Pomegranate farming – अनार की खेती की पूरी जानकारी (हिंदी में)

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अनार की खेती (Pomegranate farming) की पूरी जानकारी

अनार की खेती (Pomegranate farming) की पूरी जानकारी

नमस्कार किसान भाईयों, अनार की खेती (Pomegranate farming) देश में अच्छे मूल्य प्राप्ति को देखते हुए की जा रही है. यह एक महत्वपूर्ण फल फसल है. आज गाँव किसान (Gaon Kisan) अपने इस लेख में अनार की खेती (Pomegranate farming) की पूरी जानकारी देगा वह भी अपने देश की भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई अच्छी उपज प्राप्त करने के साथ अच्छा लाभ ले सके. तो आइये जानते है अनार की खेती (Pomegranate farming) की पूरी जानकारी-

अनार फल के फायदे 

अनार का फल स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ यह बहुत ही स्वादिष्ट होता है. इसमें विटामिन की प्रचुर मात्रा पायी जाती है. इसमें विटामिन ए, सी और ई तथा फोलिक एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसमें खनिज तत्व जैसे लोहा पोटेशियम, फ़ॉस्फोरस, कैल्शियम, एंटीऑक्सीडेंट, जैसे एंथोसायनिन, पालीफीनोल्स, सेलेनियम, और आहार फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसलिए अनार को एंटीऑक्सीडेंट को प्राकृतिक स्रोत के रूप में सर्वोत्तम माना जाता है. इसका उपयोग ताजे फल, जूस एवं विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों के रूप में किया जाता है. अनार के सेवन से गठिया, वात रोग, कैंसर, अल्सर, उच्च रक्तचाप आदि रोगों से मुक्त रखता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

अनार का वानस्पतिक नाम प्यूनिका ग्रेनेटम (Punika granatum) है. इसका फल लाल रंग का होता है. इसके अन्दर सैकड़ों लाल रंग के छोटे-छोटे दाने पाए जाते है. यह दुनिया के गर्म देशों में उगाया जाता है. वैज्ञानिको के मतानुसार अनार का उत्पत्ति ईरान में हुई है. वही से यह दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुंचा. भारत में इसकी खेती महांराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, तमिलनाडु और गुजरात आदि राज्यों में होती है.

जलवायु एवं भूमि (Pomegranate farming)

अनार की अच्छी उपज के लिए गहरी बलुई दोमट मिट्टी सबसे सर्वोत्तम होती है. अनार के पौधों में लवण एवं क्षारीयता सहन करने की क्षमता होती है इसलिए इसे क्षारीय मिट्टी में भी उगाया जा सकता है. भूमि का पी० एच० मान 6.5 से 7.5 के मध्य होना चाहिए. भूमि से जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए.

अनार की खेती के लिए शुष्क एवं अर्ध शुष्क जलवायु सर्वोत्तम होती है. फलों की वृध्दि एवं पकने समय 40 डिग्री० सेल्सियस तक का तापमान उपयुक्त रहता है. 11 डिग्री० सेल्सियस से कम तापमान पौधों की वृध्दि पर बुरा प्रभाव डालता है.

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अनार की उन्नत किस्में 

अनार की खेती के लिए क्षेत्र विशेष की जलवायु, मृदा एवं पानी की गुणवत्ता तथा बाजार की मांग के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों का चुनाव करना चाहिए. यहाँ पर क्षेत्र के हिसाब से निम्न किस्मों का चुनाव कर सकते हो-

महाराष्ट्र :- महाराष्ट्र राज्य में उगाई जाने वाली किस्मों में गणेश, मृदुला प्रमुख किस्में है.

गुजरात :- गुजरात राज्य में उगाई जाने वाली किस्मों में धोकला, अरक्ता प्रमुख किस्में है.

आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्णाटक :- इन राज्यों में उगाई जाने वाली किस्मों में पेपर शैल, स्पैनिश रूबी, ज्योति प्रमुख किस्में है.

उत्तर प्रदेश व उत्तराँचल :- इन राज्यों में उगाई जाने वाली मस्कट सफ़ेद, गणेश प्रमुख किस्में है.

राजस्थान :- राजस्थान राज्य में उगे जाने वाली मस्कट, धोकला, गणेश, मृदुला, अरक्ता प्रमुख किस्में है.

प्रवर्धन की विधियाँ (Pomegranate farming)

अनार की प्रवर्धन की कई विधियाँ द्वारा किया आता है जिसमें बीज, कलम, गूटी द्वारा प्रमुख है. इसमें कलम विधि द्वारा वानस्पतिक प्रवर्धन सबसे आसान तथा व्यावसायिक विधि है.

अनार की कलम तैयार करने के लिए एक साल की मजबूत पकी हुई टहनी को चुनते है. कमलों को काटते समय लगभग 15 से 20 सेमी० लम्बी स्वस्थ कलमे, जिसमें 3 से 4 स्वथ्य कलियाँ मौजूद होनी चाहिए. ऊपर का कटाव आँख के 5.5 सेमी० ऊपर व नीचे का कटाव आँख  के 5.5 सेमी० ऊपर एवं नीचे का कटाव आँख के ठीक नीचे से करना चाहिए. पहचान के लिए उपरी कटाव तिरछा व नीचे का कटाव सीधा बनाना चाहिए. इसके बाद कटी हुई कलमों को 0.5 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम या कॉपर आक्सीक्लोराइड के घोल में भिगों देना चाहिए. तथा भीगे हुए भाग को छाया में सुखा लेना चाहिए.

इसके बाद कलामों को थैलियों में तिरछा करके रोपण कर देते है. कलम की आधी लम्बाई भूमि के बाहर और आधी भूमि के अन्दर रखते है. इसके बाद इसकी समय-समय पर सिंचाई करते रहते है.लगभग दो महीने बाद  इसकी बढ़ी हुई टहनियों की छंटाई कर देते है.

पौधे लगाने का समय एवं दूरी 

अनार की तैयार पौध लगाने से पहले मई के महींने में रेखांकन कर गड्ढे खोद लेना चाहिए. पौध लगाने का उचित समय जून-जुलाई और फरवरी-मार्च उचित महीना रहता है. पौधे लगाने के लिए 5 X 5 मीटर की दूरी पर 60 X 60 X 60 सेमी० आकार के गड्ढे खोदकर 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम के घोल से अच्छी तरह भिगो दे. इसके बाद 10 किग्रा० गोबर की सड़ी हुई या 2 किग्रा० वर्मी कम्पोस्ट खाद, 25 ग्राम ट्राईकोडर्मा को गड्ढे में डालकर पानी डाल देना चाहिए. जिससे मिट्टी अच्छी तरह बैठ जाए. पौधा करने के पूर्व 100 ग्राम नत्रजन, 50 ग्राम फास्फोरस तथा 50 ग्राम पोटाश प्रतियो गड्ढे के हिसाब से पौधे गड्ढे में डाल देना चाहिए. तदुपरांत पौधे की रोपाई करे. जिससे पौधा अच्छी प्रकार वृध्दि कर सके.

सधाई एवं काट-छांट (Pomegranate farming)

अनार के पौधों की काट-छांट बहुत ही आवश्यक होती है. क्योकि अनार के पौधे में बहुत सी शाखाएं निकलती है. जिनकी कटाई न करने पर ये शाखाएं तने का रूप ले लेती है. और उपज पर विपरीत प्रभाव डालती है. इसलिए समय-समय पर इनकी काट-छांट बहुत ही आवश्यक है.

अनार के बड़े पेड़ों पर जब भी सूखी शाखाएं, रोगी शाखाएं एवं कीट युक्त शाखाओं के दिखाई देते ही काट देना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक (Pomegranate farming)

अनार की अच्छी उपज के लिए खाद एवं उर्वरक बहुत ही आवश्यक है. इसलिए अनार के पौधे को 10 किग्रा० गोबर की सड़ी हुई खाद, 250 ग्राम नाइट्रोजन, 125 ग्राम फास्फोरस तथा 125 ग्राम पोटेशियम प्रति वर्ष प्रति पेड़ में डालना चाहिए. अगले पांच वर्षों तक यह मात्रा इसी प्रकार बढ़ाते हुए देते रहना चाहिए. और इसके बाद यह मात्रा स्थिर कर देनी चाहिए. खाद को पौधों के चारों ओर फैलाव में छिटक कर मिट्टी में मिला देना चाहिए.

सिंचाई प्रबन्धन (Pomegranate farming)

अनार की अच्छी उपज में सिंचाई का बहुत ज्यादा योगदान रहता है. अनार की खेती में गर्मी के सीजन में 5 से 7 दिन, सर्दियों में 10 से 12 दिन तथा जाड़ों में 10 से 15 दिन के अंतर पर पानी देना चाहिए.

फूल एवं फल आने का समय 

अनार के पौधे में फूल मार्च से अप्रैल महीने व जून-जुलाई महीने में आते है. लेकिन जो फूल जून और जुलाई महीने में आते है उन्ही से फसल लेना लाभकारी होता है. अनार के फल दिसम्बर-जनवरी में तोड़ाई लायक हो जाते है.

फल तोड़ाई एवं उपज  

अनार के का पौधा चार साल बाद फल देने लायक हो जाता है. लेकिन इसके पेड़ अच्छी उपज 6 से 7 वर्ष बाद ली जा सकती है. तथा यह पेड़ 25 से 30 वर्ष तक अच्छी उपज देते रहते है. एक पूर्ण विकसित पेड़ पर 50 से 60 फल रखने चाहिए. इससे उपज भी अच्छी मिलती है. फल की गुणवत्ता भी ठीक रहती है. एक हेक्टेयर खेत में अनार के 600 पेड़ लग जाते है. जिससे 90 से 120 कुंटल शुध्द फल प्राप्त हो जाते है.

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अनार में कीट एवं रोग प्रबन्धन 

गर्म जलवायु वाले क्षेत्रो में रोग एवं कीट का प्रकोप कम होता है. अनार में लगने वाले कीट एवं रोग के नियंत्रण आप निम्न प्रकार से कर सकते है.

प्रमुख रोग एवं रोकथाम 

पत्ती एवं फल धब्बा रोग – यह एक फफूंद जनित रोग है. इसमें पत्तियों एवं फलों के ऊपर फफूंद के भूरे धब्बे दिखाई देते है. जिससे फलों के बाजार भाव में गिरावट आ जाती है.

रोकथाम – इस रोग की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम 1.0 मिली प्रति लीटर या मेन्कोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर का 15 से 20 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करना चाहिए.

फल सड़न रोग – इस रोग में फल काले पड़कर सड़ जाते है.

रोकथाम – फूल आने पर या उसके 20 दिन बाद कार्बेन्डाजिम 1.0 मिली प्रति लीटर या मेन्कोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर दवा में से किसी एक का छिड़काव कर देना चाहिये.

फाइटोप्थोरा ब्लाईट – यह रोग वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी अधिक होने पर पत्ती, फूल तथा फल पर असर पड़ता है. तथा फल में सड़न भी शरू हो जाती है.

रोकथाम – इस रोग की रोकथाम के लिए मेताक्सिल 8 प्रतिशत + मेन्कोजेब (0.25 प्रतिशत) दवा का छिड़काव करना चाहिए.

प्रमुख कीट एवं रोकथाम 

अनार की तितली – प्रोढ़ तितली द्वारा दिए गये अण्डों से निकली सूड़ियाँ फलों के अन्दर प्रवेश करती है. तथा फल के गूदे को खाती है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए प्रभावित फलों को तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए. तथा फास्फोमिडान 0.05 प्रतिशत या कार्बेरिल 4 ग्राम प्रति लीटर दवा का छिड़काव करना चाहिए.

माइट – प्रायः सफ़ेद एवं लाल रंग के अति सूक्ष्म जीव अनार के पत्तियों के ऊपरी एवं निचले सतह पर शिराओं के पास चिपककर रस चूसते है. जिससे पत्तियां सूखकर गिर जाती है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए क्लोरपाइरीफ़ॉस 2 मिली० प्रति लीटर या इमिडाक्लोरप्रिड 0.04 प्रतिशत का छिड़काव कर सकते है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के अनार की खेती (Pomegranate farming) से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा अनार के फल के फायदे से लेकर अनार के कीट एवं रोग प्रबंधन तक की सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी अनार की खेती (Pomegranate farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कम्नेट बॉक्स में कम्नेट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कम्नेट कर जरुर बताये. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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