व्यवसायिक एवं औषधीय द्रष्टि से उपयोगी यह पेड़ आपको बनाएगा मालामाल, आइये जाने इसकी खेती के बारे में

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reetha ki kheti kaise kare
रीठा की खेती कैसे करे किसान 

रीठा की खेती कैसे करे किसान 

देश में बहुत से किसान औषधीय फसलों की खेती है. जिनसे वह अच्छा मुनाफा भी कमाते है. इसी कड़ी में आज एक ऐसे ही पेड़ की जानकरी किसान को देने वाले है जो व्यवसायिक और औषधीय द्रष्टि से काफी लाभकारी है. जी हाँ आज हम बात करने वाले है रीठा की खेती के बारे में.

रीठा व्यवसायिक एवं औषधीय द्रष्टि काफी उपयोगी पौधा है. इसके फल का उपयोग डिटर्जेंट, शैम्पू आदि बनाने में किया जाता है. इसके अलाव इसके फलों एवं बीजों से डायरिया, पेट सम्बन्धी बीमारियों, लकवा एवं फेफड़ों सम्बन्धी औषधियां तैयार करने के काम में आता है. वही इसकी जड़ों एवं छल का प्रयोग कफ़ एवं श्वसन तंत्र के नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

रीठा के बारे में कुछ बातें 

रीठा के पेड़ को अपनी खुरदुरी चमकती धूसर छाल एवं पंखनुमा पत्ती से पहचान सकते हो. इसके पेड़ की लम्बाई 15 से 18 मीटर एवं गोलाई 1 से 1.5 मीटर तक होती है. इसके पौधे में सफ़ेद रंग के फूल आते है.

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इसका वानस्पतिक नाम सेपिन्डिस ट्रायफोलिएट्स है. यह सेपिन्डैसी कुल का पर्णपाती पेड़ है. सामान्य रूप से यह भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में पाया जाता है. इसके अलावा यह दक्षिणी भारत के खुले जंगलों में कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं बिहार में भी कही-कही पाया जाता है.

पेड़ों के लिए उपयुक्त मिट्टी 

इसके पेड़ के लिए किसी विशेष प्रकार के आवश्यकता नही होती है. यह क्षारीय एवं अम्लीय दोमट मिट्टी में अच्छी प्रकार बढ़ाता है.

पौध तैयार के लिए  बीज बोने का उपयुक्त समय

किसान भाई इसकी बीज की बुवाई के लिए उपयुक्त समय जून के मध्य महीने में किया जाना चाहिए.

100 पौधे तैयार करने के लिए 150 से 200 ग्राम बीजों की आवश्यकता है.

बीजों की बुवाई कैसे करे?

बीजों को रोपणी में बुवाई के लिए क्यारी के स्थान पर जर्मिनेशन ट्रे का प्रयोग करना चाहिए. जिसमें बारीक महीन रेट के साथ कापू को 1:2 के अनुपात में मिलाकर 02 सेमी० रखना चाहिए.

बुवाई बीज को उपचारित करके ही प्रयोग करना चाहिए. जिससे बीजों का अंकुरण बढ़िया हो सके.

बुवाई के पश्चात् दिन में एक बार सिंचाई करना जरुरी होता है. जर्मिनेशन ट्रे में एक माह के पौधे होने के पश्चात ही पॉलीथिन बैग में स्थान्नान्तरण कर देना बढ़िया होता है.

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रोपाई अवस्था में बीमारी से बचाव

रोपणी अवस्था में कीट का प्रयोग कम ही देखने को मिलता है. परन्तु यदि इस तरह का प्रकोप दिखता है. तो सप्ताह में एक बार नीम की पत्ती के घोल का छिड़काव करना उचित होता है.

पॉटिंग मिश्रण कैसे तैयार करे 

पौधों की अच्छी वृध्दि के लिए पॉलिथिन में रेत + मिट्टी + केंचुआ खाद को क्रमशः (1:1:2) लेकर मिश्रण तैयार कर लेना चाहिए.

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