Tomato Farming | टमाटर की खेती की पूरी जानकारी अपनी भाषा हिंदी में

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टमाटर की खेती (Tomato Farming) की पूरी जानकारी अपनी भाषा हिंदी में

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टमाटर की खेती (Tomato farming)

नमस्कार किसान भाईयों,टमाटर (Tomato) एक महत्त्वपूर्ण सब्जी फसल है.इसकी खेती पूरे वर्ष की जा सकती है.इसे विलायती बैंगन भी कहते है.इसका वानस्पतिक नाम सोलानम लाईकोपर्सिकम है.तथा यह सोलानेसी कुल से सम्बन्ध रखता है.आज गाँव किसान अपने इस लेख द्वारा आप सभी को टमाटर की खेती (Tomato Farming) की पूरी जानकारी देगा.जिससे आप सभी टमाटर की उन्नत खेती (Tomato in hindi) कर सके और उपज से अधिक लाभ ले पाए.

टमाटर के फायदे (Benefits of tomato)

टमाटर (Tomato nutrition) पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है.इसलिए इसे मुख्य सब्जी फसल कहा जाता है.टमाटर में विटामिन ए व सी की मात्रा अधिक होती है.इसका उपयोग ताजा फल के रूप में तथा उन्हें पका कर डिब्बाबंदी करके अचार,चटनी (Tomato chutney) ,सूप (Tomato soup), केचप (Tomato ketchup),सॉस (Tomato sauce) आदि बनाकर किया जाता है.टमाटर में लाल रंग लाइकोपीन नामक पदार्थ होता है.जिसे प्रमुख एंटिऑक्सीडेंट माना जाता है.

टमाटर की खेती के लिए मिट्टी एवं जलवायु (Soil and climate for tomato cultivation)

टमाटर की खेती (Tomato Farming) कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है,लेकिन बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे उपयुक्त है.भूमि का पी० एच० मान 7 से 8.5 तक होना चाहिए.इसके अलावा भूमि में जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए.

टमाटर (Tomato plant) की अच्छी फसल के लिए 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उचित होता है.27 डिग्री सेल्सियस के अधिक तापमान पर इसका लाल रंग फीका पड़ने लगता है.जब रात्रि का तापक्रम 13 डिग्री सेल्सियस से कम और दिन का तापक्रम 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने लगता है तब परागण व फल लगने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

टमाटर की उन्नतशील किस्में (Tomato varieties)

टमाटर (Tomato fruit) की लोकप्रिय किस्मों में पंतनगर टमाटर-1,पूसा सदाबहार,पूसा संकर-1,पूसा संकर-2,अर्का सौरभ,अर्का विकास, अर्का रक्षक,अर्का सम्राट,के० टी०-4,एन० डी० टी०-108,एन० डी० टी०-5,के० एस०-6,सी० ओ०-1, एस०-120,पंजाब केसरी,पंजाब ट्रोपिक,काशी विशेष,काशी अनुपम,काशी शरद,बादशाह,शहंशाह,अविनाश-2, रुपाली,वैशाली,पंजाब बरखा बहार-1 आदि प्रमुख है.

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टमाटर के बीज की मात्रा एवं बुवाई (Tomato seed quantity and sowing)

टमाटर (Tomato tree) की एक हेक्टेयर में फसल उगाने के लिए मुक्त परिगत किस्मों का 400 से 500 ग्राम एवं संकर किस्मों का 150 से 200 ग्राम बीज पर्याप्त होता है.बीजों को पौधशाला में लगाया जाता है,तथा लगभग 20 से 25 दिन बाद रोपाई की जाती है.

टमाटर के बीज की बुवाई एवं रोपण का समय (Tomato seed sowing and planting time)

टमाटर के बीज की बुवाई एवं रोपड़ का समय निम्नवत है–

क्षेत्र बुवाई का समय पौध रोपण का समय
मैदानी भाग (शरद-ऋतु) जुलाई-सितम्बर अगस्त-अक्टूबर
मैदानी भाग (बसंत-ग्रीष्म ऋतु) नवम्बर-दिसम्बर दिसम्बर-जनवरी
पहाड़ी भाग मार्च-अप्रैल अप्रैल-मई

 

अगर आप टमाटर के 25 ग्राम बीज लेते है तो उसमे लगभग 8000 से 9000 बीज होगे.इनके अंकुरण की क्षमता 4 वर्ष तक होती है.अगर बीज अच्छा है तो 80 से 90 प्रतिशत तक जमाव लेता है.टमाटर का बीज अन्य सब्जियों के बीज की अपेक्षा हल्का होता है.

टमाटर के खेत की तैयारी (Tomato field preparation)

टमाटर की खेती (Tomato Farming) के लिए खेत को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए.इसके लिए खेत को एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से और 2 से 3 बार कल्टीवेटर या देशी हल से जुताई कर पाटा लगा ले,जिससे मिट्टी बराबर और भुरभुरी बन जाय.

टमाटर के लिए खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer for Tomatoes)

टमाटर की खेती (Tomato Farming) के लिए खेत तैयारी में पहली जुताई के समय 200 से 250 कुंटल प्रति हेक्टेयर गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट खाद जरुर डाले.इसके अतरिक्त 40 किग्रा० नाइट्रोजन,60 किलोग्राम स्फूर एवं 60 किग्रा० पोटाश खेत की तैयारी के समय खेत में डाले.नाइट्रोजन की शेष मात्रा 40 किलोग्राम रोपाई के 45 दिनों बाद एवं 40 किलोग्राम नाइट्रोजन 80 से 90 दिनों बाद खेत में टमाटर की फसल में डाले.

टमाटर की खेती के लिए सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग (Use of micro elements for tomato cultivation)

खेत की अंतिम जुताई के समय 20 से 30 किलोग्राम बोरेक्स प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करे.इससे टमाटर (tomato tomato) के फल का फट जाना रोका जा सकता है.इसके बाद रोपाई के 3 से 4 सप्ताह बाद 0.3 से 0.4 प्रतिशत बोरॉन के घोल का छिड़काव करने से फलों का फटना रोका जा सकता है.जस्ता और मैगनीज के 10 पी० पी० एम० के प्रयोग से फलों में विटामिन सी की मात्रा बढ़ जाती है.

टमाटर का पौध रोपण (Planting tomato seedlings)

टमाटर की सीमित बढवार वाली किस्मों को 60 X 50 सेमी० पर लगाना चाहिए.वही असीमित बढवार वाली किस्मों को 75 X 60 सेमी० पर रोपाई करनी चाहिए.

टमाटर की सिंचाई (Tomato irrigation)

टमाटर की पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए.शरद कालीन फसल में आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर एवं ग्रीष्मकालीन फसल में 5 से 7 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहे.इसके अलावा अधिक समय तक भूमि सूखी रहने के बाद अधिक पानी नही देना चाहिए.

टमाटर में खरपतवार नियंत्रण (Weed control in tomato)

टमाटर में खरपतवार नियंत्रण के लिए 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पेंडीमेथेलिन का पौध रोपण के एक दिन पहले छिड़काव करे.इसके अलावा 45 दिन बाद खुरपी से निराई-गुड़ाई करके खेत को खर-पतवार से मुक्त रखे.

टमाटर में पादप वृध्दि नियामकों का उपयोग (Use of Plant Growth Regulators in Tomatoes)

बसंत ऋतु के प्रारंभ में कम तापक्रम और शरद ऋतु से पहले अधिक तापक्रम रहने से टमाटर के पौधों में कम फल आते है.जब रात का तापक्रम 13 डिग्री सेल्सियस से कम और दिन का तापक्रम 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है तो परागण व फल लगने पर विपरीत प्रभाव होता है.अच्छी फलत,अगेती फसल तथा फलों में बीज कम बने इसके लिए पैरा-क्लोरीफिनोक्सी एसीटिक एसिड 15 से 20 पी० पी० एम० 2 से 4 डाईक्लोरोफीनोक्सी एसीटिक एसिड 1 से 4 पी० पी० एम०, जिब्बरेलिक एसिड 50 पी० पी० एम०,सी० आई० पी० पी० 25 पी० पी० एम०,एन० ऐ० ऐ० 50 से 100 पी० पी० एम० की दर से प्रयोग करने से बहुत ही लाभदायक होता है.रोपाई के 30,45 व 60 दिनों पर 5 पी० पी० एम० 2,4-डी० के प्रयोग से फल उत्पादन बढ़ता है तथा फलों के धूप में जलने या छतिग्रस्त होने से बचाता है.इथरेल की 500 से 1000 पी० पी० एम० फलों की संख्या बढ़ता है तथा इनका पकना समान करता है.नेप्थेलीन एसीटिक एसिड के 100 पी० पी० एम० के छिडकाव से फलों में घुलनशील ठोस की मात्रा में वृध्दि पायी जाती है.इसी प्रकार 100 पी० पी० एम० काइनेटिन के प्रयोग से फलों का घुलनशील ठोस,शर्करा व विटामिन सी की मात्रा में वृध्दि होती है इसके अलावा उपज में भी वृध्दि होती है.

टमाटर के पौधों को सहारा देना (Support tomato plants)

टमाटर की शाखाएं भूमि पर गिर जाती है.इस कारण हवा और प्रकाश से वंचित होने लगती है.फल भी सिंचाई के पानी में पड़े रहने के कारण रोगग्रस्त हो जाते है.इसके अतरिक्त फलों में आकर्षक रंग भी नही आ पाता है.इसलिए पौधों को कम से कम 3 से 4 सेमी० मोटी बांस की खूँटी के सहारे लताओं (tomato leaf) को सहारा देना चाहिए.इस प्रक्रिया से अधिक प्रकाश पाकर फल आकार में बड़े और आकर्षक होते है.

टमाटर के फलों की तुड़ाई (Tomato fruit harvest)

टमाटर की तुड़ाई बाजार के अनुरूप करनी चाहिए.सीमित बढवार वाली किस्में रोपाई के 65 से 70 दिनों बाद एवं असीमित बढवार वाली किस्में 75 से 80 दिनों बाद फल देना प्रारम्भ कर देती है.तुरंत उपयोग करने के लिए फल पूर्णरूप से सुर्ख हो जाने पर ही तोड़ना चाहिए.बाजार या दूर भेजने के लिए यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि तुड़ाई करते समय फलों का रंग हल्का लाल हो जाए.

टमाटर की उपज (Tomato yield)

संकर किस्मों की उपज लगभग 400 से 500 कुंटल प्रति हेक्टेयर और मुक्त परागित किस्मों की लगभग 200 से 250 कुंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है.

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टमाटर की खेती में रोग एवं कीट नियंत्रण (Disease and pest control in tomato cultivation)

आर्द्रगलन रोग 

आर्द्रगलन नर्सरी में लगने वाला मुख्य रोग है.इस रोग में सतह,जमीन के पास तना गलने लगता है तथा पौध मर जाती है.इस रोग से टमाटर को बचाने के लिए बुवाई से पहले बीज का उपचार फफूंदनाशक दवा कैप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से करे.इसके अलावा कार्बेन्डाजिम का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर सप्ताह में एक बार नर्सरी में छिडकाव करे.

कुकड़ी रोग

टमाटर की गरमा फसल में मुख्यतः कुकड़ी रोग देखा जाता है.इसके नियंत्रण के लिए 1 मिली० प्रति 3 लीटर पानी में इमिड़ाकलोपरिड का छिडकाव किया जाता है.

श्यामवर्ण रोग 

श्यामवर्ण (एन्थ्रोक्नोज) रोग में शुरू में टमाटर की पत्तियों पर पीले,गोल जलयुक्त धब्बे दिखाई देते है.ये धब्बे आपस में मिलकर बड़े व भूरे हो जाते है.रोगी पत्तियां सूख जाती है.फलों पर धब्बे गोलाकार जलयुक्त व हल्के रंग के होते है.रोग के निदान हेतु बीज को थाइरम या बविस्टान (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करके बोना चाहिए.मैंकोजेब (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का सात दिन के अंतराल पर दो बार छिडकाव करना चाहिए.

पत्ती झुलसा रोग 

पत्ती झुलसा रोग टमाटर,बैगन,कद्दूवर्गीय सब्जियों में देखा जाता है.सर्वप्रथम पत्ती पर हल्के भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते है.जो बाद में गहरे रंग के व आकर में बड़े हो जाते है.धब्बे पत्तियों पर केन्द्रीयकृत गोल आकर में बनते है जिससे पौधे की पत्तियां झुलसी हुई दिखाई देती है.रोग के निदान के लिए स्वस्थ बीज का प्रयोग करे,फसल चक्र अपनाये,फसल पर मैंकोजेब (2 से 3 ग्राम प्रति लीटर पानी) का 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें.

विल्ट रोग

इस रोग में टमाटर का पौधा मुरझाकर सूख जाता है.पत्तियां पीली हो जाती है.कालर वाला क्षेत्र सिकुड़ जाता है.पौधे की जड़ व भीतरी भाग भूरा हो जाता है.पौधे की वृध्दि रुक जाती है.रोग के लक्षण सबसे स्पष्ट फूल आने व फल बनने की अवस्था पर ज्यादा दिखाई देते है.रोकथाम के लिए रोग रोधी प्रजातियाँ उगानी चाहिए.भूमि शौर्य किरण से शोधन करने से इस बीमारी को कम कर सकते है.बोने से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम (1 से 2 ग्राम प्रति लीटर पानी) से उपचारित करे तथा बीमारी आने के बाद ड्रेन्चिंग कर सकते है.

तना व फल छेदक कीट

गर्मियों में टमाटर में तना व फल छेदक कीट अधिक मात्रा में लगता है.इसकी रोकथाम के लिए तने को छांट के जला देना या मिट्टी में दबा दना चाहिए.पौधे को लगाने से पहले जड़ को क्लोरोपाइरीफ़ॉस 2 मिली० प्रति लीटर पानी के घोल में पाँच मिनट डुबाकर उपचारित करना चाहिए.इसके बाद इंडोक्साकार्ब के 1 से 5 मिली० प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव से इसका नियंत्रण लिया जा सकता है.

माहू एवं जैसिड कीट 

थ्रिप्स,एफिड या माहू एवं जैसिड कीट टमाटर की पत्तियों का रस चूसते रहते है और उपज के लिए हानिकारक होते है.रोगर या मैटासिस्टाक्स 2 मिली० प्रति लीटर पानी में या इमिडाक्लोप्रिड (1 मिली० प्रति लीटर पानी में घोलकर ) छिड़काव करने से इसका नियंत्रण कर सकते है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है कि आप सभी को टमाटर की खेती (Tomato Farming) से सम्बन्धित गाँव किसान का यह लेख पसंद आया होगा.गाँव किसान द्वारा टमाटर के फायदे से लेकर कीट नियंत्रण तक सभी जानकारी आप सभी को गयी है.लेकिन फिर भी टमाटर की खेती (Tomato Farming) सम्बंधित जानकारी आपको चाहिए या यह लेख आप को कैसा लगा,कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर सकते है.महान कृपा होगी.

अन्य पूछे जाने वाले प्रश्न (Other FAQ)

प्रश्न : टमाटर की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?

उत्तर : भारत में Tamatar ki kheti करने वाले किसानों के बीच टमाटर की अर्का रक्षक किस्म काफी लोकप्रिय हो रही है।

प्रश्न : टमाटर के फूल क्यों झड़ते हैं?

उत्तर : मुख्य पोषक तत्वों एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण फूल झड़ते हैं। फूल आने के समय अत्यधिक मात्रा में रसायनों का छिड़काव करने से भी यह समस्या उत्पन्न होती है। अत्यधिक ठंड एवं जलवायु में परिवर्तन भी मुख्य कारणों में से एक है।

प्रश्न : हिमसोना टमाटर की खेती कैसे करें?

उत्तर : जुलाई-अगस्त तथा जनवरी-फरवरी में टमाटर की पौध लगाई जाती है। यह फसल क्रमश: सितंबर व अप्रैल से बाजार में आती है। 50-60 हेक्टेयर में होनी वाली टमाटर की फसल का प्रति हेक्टेअर उत्पादन 250-300 कुंतल तक है।

प्रश्न : क्या टमाटर एक फल है?

उत्तर : टमाटर को सब्जी ही माना जाता है। सुर्ख लाल टमाटर सब्जियों के बीच बिकता है और सब्जी की तरह ही हमारे भोजन में इस्तेमाल होता है। लेकिन वैज्ञानिक नजरिये से इसकी परिभाषा देखें तो टमाटर एक फल है।

प्रश्न : टमाटर जैसा कौन सा फल होता है?

उत्तर : शेरोन फल और ख़ुरमा दो प्रकार के खाद्य फल हैं। वे लाल, नारंगी या पीले रंग के हो सकते हैं और आकार में टमाटर के समान हो सकते हैं। दोनों स्वाद और पोषण मूल्य में महत्वपूर्ण हैं। वे ताजा और सूखे दोनों रूपों में उपलब्ध हैं

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