Top five early pea varieties in india : देश के किसान इन पाँच मटर की अगेती किस्मों से बनेगें मालामाल, आइए जाने पूरी जानकारी

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pea varieties in india
पाँच मटर की अगेती किस्में

Top five early pea varieties in india | पाँच मटर की अगेती किस्में

Top five early pea varieties in india : देश के ज़्यादातर किसान मटर की खेती करते है। जिससे वह अच्छा मुनाफा भी कमाते है। वही अब अगस्त का महीना धीरे-धीरे अपनी समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है। और सितम्बर महीने की शुरुवात होते ही किसान भी मटर की अगेती किस्मों की बुवाई की तैयारी शुरू कर देगे। जिससे वह इन अगेती फसलों से अच्छा लाभ कमा सकेगे।

मटर का उपयोग भारतीय रसोई मे ज्यादातर सब्जी के रूप मे किया जाता है। यह काफी स्वादिष्ट होता है। इसका उपयोग कई तरह से किया जाता है। इसे हरे कच्चे और सुखाकर भी उपयोग किया जाता है। यह हमारे स्वास्थ्य को कई प्रकार से लाभ पहुंचता है। इसलिए बाजार मे इसकी कीमत भी अच्छी रहती है। इसलिए अधिकतर किसान इसकी खेती करते है। लेकिन किसान भाई किसी भी प्रकार की फसल की खेती से अच्छा लाभ तभी ले पायेगें जब अच्छे किस्म के बीज का चयन कर उसकी बुवाई करगें। तो इसी कड़ी मे आज के इस लेख मे मटर की पाँच अगेती किस्मों (Pea varieties in india) की जानकरी दी जाएगी। जिससे किसान इनकी बुवाई कर अच्छा उत्पादन ले सके। और अधिक लाभ काम सके। तो आइए विस्तार से जानते है-

मटर की पाँच शीर्ष प्रमुख किस्में (Pea varieties in india)

वैसे तो देश मे कई प्रकार की मटर की किस्में उगाई जाती है। लेकिन आज हम यहाँ आपको मटर की उन्नत अगेती किसमों को उनके क्षेत्र, पैदावार आदि के बारे मे पूरी जानकारी देते है –

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मटर की काशी उदय किस्म 

मटर की यह किस्म बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश राज्यों आदि मे खेती के लिए काफी उपयुक्त किस्म है। काशी उदय को 2005 में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया था। इसकी फलियों की लंबाई 9 से 10 सेंटीमीटर के बीच होती है। इस किस्म की प्रति एकड़ खेती करने पर किसानों को 42 क्विंटल मटर की पैदावार मिल सकती है। बाजार में इस किस्म के बीज के प्रति किलो रेट की बात की जाए तो 250 रुपए प्रति किलो तक यह बिक जाती है और काशी उदय किस्म को कटाई के लिए पकने में 60 दिनों का समय लगता है।

मटर की काशी अगेती किस्म 

मटर की यह किस्म बेहद कम दिनों में तैयार होने वाली मटर की किस्मों में से एक किस्म है। मटर इस किस्म की फलियां सीधी और गहरे हरे रंग की होती है। इस मटर की खास बात यह है कि मटर यह किस्म मात्र 50 दिनों में तैयार हो जाती है। पैदावार की बात जाए तो मटर इस किस्म से प्रति एकड़ 38 से 40 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है।

मटर की काशी नंदिनी किस्म 

मटर की इस बेहतरीन किस्म को वर्ष 2005 में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया। मटर की यह किस्म उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडू एवं केरल आदि इलाकों में खेती के लिए उपयुक्त है। काशी नंदिनी मटर का एक प्रसिद्ध ब्रांड है। इस किस्म किसान भी प्रति एकड़ 44 से 48 कुंतल तक उपज प्राप्त कर सकते है।

मटर की काशी मुक्ति किस्म 

मटर की इस किस्म की खेती बड़े पैमाने पर बिहार, झारखंड और पंजाब आदि राज्यों में की जाती है। मटर की इस किस्म के दाने साइज में बड़े होते हैं,एवं इस किस्म की मटर की फलियां लंबी होती है। इस किस्म की मांग विदेशों में भी काफी अधिक रहती है। प्रति एकड़ उत्पादन की बात जाए तो इस किस्म से किसान भी प्रति एकड़ 46 क्विंटल तक की उआपज प्राप्त कर सकते है।

मटर की पंत मटर 155 किस्म 

मटर की ये किस्म मटर की संकर किस्मों में,सबसे बेहतरीन किस्म है। मटर की बुआई के 50 से 60 दिनों के बाद ही हरी फलियों की तुड़ाई की जा सकती हैं। इस किस्म सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रोगों का प्रकोप कम पाया जाता है। इस किस्म पर फफूंद रोग, फली छेदक कीटों का प्रकोप अधिक नहीं होता।

मटर की उन्नत खेती कैसे करे किसान ? (How to do advanced farming of peas?)

मटर एक खरीफ के सीजन मे उगाई जाने वाली सब्जी एवं दाल फसल है। इसकी बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर मध्य का होता है। इसकी खेती करने के लिए किसान भी सबसे पहले अपने खेत की 2 से 4 बार गहरी जुताई कर ले। जिससे खेत अच्छी प्रकार तैयार हो जाए और उसकी मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसलिए हर बार जुताई के बाद किसान भी खेत मे पाटा चलकर खेत को समतल भी कर ले। जिससे खेत मे उपयुक्त नमी भी बनी रहे। इससे बोई गई मटर फसल का बीज अंकुरण अच्छी प्रकार होगा।

इसके अलावा किसान भी इस बात का ध्यान रखे कि बीज बुवाई के समय बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोएं और बीज से बीज की दूरी 30 से.मी × 50 से.मी रखनी चाहिए। साथ ही अगर बीज के मात्रा की बात जाए तो मटर की खेती में 35 से 40 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की जरूरत पड़ती है।

मटर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु एवं भूमि

मटर की खेती के लिए अगर उपयुक्त जलवायु की बात जाए तो इसकी खेती के लिए तापमान 10 से 18° सेंटीग्रेड होना चाहिए। वही 10 से 18 डिग्री के बीच का तापमान इसकी खेती के लिए काफी अच्छा माना जाता है। हालांकि इसके बीज अंकुरण के समय औसत तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस की आवश्यकता पड़ती है। 10 से 18 डिग्री के तापमान के बीच मटर का पौधा काफी अच्छी तरह विकसित हो जाता है।

मटर की खेती के लिए भूमि की बात की जाए तो खेती योग्य भूमि में पर्याप्त नमी के साथ इस फसल को अच्छी प्रकार उगाया जा सकता है। इसकी खेती में नमी युक्त अच्छी मटियार मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी है। हालांकि इसके लिए लगभग सभी प्रकार की मिट्टी उत्तम पाई जाती है। अगर खेत मे सिंचाई की अच्छी सुविधा उपलब्ध हो तो हल्की बलुई या दोमट मिट्टी में भी मटर की अच्छी उपज ली जा सकती है।

मटर मे सिंचाई महत्वपूर्ण 

मटर की खेती के लिए सिंचाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि इसकी उपज के लिए खेत मे नमी का होना काफी होता है। इसके अलावा समय से पानी लगना भी काफी महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि अच्छी उपज इसी पर निर्भर करती है। वैसे सामान्यतः मटर की बुआई के बाद 1 या 2 सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। इसमें पहली सिंचाई फूल आने से पहले और दूसरी सिंचाई फल आने की अवस्था में कर लेनी चाहिए। किसान भाई इस बात का ध्यान रखे कि सिंचाई नियमित और नियत से ही होनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा सिंचाई से फसल से कम उपज हो सकती और पौधों में पीलापन भी आ सकता है।

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मटर की खेती मे कितनी कमाई 

मटर की खेती से होने वाली कमाई मे कई चीजों की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैसे कृषि कौशल, मिट्टी की क्वालिटी, जलवायु और फसल की देखरेख कैसी है। सामान्य तौर पर किसान मटर की उपज प्रति हेक्टेयर 18 से 35 क्विंटल तक प्राप्त कर लेता है, अगर फलियां पूरी तरह पकी हुई हो। अगर कच्ची फली, जो हरी सब्जी के लिए उपयोग में लाई जाती है, उसके पैदावार की बात करें तो कच्ची फली की पैदावार प्रति हेक्टेयर 90 से 150 क्विंटल हो जाती है। इस तरह अगर 30 रुपए प्रति किलोग्राम ही कच्ची फली किसान बेचते हैं तो किसान की 150 क्विंटल फसल की रेट 4 लाख 50 हजार रुपए होगी। लागत के रूप में 1 लाख रुपए कम भी कर दिया जाए। तो एक हेक्टेयर खेत में किसान 3 लाख 50 हजार यानी 3.5 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा कर पाएंगे।

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