Populus Farming in India – पॉपुलर की खेती कैसे करें ?

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Populus Farming in India
Populus Farming in India - पॉपुलर की खेती कैसे करें ?

Populus Farming in India – पॉपुलर की खेती कैसे करें ?

नमस्कार किसान भाईयों, पॉपुलर की खेती (Populus Farming in India) देश के किसान भाई अन्य कृषि फसलों के साथ कर अधिक लाभ कमाते है. क्योकि पॉपुलर के साथ उगाई जाने वाली फसलों की उपज में कोई विशेष कमी नही आती है. इसके अलावा पॉपुलर की खेती 6 से 7 साल बाद किसान को एक अच्छी रकम देती है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में पॉपुलर की खेती की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई इस कृषि वानिकी की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सके. तो आइये जानते है पॉपुलर की खेती (Populus Farming in India) की पूरी जानकारी-

पॉपुलर के फायदे 

पॉपुलर की लकड़ी हल्की, नरम, एवं सफ़ेद अथवा हलके धूसर भूरे रंग की होती है. इसकी लकड़ी की कीमत तने के व्यास व लम्बाई पर निर्भर करती है. पॉपुलर का उपयोग प्लाईवुड, माचिस, खिलौना, नकली हाथ-पेर आदि व कागज़ बनाने के उद्योगों में होता है. प्लाईवुड उद्योगों में 60 सेमी० अथवा उससे अधिक व्यास के वृक्षों की आवश्यता होती है. सामान्यतः 6 वर्ष बाद एक पेड़ किसान भाई अच्छी कीमत प्राप्त कर सकते है.

हिमाचल व उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में अन्य चारे के अभाव में इसकी पत्तियां पशुओं को खिलाई जाती है. इसमें अपरिष्कृत प्रोटीन की मात्रा लगभग 15 प्रतिशत तक पायी जाती है.

इसके अलावा पॉपुलर का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. पोपुलस ऐल्बा की छाल का टॉनिक की द्रष्टि से उपयोगी होती है. यह खून को शुध्द करने के साथ-साथ चर्म रोगों में भी लाभदायक रहती है.

पॉपुलर की उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

इसका विस्तार का प्रारम्भ अठारहवीं शातंदी के दौरान हुआ, जब यूरोप में वहां की स्थायी प्रजातियों एवं उत्तरी अमेरिका की पर्जतियों से उत्तम संकर प्रजातियाँ विकसित की गई. इंटरनेशनल पॉपुलर कमीशन के स्थापित होने पर सं 1950 के बाद पॉपुलर का विस्तार नए क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर हुआ. भारत में इसकी खेती जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि राज्यों में किया जाता है.

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भूमि एवं जलवायु 

पॉपुलर पहाड़ी क्षेत्रों, तराई व मैदानी क्षेत्रों में उगाया जाता है. शुरुवात में इसकी खेती तराई क्षेत्रों तक ही सीमिति थी, परन्तु अब इसे मैदानी क्षेत्रों में भी उगाया जा रहा है. पॉपुलर को 1500 मिमी० से 4000 मिमी० औसतन वार्षिक वर्षा की जरुरत होती है. इसका पौधा समुद्रतल से 700 मी० की उंचाई तक उगाया जा सकता है. पॉपुलर की ज्यादातर प्रजातियाँ अम्लीयता सहन कर लेती है. इसके लिए 6.5 से 8.5 पी० एच० वाली मिट्टी उपयुक्त पायी जाती है. पॉपुलर के लिए सबसे उपयुक्त दोमट मिट्टी पायी जाती है.

प्रजातियों एवं क्लोन्स 

पॉपुलर के किस्मों में शोध के आधार पर एस० 7 सी० 4, एस० 7 सी० 13, एस० टी० 124, जी० 48 आदि क्लोन्स कृषि वानिकी के लिए उपयुक्त पाए गए है.

पौध तैयार करना 

पॉपुलर की पौध का प्रवर्धन कटिंग द्वारा किया जाता है. यह कटिंग एक वर्ष के पौधे से 20 से 25 सेमी० लम्बी तथा 2 से 3 सेमी० मोटे तने व टहनी से प्राप्त की जाती है. कलमों को रोपने से पहले इन्हें इन्हें ताजे पानी में 24 घंटे तक डुबाये रखते है. फिर 10 मिनट तक डरमेट के 0.5 घोल में डुबाने के पश्चात इसे एमिसान-6 के 0.5 प्रतिशत के घोल में डुबोना चाहिए.

इसके बाद 8 से 10 टन प्रति एकड़ गोबर की सड़ी खाद व 30 ग्राम मैलाथियान डस्ट पूरे खेत में मिलाकर क्यारियाँ बना लेना चाहिए. 15 जनवरी से फरवरी के प्रथम सप्ताह में क्यारियों में 60 x 60 सेमी० दूरी पर पॉपुलर की कटिंग को खुरपी की सहायता से लगाना चाहिए. जिसका 20 सेमी० भाग मिट्टी के अन्दर रखना चाहिए. रोपण के बाद क्यारी की सिंचाई कर देनी चाहिए. जब तक कटिंग में शाखाएं न फूट जाए क्यारी में एक सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए. इस प्रकार एक वर्ष में ये पौधे रोपाई के योग्य हो जाते है.

पौध रोपण  

पौधों का रोपण जनवरी के मध्य से फरवरी के मध्य तक तैयार किये गए गड्ढों (4.5 x 4.5 x 60 सेमी० गहरे) में रोपाई कर देना चाहिए. पौधा लगाने से पहले गड्ढों में दो टोकरी कम्पोस्ट खाद तथा शेष उसी खेत की मिट्टी से भरना चाहिए. पौध रोपण से पहले गड्ढा भराई के समय 50 ग्राम नीम की खली प्रति गड्ढे की दर से डाल देना चाहिए. कृषि वानिकी विधि में पौधों का रोपण 5 x 4 मीटर की दूरी पर करना चाहिए. जिससे कृषि कार्य सुचारू रूप से किया जा सके. व पंक्तियों के बीच में कृषि फसलों को सफलतापूर्वक उगाया जा सके. इस प्रकार एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 500 पॉपुलर के पौधों का रोपण किया जा सकता है.

सिंचाई 

पौध रोपड़ के तुरंत बाद सिंचाई करना चाहिए. पहले दो वर्षों में पॉपुलर की जड़ों को नम बनाए रखना आवश्यक है. इसके बाद फरवरी से अक्टूबर तक हर पखवारे और मार्च से जून तक पंद्रह दिन के अंतराल पर सिंचाई करना आवश्यक है.

कटाई-छंटाई 

तनो को सीधा और गांठों से मुक्त रखने के लिए लगभग 50 पर्तिशत बड़ी व भारी टहनियों को काटते रहना चाहिए. जिसके फलस्वरूप मुख्य तने की वृध्दि अच्छी होती है. व बोई गयी अन्तः फसलों में छाया का प्रभाव कम रहता है.

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अन्तः फसलें 

कृषि फसलों को पॉपुलर के साथ उगाने से अधिक आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है. शुरू के तीन वर्षों तक सभी फसलों की उपज में कोई कमी नही आती है. चूँकि जड़ों में पॉपुलर की पत्तियां झड़ जाती है. इसलिए रबी की फसलों की उपज में कोई कमी नही आती है. रबी में मुख्य रूप से गेहूं, चना, जौ, बरसीम, सरसों, मटर व मौसमी सब्जियां व खरीफ में धान, उर्द, मूंग आदि की खेती सफलता पूर्वक की जाती है.

कटाई 

पॉपुलर बहुत जल्दी बढ़ने वाला पौधा है और सामान्य स्थिति में यह 6 से 7 वर्ष में काटने योग्य हो जाता है. लेकिन कम बढवार वाले क्षेत्रों में यह कटान 8 वर्ष बाद की जाती है. खराब मौसम या तरह-तरह की बीमारियों में से फसल को नुकसान होने पर पॉपुलर किसान के लिए बीमा साबित होता है. इस तरह कृषि वानिकी के लिए पॉपुलर एक आदर्श प्रजाति है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उमीद है, गाँव किसान (Gaon Kisan) के इस लेख से आप सभी को पॉपुलर की खेती (Populus Farming in India) से संबंधित जानकारी मिल पायी होगी. फिर भी इस लेख से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं, महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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