Pear Farming – नाशपाती की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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नाशपाती की खेती ( Pear Farming) कैसे करे ?

नाशपाती की खेती ( Pear Farming) कैसे करे ?

नमस्कार किसान भाईयों, नाशपाती की खेती (Pear farming) देश के पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ घाटी, तराई तथा भावर क्षेत्रों में की जाती है. यह मानव स्वास्थ्य के पोषक फल है. इसलिए इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख में नाशपाती की खेती (Pear farming) की पूरी जानकारी देगा वह भी अपनी भाषा हिंदी में. जिससे किसान भाई अच्छी उपज प्राप्त कर सके. तो आइये जानते है नाशपाती की खेती (Pear farming) की पूरी जानकारी-

नाशपाती के फायदे

नाशपाती के फल खाने में स्वादिस्ट और पोषक होते है. इनमे प्रोटीन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. नाशपाती में फाइबर, आयरन, तथा विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करता गई. नाशपाती के सेवन से आँख सम्बन्धी रोग, फेफड़े सम्बन्धी बीमारियाँ, अपच, पाइल्स, किडनी की पथरी, कब्ज, वजन कम करने, कोलेस्ट्रोल का नियंत्रण, एनीमिया, हड्डियाँ मजबूत आदि रोगों में फायदेमंद होती है. नाशपाती का जूस भी काफी फायदेमंद होता है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र 

नाशपाती का वैज्ञानिक नाम  Pyrus communis Linn (पाइरस कम्यूनिस) है. यह Rosaceae (रोजेसी) कुल का पेड़ है। इसको अंग्रेजी में Pear (पियर) कहते है. इसकी उत्पत्ति उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी योरोप में हुई है. विश्व में इसका सर्वाधिक उत्पादन चीन, इटली, संयुक्त राज्य, स्पेन अर्जेनटीना, दक्षिण कोरिया, तुर्की, जापान, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड आदि देशों में की जाती है. भारत में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश एवं कम सर्दी वाली किस्मों की खेती उप-उष्ण क्षेत्रों में की जा सकती है.

जलवायु एवं भूमि (Pear Farming)

नाशपाती की खेती की अच्छी उपज के लिए आर्द्र उपोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है. इसकी खेती पूरे देश में आर्द्र उपोष्ण मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ शुष्क शीतोष्ण उंचाई वाले क्षेत्रों में की जा सकती है. समुद्रतल लगभग 600 मीटर से 2700 मीटर तक नाशपाती का फल उत्पादन किया जा सकता है. बसंत के मौसम पाला, कोहरा और ठण्ड इसके फूलों काफी हनी पहुंचाती है. तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस से नीचे होने पर इसके फूल मर जाते है.

नाशपाती की अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट तथा गहरी मिट्टी सर्वोत्तम होती है. भूमि से जल निकास का उचित प्रबन्ध होना चाहिए. पौधों की अच्छी वृध्दि के लिए जड़ों के 2 मीटर नीचे तक मिट्टी पथरीली या कंकड़ रहित होनी चाहिए.

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उन्नत किस्में (Pear Farming)

  • जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराँचल के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ब्यूरे हार्डी, वार्टलेट, विंटरनेलिस, जार्गनेल, थम्बपियर, क्लेपर्स, फेबरिट आदि प्रमुख किस्में है.
  • अर्ध पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पत्थरनाख, ट्वेन्टिएथ सेंचुरी, लीकांटे, कीफर, पन्त पेयर 17, पन्त पेयर 18, पंजाब गोल्ड, रेड बुश आदि प्रमुख किस्में है.

खेत की तैयारी (Pear Farming)

नाशपाती की अच्छी उपज के लिए खेत को अच्छी प्रकार से तैयार करना चाहिए. खेत की दो से तीन जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. खेत में जल भराव न हो इसका उचित प्रबंध होना चाहिए.

प्रवर्धन की विधियाँ

नाशपाती का प्रवर्धन चश्मा व जीभी कलम द्वारा किया जाता है. चश्मा द्वारा प्रवर्धन अगस्त-सितम्बर में किया जाता है तथा कलम विधि द्वारा कलम बांधने का समय फरवरी-मार्च उत्तम होता है. मूलवृंत के लिए बीजू पौधे, बौने पौधे के लिए विही का मूलवृंत.वार्टलेट के साथ कायिक असंगतता होती है. अतः ओल्डहोम किस्म का मध्य मूलवृंत के रूप में प्रयोग करे.

पौधा लगाने का समय व दूरी  

नाशपाती के पौधा लगाने का उपयुक्त समय जनवरी होता है. पौधा लगाने की उपयुक्त दूरी 5 x 5 मीटर होती है. पौधा लगाने से पूर्व गड्ढे को खोदकर गोबर की खाद लगभग 10 किलो प्रति पेड़ व मिट्टी को आपस में मिलाकर गड्ढे में डाल देना चाहिए. गड्ढे में हल्की सिंचाई कर दे जिससे मिट्टी बैठ जाये. पौधा लगाने के बाद चरों और की मिट्टी हटाकर अच्छी प्रकार थाला बना देना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक (Pear Farming) 

नाशपाती के पौधों की अच्छी वृद्धि एवं इसकी अच्छी उपज के लिए खाद एवं उर्वरक का उपयोग आवश्यक है. इसके लिए नाइट्रोजन, फ़ॉस्फोरस व पोटाश 50-50 ग्राम प्रति पेड़ प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ाकर 10 वर्षों तक दे. इसके बाद मात्रा स्थिर कर दे. फ़ॉस्फोरस की पूरी और पोटाश की आधी मात्रा फरवरी के दूसरे सप्ताह में तथा पोटाश की शेष मात्रा अप्रैल में दे और नाइट्रोजन की मात्रा का 3/5 भाग फरवरी के मध्य में, 1/5 भाग अप्रैल तथा शेष 1/5 भाग अक्टूबर में देना चाहिए.

सिंचाई (Pear Farming)

नाशपाती की मैदानी क्षेत्रों की खेती में अप्रैल से जून तक 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. इसके अलावा आवश्यकतानुसार सिंचाई कर सकते है.

फूल और फल लगने का समय 

नाशपाती के पेड़ में फूल आने का समय अप्रैल महीना है. जबकि फल जुलाई से अगस्त तक पक कर तैयार हो जाते है.

विशेष ध्यान रखे ये बात 

नाशपाती की वार्टलेट, विंटरनेलिस तथा डूने-डू-कोमिस किस्मों को एक साथ भागों में लगाना चाहिए. बाग़ का प्रत्येक तीसरी पंक्ति का तीसरा पेड़ परागक किस्मों को लगाना चाहिए.

उपज 

नाशपाती के उपज की बात की जाय तो उन्नत विधि से की गयी खेती से 100 किग्रा० फल प्रति पेड़ प्रति वर्ष प्राप्त हो जाता है.

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कीट एवं रोग प्रबन्धन 

प्रमुख कीट एवं प्रबन्धन 

व्हाईट स्केल – यह कीट छोटी शखाओं को तथा फल के बाहरी दल पुंज को नुकसान पहुंचता है. जिससे पौधे के ये भाग सूख जाते है

रोकथाम – प्रकोपित पौधे पर सितम्बर या अक्टूबर में फल तोड़ने के बाद क्लोरपाइरीफ़ॉस का छिड़काव करवाना चाहिए.

वूली एफिड – यह एक बहुत छोटा कीट होता है. जो सफ़ेद रुई जैसा स्राव निकालता है. जिसके कारन इसे दूर से देखा जा सकता है. ये पौधे के कोमल टहनियों, कटे भागों पर भूमि में मुख्य जड़ों के आस-पास गहरे तक ये कीट पाए जाते है. इसके शिशु तथा वयस्क पौधे के रस चूसते है. जिससे उपज को हानि पहुंचती है.

रोकथाम – फल दार पौधे पर जून से अक्टूबर में क्लोरपाइरीफ़ॉस 0.04 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए.

प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन 

पौधा झुलसा रोग – इस रोग को होने से पौधे मुरझा जाते है. और ऐसा प्रतीत होता है जैसे झुलस गए है.

रोकथाम – इसकी रोकथाम के लिए रोगी पौधे को उखड कर फेक देना चाहिए. मिट्टी को ओरियोंफजिन 80 ग्राम के घोल को मिलाकर सिंचाई करे.

नाशपाती का पत्ती धब्बा रोग – इसरोग के कारण नाशपाती के पत्तियों पर धब्बे पड़ जाते है. जिससे उपज को नुकसान पहुंचता है.

रोकथाम – इस रोक के दिखाई देते ही मेन्कोजेब 600 ग्राम और कार्बेन्डाजिम 100 ग्राम का तीन सप्ताह के अंतराल पर दो बार छिड़काव करे.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan)  के नाशपाती की खेती (Pear farming) से सम्बन्धित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा नाशपाती के फायदे से लेकर नाशपाती के कीट एवं रोग प्रबंधन तक की सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी नाशपाती की खेती (Pear farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताएं. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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