Sunflower Farming in 2022 | सूरजमुखी की खेती कैसे करे ? (हिंदी में )

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सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming) की खेती कैसे करे ?

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सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming)

नमस्कार किसान भाईयों,सूरजमुखी (Helianthus annuus) एक तिलहनी फसल है.जिसका उपयोग भोजन पकाने वाले तेल के रूप में किया जाता है.आज गाँव किसान के इस लेख में आप सभी को सूरजमुखी की खेती (Sunflower farming) की पूरी जानकारी मिलेगी.इसको पढ़कर आप सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming) कैसे करे ? यह जान पायेगें और इसकी (sunflower crop season) उपज से अच्छा लाभ कमा पायेगें.

सूरजमुखी (Sunflower) के फायदे (benefits of sunflower seeds)

सूरजमुखी का उपयोग वनस्पतिक घी तथा साबुन-प्रसाधन बनाने में किया है.ह्रदय रोगियों के लिए इसका तेल (sunflower oil) काफी लाभदायक होता है.इसके खल्ली में (oil cake) में 40 से 44 प्रतिशत प्रोटीन होता है.इसकों आप अच्छे पशु आहार के रूप में उपयोग कर सकते है.

सूरजमुखी की उत्पत्ति स्थल एवं क्षेत्र (Origin and area of sunflower)

सूरजमुखी (sunflower) की उत्पत्ति पश्चिम मैक्सिको तथा दक्षिणी पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी.विश्व में तेलहनी फसल के रूप में सूरजमुखी का क्षेत्रफल उत्तरोत्तर बढ़ रहा है.इस फल को उगाने वाले मुख्य देश सोवियत रूस,अर्जेंटीना,रूमानिया,तुर्की,आस्ट्रेलिया,संयुक्त राज्य अमेरिका,स्पेन तथा बल्गेरिया है.इस समय ससरी दुनिया का लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्रफल रूस में है.भारत (sunflower farming in india) में इसको उगाने वाले मुख्य राज्य महाराष्ट्र,कर्नाटक,आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु,गुजरात,राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश है.

सूरजमुखी की खेती के लिए मिट्टी एवं जलवायु (Soil and Climate for Sunflower Cultivation)

सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming) जीवांश युक्त तथा नमी बनाये रखने वाली हर प्रकार की भूमि (sunflower field) में की जा सकती है.लेकिन इसकी सफल खेती के लिए प्रचुर उर्वरा शक्तिशाली उदासीन पी एच वाली दोमट तथा मटियार दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है.जिस खेत में सूरजमुखी लगाना हो उसमें जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए.सूरजमुखी में शुष्कता सहिष्णुता होती है,इसलिए इसकी फसल अस्थायी सूखे का मुकाबला कर सकती है.

सूरजमुखी (sunflower plant) समशीतोष्ण तथा शीतोष्ण जलवायु का पौधा होता है.लेकिन यह शुष्कता सहिष्णु तथा प्रकाश के लिए असंवेदी होता है.इसके पौधे सामान्य रूप से दिन के लिए निरपेक्षता वाला होता है.धूप में ऑक्सिन-सांद्रणों के कारण तना तथा मुण्डक सूर्य की तरफ मुड़ जाते है.सामान्य रूप से सूर्यमुखी का पौधा तापक्रम के प्रति संवेदनशील होता है.

सूरजमुखी की उन्नत किस्में (improved varieties of sunflower)

सूरजमुखी की किस्में निम्नवत है..

उन्नत किस्में 

सूरजमुखी की उन्नत किस्मों में संकुल (कंपोजिट)-मोर्डेन,सूर्या,सी०ओ०-1,पैराडेविक,डी०आर०एस०एफ० आदि प्रमुख है.

संकर किस्में

सूरजमुखी की संकर किस्मों में बी०एस०एच०-1,के०बी०एस०एच०-1,8 और 17,के०बी०एस०एच०-44 आदि प्रमुख है.

सूरजमुखी के लिए खेत की तैयारी (Field preparation for sunflower)

जिस भी खेत में सूरजमुखी लगनी हो उस खेत को एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से और तीन से चार बार कल्टीवेटर या देशी हल से अच्छी तरह जुताई कर ले और हर बार पाटा जरुर लगाये,जिससे मिट्टी भुरभुरी और खेत समतल हो जाए.

सूरजमुखी की बुवाई के लिए बीज की मात्रा (Seed quantity for sowing sunflower)

सूरजमुखी (sunflower cultivation) की बुवाई के लिए संकुल किस्म के बीज की 08 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यकता होती है.वही संकर किस्म में 05 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज की आवश्यकता होती है.

सूरजमुखी का बीजोपचार (sunflower seed treatment)

सूरजमुखी के बीज (sunflower seeds) को 16 घंटे तक पानी में भिगोने के बाद 5 से 6 घंटे छाया में सुखा ले तथा बीज जनित रोगों से बचाने के लिए फफूंद नाशक से बीज को उपचारित कर लेना चाहिए.बुवाई से पहले बीजों को वैविस्टीन चूर्ण से 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए.

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सूरजमुखी की बुवाई का उचित समय (Sunflower sowing time)

सूरजमुखी की वुवाई का उचित समय (sunflower harvesting time) निम्नवत है…

  • रबी की फसल में – बुवाई 15 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक 
  • बसंत के समय – 15 फरवरी से 10 मार्च तक 
  • जायद की फसल में – पूरे अप्रैल महीने में 

सूरजमुखी के बोने की दूरी (sunflower seeding distance)

सूरजमुखी की बुवाई के समय संकुल किस्मों में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी० तथा पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी० एवं संकर किस्मों में बुवाई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सेमी० तथा पौधे से पौधे के बीच की दूरी 30 सेमी० रखना चाहिए.बुवाई के समय इस बात का ध्यान रखे बीज 4 से 6 सेमी० की गहराई से अधिक न हो.

सूरजमुखी के लिए खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer for Sunflowers)

सूरजमुखी के खेत में पहली जुताई के बाद 05 टन कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी हुई खाद अच्छी तरह फैलाकर दूसरी जुताई कर दे,जिससे खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए.सूरजमुखी की संकुल किस्मों में 60:80:40 एन० पी० के० प्रति हेक्टेयर एवं संकर किस्मों में 80:90:40 एन० पी० के० प्रति हेक्टेयर से खेत में प्रयोग करना चाहिए.

प्रयोग विधि 

सूरजमुखी की सिंचित अवस्था में नत्रजन की आधी मात्रा एवं स्फूर तथा पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय प्रयोग करना चाहिए.नत्रजन की शेष आधी मात्रा दो बराबर भागों में बांटकर पहली सिंचाई के बाद एवं फूल लगने के समय उपरिवेशन करना चाहिए.स्फुर की पूर्ति सल्फर युक्त उर्वरक से करे.असिंचित अवस्था में नत्रजन,स्फुर तथा पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय प्रयोग करना चाहिए.

सूरजमुखी की सिंचाई (sunflower irrigation)

सूरजमुखी की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाये रखना अति आवश्यक है.रबी एवं जायद की फसल के लिए क्रांतिक अवस्था यथा,कली बनना (20 से 25 दिन बाद ),पुष्प बनना (55 से 60 दिन बाद ) एवं बीज बनना (70 से 75 दिन बाद ) के समय अर्थात तीन सिंचाई करनी चाहिए.

सूरजमुखी की निराई एवं गुड़ाई (Sunflower weeding and hoeing)

सूरजमुखी में 15 दिन के अंदर अतरिक्त पौधों की छंटाई जरुर करना चाहिए.खेत को बुवाई के 20 से 25 दिनों बाद दो निराई-गुड़ाई जरुर कर देना चाहिए.

सूरजमुखी का खरपतवार प्रबन्धन (Sunflower Weed Management)

सूरजमुखी की फसल को 60 दिनों तक खरपतवार रहित रखना चाहिए.रासायनिक विधि से खरपतवारों की रोकथाम के लिए पेंडीमिथालिन 30 ई० सी० तीन लीटर मात्रा की प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के तुरंत बाद 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 1 से 2 दिनों के अन्दर बीजों के अंकुरण के पूर्व छिड़काव करना चाहिए.

सूरजमुखी का कीट एवं रोग प्रबन्धन (Pest and Disease Management of Sunflower)

सूरजमुखी के रोग एवं कीटों का प्रबन्धन आप निम्न प्रकार कर सकते है..

क्र० सं० फसल का नाम कीट / रोग का नाम कीट / रोग के कारकों का नाम लक्षण प्रबन्धन
1. सूरजमुखी (Sunflower) फल छेदक (Fruit borer) हेलिकोवरपा आर्मिजेरा (Helicoverpa armigera) शिशु फूलों एवं फूलों को खाती है. कभी-कभी यह पूरा शीर्ष ही खा जाती है. इस तरह पौधों पर बीज नही बन पाते है. खेत की जुताई गर्मी में अच्छी तरह से कर देना चाहिए ताकि प्यूपा ग्रीष्म ऋतु में मर जाए.

क्वीनालफ़ॉस 20 ई० सी० दवा को 2 लीटर / हेक्टेयर की दर से छिड़काव करे.

2. पत्र लांक्षण रोग (Leaf spot) अल्टरनेरिया हेलीयेन्थी (Alternaria helianthi) पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे बनते है. डायथेन एम० 45 (0.2 प्रतिशत) का छिडकाव करना चाहिए.

सूरजमुखी की कटाई (sunflower harvest)

सूरजमुखी के फूल का जब पिछला भाग पीला पड़ जाय.तो उसकी कटाई कर लेनी चाहिए.इसके अलावा फूलों से बीज की छंटाई कर लेनी चाहिए.इन्ही बीजों को सुखाने के बाद तेल निकला जाता है.

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सूरजमुखी का भण्डारण (sunflower storage)

सूरजमुखी का भण्डारण करने के लिए बीजों का अच्छी तरह सुखाकर रखना चाहिए.भण्डारण करते समय नमी की मात्रा 10 से 12 प्रतिशत से ज्यादा नही होनी चाहिए.

निष्कर्ष

तो किसान भाईयों, उम्मीद है कि गाँव किसान के सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming) से सम्बन्धित इस लेख से आप सभी को पूरी जानकारी मिली होगी.गाँव किसान द्वारा सूरजमुखी के फायदे से लेकर भण्डारण तक की सभी जानकारियां देने की कोशिश की गयी है.फिर भी सूरजमुखी की खेती (Sunflower Farming) से सम्बन्धित कोई प्रश्न हो एवं यह लेख आप को कैसा लगा, नीचे कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट करके जरुर बताये.महान कृपा होगी.

अन्य पूछे जाने वाले प्रश्न (Other FAQ)

प्रश्न : सूरजमुखी कितने रुपए किलो बिकता है?

उत्तर : सूरजमुखी के बीज 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक जाते हैं.

प्रश्न : सूरजमुखी का पौधा कब लगाना चाहिए?

उत्तर : सूरजमुखी का पौधा लगाने के लिए जनवरी-जुलाई का मौसम सही होता है। यह पूरे साल चलने वाला पौधा है.

प्रश्न : सूरजमुखी से कितना तेल निकलता है?

उत्तर :  सूरजमुखी की खेती में लगभग 110-120 लीटर तेल प्रति एकड़ तक निकालता है. 

प्रश्न : सूरजमुखी का तेल कैसे निकाला जाता है?

उत्तर :  सूरजमुखी के बीजों को क्रश (crush) किया जाता है और फिर दबाया जाता है। उसके बाद कुचले या पिसे हुए सूरजमुखी के बीजों से तेल को बाहर निकालने के लिए उनमें थोड़ी मात्रा में पानी मिलाया जाता है। घर पर सूरजमुखी का तेल बनाने की एक और विधि है

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