक आहार, मछली के रूप में उत्पादन करके उनकी उत्पादन क्षमता पूर्ण रूप से उपयोग किया जा सकता है.
  • मत्स्य पालन करके ग्रामीण किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है.

कहाँ करे मछली पालन

  • मछली पालन किसान भाई तालाब, पोखरे एवं अन्य जलाशयों में कर सकते है.
  • जिस तालाब व पोखरे के बाहरी बंधे मजबूत एवं बाढ़ स्तर से लगभग एक मीटर ऊँचे होने चाहिए.
  • जिसमें वर्ष भर 1.5-2 मीटर गहरा पानी हर मौसम में उपलब्ध होना चाहिए.
  • जो नाले अथवा नदी से सीधे न मिलते हो एवं गन्दा पानी नही आना चाहिए.
  • जिसमें जलीय घास और अवांछनीय मछलियाँ नही होनी चाहिए.
  • जिसमें पानी के निकास एवं प्रवेश के रास्ते पर जाली लगी होनी चाहिए.जिससे पाली जाने वाली मछलियाँ बाहर न जा सके एवं अवांछनीय मछलियाँ तालाब में न जा सके.
  • अब तालाब एवं पोखरों के अलावा धान की खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन सफलतापूर्वक किया जा सकता है.

कैसे करे तालाब की तैयारी

जलीय घास की सफाई

  • इसके लिए किसान भाई हाथों से तालाब की जलीय घास की सफाई कर सकते है.
  • इसके अलावा रासायनिक विधि से भी जलीय घास को साफ़ किया जा सकता है.

अवांछनीय मछलियों का निस्तारण करे 

  • इसके लिए मत्स्य पालक किसान जाल द्वारा अवांछनीय मछलियों को पकड़ सकते है.
  • इसके अलावा पानी को सुखाकर भी इन मछलियों से छुटकारा पा सकते है.
  • मत्स्य जहर का प्रयोग करके तालाब की अवांछनीय मछलियों से छुटकारा पा सकते है. उसके बाद आप का तालाब मछली पालन के लिए तैयार हो जायेगा.

तालाब में खाद का उपयोग 

  • तालाब में प्रतिवर्ष 200 किग्रा० प्रति हेक्टेयर चूना का उपयोग करना चाहिए.
  • इसके अलावा 10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद तालाब में उपयोग करनी चाहिए.
  • साथ ही अकार्बनिक खाद (एन०पी०के०) का 740 किग्रा० प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष उपयोग करना चाहिए.

पालने योग्य मछलियों का चयन 

मत्स्य पालन से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित देशी और विदेशी मछलियों की प्रजातियों को अलग-अलग या एक साथ पाला जा सकता है-

देशी प्रजातियाँ 

  1. भाकुर (कतला) 2. रोहू 3. नैन

विदेशी प्रजातियाँ 

  1. सिल्वर कार्प 2. ग्रास कार्प 3. कामन कार्प

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अंगुलिकाओं का संचयन 

तालाब में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन 5000 अंगुलकाए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से करना चाहिए-

देशी मत्स्य बीज संचयन 

  1. भाकुर की 2000 2. रोहू 1500 3. नैन 1500

देशी व विदेशी प्रजाति के मत्स्य बीज का संचयन 

  1. भाकुर 500 2. सिल्वर कार्प 1000 3. रोहू 1500 4. ग्रास कार्प 500 5. नैन 650 6. कामन कार्प 750

अंगुलिकाओं का संचय करने का समय

मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन का सबसे उचित समय जुलाई-अगस्त माह होता है.

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