15 फरवरी तक करे सूरजमुखी बुवाई किसान, होगा फसल मे अधिक उत्पादन

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farvari me surajmukhi ki kheti
सूरजमुखी की बुवाई के लिए है उपयुक्त समय

सूरजमुखी की बुवाई के लिए है उपयुक्त समय

किसान भाई इस समय रबी फसलों की खेती की शस्य क्रियाओं मे व्यस्त है। लेकिन बसंत ऋतु मे बोई जाने वाली फसलों की तैयारी भी कर रहे है। ऐसे कुछ किसानों द्वारा इस ऋतु मे सूरजमुखी की खेती की जाती है। जिससे वह अच्छी आमदनी कमा लेते है।

यद्यपि सूरजमुखी की खेती पूरे साल की जा सकती है। क्योंकि इसकी फसल सभी मौसमों मे उगाई जा सकती है। लेकिन जहां इसकी पारंपरिक रूप से खेती नहीं की जाती, वहाँ इसकी बुवाई बसंत ऋतु मे जनवरी से फरवरी के अंत तक की जा सकती है। तो आइए जानते है सूरजमुखी की खेती की कुछ महत्वपूर्ण बाते जिससे अधिक उत्पादन मिलने मे काफी मदद मिलेगी।

सूरजमुखी की खेती की महत्वपूर्ण खेती

  • सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण गुणकारी खाद्य तिलहन है। इसे हर प्रकार की मिट्टी और मौसम में हो जाती है।
  • इसका तेल काफी उत्तम और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
  • सूरजमुखी की खेती मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु मे होती है। यहाँ देश की 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र मे इसकी फसल होती है।
  • वही रबी और बसंत ऋतु के मौसम में पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ऑडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों मे इसका अधिक उत्पादन होता है।
  • कम से कम 2 या 3 वर्षों मे एक बार सूरजमुखी की फसल को रोककर अन्य फसलों को उगाना चाहिए। विशेष रूप से गूदे वाले फलों या दालों की फसल को बोना उचित रहता है।
  • लगातार मौसम दर मौसम सूरजमुखी की फसल बोने से मिट्टी के उपजाऊ क्षमता काम हो जाती है। साथ सूरजमुखी के उत्पादन मे भी कमी आती है।

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सूरजमुखी की बुवाई के लिए खेत तैयारी 

  • इसकी बुवाई के लिए खेत को अच्छी प्रकार तैयार कर लेना चाहिए। इसके लिए खेत को 2 से 3 बार अच्छी प्रकार जुटाई कर भुरभुरा बना लेना चाहिए।
  • खेत से जल निकास की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
  • जुटाई के पाटा जरूर चलाएं जिससे खेत भली प्रकार समतल होने के साथ-साथ खेत के ढेले भी टूटकर भुरभरे हो जाए।

बुवाई के लिए बीजों की मात्रा कितनी ले किसान 

  • बारिश पर आश्रित किसान सूरजमुखी की बुवाई के लिए 5 से 6 किग्रा0 बीज प्रति हेक्टेयर उपयोग करे।
  • वही सिंचाई साधन उपलब्ध होने की दशा मे 4 से 5 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता पड़ती है।

विभिन्न राज्यों के लिए संकर किस्में 

  • पूरे भारत के लिए – डीआरएसएच-1 और केबीएचएस की बुवाई करे किसान।
  • पंजाब के लिए – पीएसएचएफ-118, पीएसएचएफ-598, पीएसी-36 और पीएसी- 1091
  • हरियाणा के लिए – केबीएसएच-1, पीएसी-36 और एचएसएफएच-878
  • महाराष्ट्र के लिए – एलएसएफएच-35 और एमएलएसएफएच-47
  • आंध्रप्रदेश के लिए – एपीएसएच-66 और एनडीएसएच-1
  • कर्नाटक के लिए – केबीएसएच-41, केबीएसएच-53, आरएसएफएच-1 और आरएसएफएच-130

सूरजमुखी मे खाद प्रबंधन कैसे करे किसान

  • सूरजमुखी की अच्छी उपज के लिए खेत तैयारी करते समय पहली जुताई के उपरांत बुवाई के पहले 7 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की सड़ी हुई खाद डालना चाहिए।
  • इसकी सिंचाई आधारित फसल के लिए 60:90:30 एनपीके डाली जाती है।
  • सिंचाई वाली फसल के लिए बुवाई के समय 50 प्रतिशत नत्रजन और 100 प्रतिशत फ़ॉस्फोरस और पोटाश डालनी चाहिए।
  • नत्रजन की शेष मात्रा दो बराबर भागों मे बुवाई के 30 से 55 दिनों बाद डालना चाहिए।

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सूरजमुखी की खेती सिंचाई प्रबंधन

  • खेत की मिट्टी हल्की हो तो सिंचाई की आवश्यकता 8 से 10 दिनों के अंतराल पर जरूरत होती है।
  • वही भारी मिट्टी मे 15 से 25 दिन बाद सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
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