Potato Farming – आलू की खेती की पूरी जानकारी हिंदी में

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Potato Farming
आलू की खेती (Potato Farming) की पूरी जानकारी

आलू की खेती (Potato Farming) की पूरी जानकारी

नमस्कार किसान भाईयों, आलू की खेती (Potato Farming) देश में बड़े पैमाने पर की जाती है. आलू एक ऐसी फसल है जिसे प्रति इकाई क्षेत्रफल में अन्य फसलों (गेहूं, धान, मूंगफली) की अपेक्षा अधिक उत्पादन मिलता है तथा प्रति हेक्टेयर आय भी अधिक मिलती है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख के जरिये आलू की खेती (Potato Farming) की पूरी जानकारी देगा, वह भी अपनी भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई अच्छी उपज प्राप्त कर सके. तो आइये जानते है आलू की खेती (Potato Farming) की पूरी जानकारी-

आलू के फायदे 

आलू की फसल विश्व की महत्वपूर्ण सब्जियों में से एक है. यह एक सस्ती और आर्थिक फसल है. आलू का प्रत्येक कन्द पोषक तत्वों का भण्डार है, जो बच्चों से लेकर बूढों तक के शरीर का पोषण करता है.आलू में मुख्य रूप से 80 से 82 प्रतिशत पानी होता है और 14 प्रतिशत स्टार्च, 2 प्रतिशत चीनी, 2 प्रतिशत प्रोटीन, 1 प्रतिशत खनिज लवण, 0.1 प्रतिशत वसा तथा अल्प मात्रा में विटामिन भी पाए जाते है. अब तो आलू एक उत्तम पौष्टिक आहार के रूप में व्यवहार होने लगा है. बढती आबादी के कुपोषण एवं भुखमरी से बचाने में एक मात्र यही फसल मददगार है. इसलिए इसे गरीब आदमी का मित्र कहा जाता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

आलू का उत्पति स्थान दक्षिणी अमेरिका को माना जाता है. लेकिन भारत देश में आलू प्रथम बार सत्रहवीं सताब्दी में यूरोप से आया था. आलू की खेती देश के सभी राज्यों में की जाती है. लेकिन आलू की खेती ज्यादातर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, पंजाब, कर्नाटक, आसाम और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में की जाती है.

जलवायु एवं भूमि (Potato Farming)

आलू समशीतोष्ण जलवायु की फसल है. सामान्य रूप से अच्छी खेती के लिए फसल अवधि के दौरान दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा रात्रि का तापमान 4 से 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. फसल का कन्द बनते समय लगभग 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम होता है. कन्द बनने के पहले कुछ अधिक तापक्रम रहने पर फसल की वानस्पतिक वृध्दि अच्छी होती है. लेकिन कंद बनने के समय अधिक तापक्रम होने पर कंद बनना रुक जाता है. लगभग 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापक्रम होने पर आलू की फसल में कन्द बिलकुल बंद हो जाता है.

आलू की खेती विभिन्न प्रकार की भूमि में की जा सकती है, जिसका पी० एच० मान 6 से 8 के मध्य है. लेकिन बलुई दोमट तथा दोमट भूमि के अच्छी उपज होती है. इस बात का ध्यान रखे जमीन से जल निकास की अच्छा प्रबंध होना चाहिए.

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उन्नत किस्में (Potato Farming)

अगेती किस्में

क्र० सं०  किस्म का नाम  तैयार फसल दिनों में  प्राप्त उपज (कु०/हे० )
1 कुफरी चंद्रमुखी 60-75 200-250
2 कुफरी पुखराज 60-75 300-350
3 कुफरी सूर्या 60-75 250-300
4 कुफरी ख्याति 60-75 250-300
5 कुफरी बहार 60-75 200-250
6 कुफरी अशोका 60-75 250-300

मुख्य फसल 

1 कुफरी बहार 90-110 250-300
2 कुफरी आनंद 90-110 300-350
3 कुफरी बादशाह 90-110 300-350
4 कुफरी सिन्दूरी 90-110 300-400
5 कुफरी सतलज 90-110 250-300
6 कुफरी लालिमा 90-110 250-300
7 कुफरी अरुण 90-110 300-350
8 कुफरी सदाबहार 90-110 300-350

पछेती किस्में 

1 कुफरी सतलज 110-120 250-300
2 कुफरी बादशाह 110-120 300-350
3 कुफरी आनन्द 110-120 300-350

प्रसंस्करण योग्य प्रजातियाँ 

1 कुफरी सूर्या 110-120 300-350
2 कुफरी चिप्सोना-1 110-120 300-350
3 कुफरी चिप्सोना-2 110-120 300-350
4 कुफरी चिप्सोना-3 110-120 300-350
5 कुफरी फ्राईसोना 110-120 300-350

बीज की मात्रा 

आलू की बुवाई के लिए 30 से 55 मिमी० व्यास का अंकुरित (चिटिंग) आलू बीज का प्रयोग करना चाहिए. एक हेक्टेयर आलू की बुवाई के लिए 30 से 35 कुंटल बीज की आवश्यकता पड़ती है.

खेत की तैयारी (Potato Farming)

आलू की बुवाई के लिए सबसे पहले खेत को मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करके पाटा लगा देते है. उसके उपरान्त 3 से 4 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से कर पाटा लगा देते है जिससे मिट्टी भुरभुरी व ढेला रहित हो जाती है. वर्त्तमान समय में रोटावेटर से जुताई करने से खेत अच्छी प्रकार तैयार हो जाता है. आलू की अच्छी उपज के लिए पलेवा करके ही बुवाई करे.

खाद एवं उर्वरक 

सबसे पहले खेत की तैयारी में जुताई करते समय 15 से 30 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए, जिससे जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है. जो कंदों की पैदावार बढाने में सहायक होती है. उर्वरकों में सामान्य तौर पर 180 किग्रा० नत्रजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस तथा 100 किग्रा० पोटाश डालना चाहिए. मृदा परिक्षण के आधार पर यह मात्रा घट बढ़ सकती है.

बुवाई का समय (Potato Farming)

आलू तापक्रम के प्रति सचेतन प्रकृति वाला होता है. आलू की बुवाई 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उसकी की वानस्पतिक वृध्दि और 15 से 20 डिग्री सेल्सियस इसके कंदों की बढ़वार के लिए सर्वोताम होता है. सामान्य अगेती फसल की बुवाई मध्य सितम्बर से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक, मुख्य फसल की बुवाई मध्य अक्टूबर के बाद हो जानी चाहिए.

बीज की बुवाई (Potato Farming)

बुवाई वाले खेत में पर्याप्त नमी न हो तो पलेवा करना आवश्यक होता है. बीज के आकार के आलू के कंदों को कूडों में बोया जाता है. तथा मिट्टी से ढककर हल्की मेड़ें बना दी जाती है. आलू की बुवाई पोटैटो प्लान्टर से किये जाने से समय, श्रम व धन की बचत की जा सकती है.

खरपतवार नियंत्रण  

आलू की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहना आवश्यक है.

सिंचाई प्रबन्धन (Potato Farming)

आलू की अच्छी उपज के लिए 7 से 10 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है. यदि आलू की बुवाई से पूर्व पलेवा नही किया गया तो बुवाई के 2 से 3 दिन के अन्दर हल्की सिंचाई करना अनिवार्य है. अच्छी फसल के लिए अंकुरण से पूर्व बलुई दोमट व दोमट मृदाओ में बुवाई के 8 से 10 दिन बाद तथा भारी मृदाओ में 10 से 12 दिन बाद पहली सिंचाई करे. अगर तापमान के अत्यधिक कम होने और पाला पड़ने की संभावना हो तो फसल में सिंचाई अवश्य करे. आधुनिक सिंचाई पध्दति जैसे स्प्रिन्कलर और ड्रिप से पानी के उपयोग की क्षमता में वृध्दि होती है. कूंडों में सिंचाई की अपेक्षा स्प्रिन्कलर प्रणाली से 40 प्रतिशत तथा ड्रिप प्रणाली से 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है और पैदावार में भी 10 से 20 प्रतिशत वृध्दि होती है.

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कीट एवं रोग प्रबन्धन 

आलू की फसल में बहुत सी बीमारियाँ तथा कीट हानि पहुंचाते है. यह पर मुख्य कीटों एवं बीमारियाँ की जानकरी निम्नवत है-

पिछेता झुलसा (लेट ब्लाईट)

यह आलू की फफूंद से लगने वाली एक भयानक बीमारी है. इस बीमारी का प्रकोप से आलू की पत्ती, तने तथा कंदों पर होता है. जैसे ही मौसम बदली युक्त हो और तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के मध्य तथा आपेक्षित आर्द्रता 80 प्रतिशत हो, तो इस बीमारी की संभावना बढ़ जाती है.

रोकथाम 

इस रोग की रोकथाम के लिए सिंचाई तुरंत बंद कर देनी चाहिए. यदि आवश्यक हो तो हल्की सिंचाई करे तथा लक्षण दिखाई देने से पूर्व ही बीमारी की रोकथाम के लिए जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू० पी० 1.5 से 2 किग्रा प्रति हेक्टेयर दवा के घोल का छिड़काव 8 से 10 दिन के अंतराल पर करना चाहिए.

अगेता झुलसा 

अगेता झुलसा रोग की बीमारी से पत्तियों और कन्द दोनों ही प्रभावित होते है. आरम्भ में इस बीमारी के लक्षण निचली तथा पुरानी पत्तियों पर छोटे गोल अंडाकार भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देते है. इस बीमारी से प्रभावित कंडों पर दबे हुए धब्बे तथा नीचे का गूदा भूरा एवं शुष्क हो जाता है.

रोकथाम 

इस रोग की रोकथाम के लिए अवरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए. इस बीमारी की रोकथाम के लिए 0.3 प्रतिशत कॉपर आक्सीक्लोराइड फफूंदनाशक के घोल का प्रयोग कर सकते है.

आलू की पत्ती मुड़ने वाला रोग 

आलू की यह बीमारी एक वायरल बीमारी है. जो (पी० एल० आर० वी०) वायरस द्वारा फैलती है.

रोकथाम 

इस रोगथाम के लिए रहित बीज चाहिए इस वायरस के वाहक एफिड की रोकथाम दैहिक कीटनाशक यथा फ़ॉस्फोमिडान का 0.4 प्रतिशत घोल मिथाइल ऑक्सीडिमीटान अथवा डाइमिथोएट का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर 1 से 2 बार छिड़काव दिसम्बर और जनवरी में करना चाहिए.

दीमक 

दीमक का प्रकोप अगेती फसलों में ज्यादा होता है. इससे प्रभावित आलू के पौधों की पत्तियां नीचे की और मुड़ जाती है. अधिक प्रकोप की अवस्था में पत्तियों स्मंजीमतल हो जाती है. तथा पत्तियों की निचली सतह पर तांबा के रंग जैसे धब्बे दिखाई पड़ते है.

रोकथाम 

इसकी रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफ़ॉस 20 प्रतिशत ई० सी० 2 से 3 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करे तथा 7 से 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करे.

आलू की खुदाई (Potato Farming)

अगेती फसल से अच्छा मूल्य प्राप्त करने के लिए बुवाई 60 से 70 दिनों के उपरांत कच्ची फसल की अवस्था में आलू की खुदाई की जा सकती है. फसल पकने पर आलू खुदाई का उत्तम समय मध्य फरवरी से मार्च द्वितीय सप्ताह तक है. 30 डिग्री सेल्सियस तापमान आने से पूर्व ही खुदाई पूर्ण कर लेना चाहिए.

आलू का भंडारण 

आलू की सुषुप्ता अवधि भण्डारण को निर्धारित करती है. भिन्न-भिन्न प्रजातियों के आलू की सुशुप्त अवधि भिन्न-भिन्न होती है. जो आलू की खुदाई के बाद 6 से 10 सप्ताह बाद तक होती है. यदि आलू को बाजार में शीघ्र भेजना है तो शीतगृह में भंडारित करने की आवश्यकता नही पड़ती है. इसके लिए कच्चे हवादार मकानों, छायादार स्थानों में आलू को स्टोर किया जा सकता है.

निष्कर्ष  

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के आलू की खेती (Potato Farming) से सम्बन्धित इस लेख से आप सभी को पूरी जानकारी मिल पायी होती है. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा आलू के फायदे से लेकर भण्डारण तक सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी आलू की खेती (Potato Farming) से सम्बन्धित आपका कोई प्रश्न हो तो कम्नेट बॉक्स में कम्नेट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कम्नेट कर जरुर बताएं. महान कृपा होगी.

आप सभी लोगो का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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