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Radish farming – मूली की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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मूली की खेती (Radish farming) कैसे करे ?

मूली की खेती (Radish farming) कैसे करे ?

 नमस्कार किसान भाईयों, मूली की खेती (Radish farming) प्रायः सभी राज्यों में की जाती है. सामान्यतः सब्जी उत्पादक किसान भाई सब्जियों की अन्य फसलों की मेढ़ों पर या छोटे-छोटे क्षेत्रों में लगाकर आय अर्जित करते हैं। इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में मूली की खेती (Radish farming) की कैसे करे ? की पूरी जानकारी देगा. वह भी अपनी भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई अच्छी उपज के साथ अच्छा लाभ कमा सके. तो आइये जानते है मूली की खेती (Radish farming) की पूरी जानकारी-

मूली के फायदे 

मूली एक औषधीय सब्जी वाली फसल है. इसको सलाद में खाने के साथ-साथ कई सब्जियां बनायी जाती है. इसके सेवन से कई प्रकार के रोगों में फायदा मिलता है. यह बवासीर, गुर्दे की विफलता में मूत्र बनने की बंद होने में, पीलिया, मुहांसे, वायुविकार, पाचन, पित्त आदि रोगों में काफी फायदेमंद होती है. मूली विटामिन सी तथा खनिज तत्वों का अच्छा स्रोत होती है. इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस तथा लौह की उचित मात्रा पायी जाती है. मूली के पत्तो की सब्जी तथा मूली से बने पराठे खाने में स्वादिष्ट होते है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

मूली का राफानुस सैटियस (Raphanus sativus) है. यह ब्रैसिसेकी कुल की है. यह मिट्टी के अन्दर पैदा होने वाली सब्जी है. वास्तव में यह एक परिवर्तित जड़ है. मूली दुनिया भर में उगाई और खपत की जाती है. मूली की खेती हेलेनिस्टिक और रोमन काल से की जाती है. शहतूत और शलजम टॉर्टिल और शलजम के जंगली रूप में पूरे एशिया और यूरोप में पाए जाते है. यही से कहीं न कहीं इसकी पर्णवृत्ति हुई. भारत में इसकी खेती पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और असम आदि राज्यों की जाती है.

भूमि एवं जलवायु 

मूली की खेती सभी प्रकार की भूमि की जा सकती है. लेकिन रेतीली दोमट भूमि इसके लिए अधिक उपयुक्त रहती है. भूमि से उचित जल निकास का प्रबन्धन होना बहुत ही आवश्यक है.

मूली की खेती के लिए ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है. लेकिन यह अधिक तापमान भी सह सकती है. मूली की अच्छी उपज के लिए 10 से 17 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम होता है.

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उन्नत किस्में (Radish farming)

मूली की उन्नत किस्में निम्नवत है-

एशियन किस्में

मूली की एशियन किस्मों में पूसा चेतकी, जापानी सफ़ेद, पूसा हिमानी, पूसा रेशमी, जौनपुरी मूली, हिसार मूली नं-01, कल्याणपुर-1, पूसा देशी, पंजाब पसंद, चाइनीज रोज, सकुरा जमा, व्हाईट लौंग, के० एन०-1, पंजाब अगेती और पंजाब सफ़ेद आदि प्रमुख है.

यूरोपियन किस्में

मूली की योरोपियन किस्मों में व्हाईट आइसिकिल, रैपिड रेड व्हाईट तिपड, स्कारलेटग्लोब और फ्रेंच ब्रेकफास्ट आदि प्रमुख है.

बीज की मात्रा 

मूली की खेती के लिए 5 से 10 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है.

खेत की तैयारी (Radish farming) 

मूली की खेती के लिए खेत की अच्छे से तैयारी करनी होगी. इसके लिए सबसे पहले खेत को मिट्टी पलटने वाले हल से एक बार जुताई करने उपरान्त दो से तीन जुताई कल्टीवेटर या देशी हल से करके मिट्टी को भुरभुरा बना ले. हर जुताई के बाद पाटा जरुर लगाए. जिससे भूमि समतल हो जाय.

बुवाई का समय 

मूली की खेती पूरे साल की जा सकती है. फिर भी अच्छा मुनाफा पाने के लिए सितम्बर से जनवरी तक बोई जाती है.

बुवाई की विधि (Radish farming)

मूली की बुवाई दो प्रकार से कर सकते है –

कतार विधि 

कतार विधि से मूली की बुवाई के लिए तैयार खेत में 30 सेमी० की दूरी पर कतारे बना ली जाती है. और इन कतारों में बीज को लगभग 3 से 4 सेमी० गहराई में बो देते है. बीज उग जाने पर जब पौधों में दो पंक्तियां आ जाती है. तब 8 से 10 सेमी० दूरी छोड़कर अन्य पौधों को निकाल देते है.

मेड़ों पर बुवाई 

इस विधि में खेत में क्यारियां बनाकर तैयार कर लेते है. इन तैयार क्यारियों 30 सेमी० की दूरी पर 15 से 20 सेमी० की दूरी पर कतारें बना ले. खेत की मेड़ों पर बीज को 4 सेमी० गहराई पर बो दे. बीज जब उगा आये उसमें दो-दो पत्तियां आ जाय तब पौधों को 8 से 10 सेमी० की दूरी छोड़कर बाकि पौधों को निकाल दिया दे. इस विधि से बुवाई करने पर मूली की बढ़वार अच्छी रहती है. और मूली मुलायम रहती है.

खरपतवार नियंत्रण

मूली की अच्छी उपज के लिए खरपतवार नियंत्रण बहुत ही आवश्यक है. बुवाई के 15 से 20 दिन बाद निराई-गुड़ाई अवश्य करे. और साथ में मेड़ों पर मिट्टी भी चढाते रहे. क्योकि मूली की जड़े ऊपर दिखाई देगी तो सूर्य के प्रकाश से वे हरी हो जाएगी. अधिक खरपतवार होने पर खरपतवार नाशी पेंडामिथालिन की 3.3 लीटर मात्रा 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करे.

खाद एव उर्वरक (Radish farming)

मूली की अच्छी उपज के लिए 200 से 250 कुंटल प्रति हेक्टेयर गोबर की सड़ी हुई खाद पहली जुताई के समय खेत में डालनी चाहिए. इसके अतरिक्त 50 किलोग्राम नाइट्रोजन, 25 किलोग्राम फास्फोरस तथा 25 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय देना चाहिए. नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के 11 और 30 दिन बाद देनी चाहिए.

सिंचाई (Radish farming)

मूली की गर्मी वाली फसल में 4 से 5 दिन के अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. वही शरदकालीन फसल में 10 से 15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है. बरसात के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नही पड़ती है.

प्रमुख रोग एवं कीट 

प्रमुख कीट एवं प्रबन्धन 

माहू – यह हरे सफ़ेद छोटे-छोटे कीट होते है. जो पत्तियों का रस चूसते है. इस कीट के लगने से पत्तियां पीली पड़ जाती है. तथा उपज को भारी नुकसान पहुंचाते है. इसके प्रकोप से फसल बिक्री लायक नही रहती है.

रोकथाम – इस कीट के नियंत्रण के लिए मेलाथियान 2 मिली० प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से लाभ होता है.

रोयेदार सूडी – इस कीट की सूडी भूरे रंग का रोयेदार होता है. एवं ज्यादा संख्या में एक जगह पत्तियां को खाते है.

रोकथाम – इस कीट के नियंत्रण के लिए मेलाथियान 10 प्रतिशत चूर्ण 20 से 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह के समय बुरकाव करना चाहिए.

प्रमुख रोग एवं प्रबंधन 

अल्टरनेरिया झुलसा – यह रोग जनवरी से मार्च के दौरान बीज वाली फसल पर ज्यादा लगता है.

रोकथाम – इसके नियंत्रण हेतु कैप्टान 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करना चाहिए. नीचे की पत्तियों को तोड़कर जला देना चाहिए. पत्ती तोडने के बाद मेन्कोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

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खुदाई का समय (Radish farming)

मूली की जड़े जब पूर्ण विकसित हो जाए तब कड़ी होने से पहले मुलायम अवस्था में ही खोद लेना चाहिए.

उपज (Radish farming)

मूली की उपज किस्मों, खाद एवं उर्वरक तथा खेती करने के तरीके पर निर्भर करती है. मूली की औसतन उपज 200 कुंटल प्रति हेक्टेयर के करीब होती है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है, गाँव किसान (Gaon Kisan) के इस मूली की खेती (Radish farming) से सम्बंधित लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा मूली के फायदे से लेकर मूली की उपज तक सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी मूली की खेती (Radish farming) से सम्बंधित कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा आपको यह लेख कैसा लगा कम्नेट कर जरुर बताये. महान कृपा होगी.

आप सभी लोगो का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द. 

 

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