Palm tree farming : किसान भाई ताड़ की खेती से क़मा सकते है जबरदस्त मुनाफा, जानिए कैसे ?

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Palm tree farming
Palm tree farming

Palm tree farming – ताड़ की खेती से किसान का होगा अधिक मुनाफा 

नमस्कार किसान भाईयों, ताड़ की खेती (Palm tree farming) भारत में अब केवल वर्षावनों तक ही नही सीमित है. बल्कि यह कमाई का एक नया कारोबार बन गया है. आज देश में ताड़ की खेती एक बेहतरीन व्यवसाय के रूप में उभर कर सामने आई है. इसके खेती के लिए बेहतर उचित प्रबन्धन के साथ धैर्य, निगरानी और मजबूत मनोबल की जरुरत होती है. आज गाँव किसान अपने इस लेख में ताड़ की खेती (palm oil farming) की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई ताड़ की खेती (Palm farming) कर अच्छा मुनाफा कमा सके.

ताड़ की खेती करने वाले देश (Palm tree farmimg in world)

ताड़ की खेती नाइजीरिया, भारत, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, पापुआ न्यू गिनी, कोलंबिया और थाईलैंड में बेहद लोकप्रिय व्यवसाय के रूप में की जाती है. भारत में ताड़ की खेती (palm oil farming in india) 15 से भी अधिक राज्यों में लगभग 50,000 हेक्टेयर में की जाती है जिसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, असम, केरल, गुजरात, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और अंडमान आदि राज्यों में प्रमुख रूप से की जाती है.

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ताड़ की खेती की ख़ास बात (Palm Tree Feature)

TAD KI KHETI की सभी फसलों में जो बारहमासी फसलें है उनमें सबसे अधिक तेल देती है. ताड़ का पेड़ खाद्य ताड़ के तेल (Edible Palm Oil)  के साथ-साथ ताड़ के कर्नेल तेल (Kernel Oil) का उत्पादन करता है. इसकी उच्च उपज क्षमता के कारण इस पाम ऑयल को गोल्डन पाम (Golden Palm) माना जाता है.

ताड़ की खेती के लिए जलवायु

ताड़ एक आर्द्र उष्णकटिबंधीय (Humid Tropical) फसल है और उन क्षेत्रों में सबसे अच्छी तरह से उगती है. जहां तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस और 20 डिग्री सेल्सियस से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है. ताड़ की खेती वर्षा पर निर्भर करती है. इसकी फसल के लिए 2500 से 4000 मिमी० या 100 से 150 मिमी० हर महीने वर्षा की आवश्यकता होती है. इसके अच्छे विकास के लिए हर दिन 5 से 6 घंटे तेज धूप और 80 प्रतिशत आर्द्रता की जरुरत होती है.

ताड़ की फसल के लिए मिट्टी 

ताड़ की फसल को विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, लेकिन इसकी खेती अच्छी तरह से सुखी गहरी दोमट और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर जलोढ़ मिट्टी में सबसे अच्छी उपज देती हैं. ताड़ के पेड़ों को कम से कम 1 मीटर मिट्टी की गहराई की जरुरत पड़ती है. ताड़ की खेती के लिए किसानों को अत्यधिक खारा, अत्यधिक क्षारीय, तटीय रेतीली और पानी की स्थिर मिट्टी से बचने की जरुरत होती है.

ताड़ की उन्नत किस्में (Palm Oil Varieties in India)

भारत में ताड़ की अच्छी उअप्ज देने वाली किस्मों में टेनेरा, ड्यूरा एवं पिसिफेरा प्रमुख है

1. टेनेरा :-  ताड़ की यह किस्म बहुत ही आम है. जिसका खोल पतला होता है और पूरे संसार में इसकी खेती की जाती है.

2. ड्यूरा :-  ताड़ की इस किस्म की खेती व्यावसायिक रूप से नहीं की जाती है और इसका खोल 2 से 8 मिमी तक मोटा होता है.

3. पिसिफेरा :- ताड़ की या एक ऐसी किस्म है जो खोल रहित फल देती है.

ताड़ की खेती के बीज 

Tad Ki Kheti में मुख्य भूमिका बीजो की होती है.इन बीजों की उच्च सुप्तता के कारण उन्हें 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 75 दिनों के लिए प्री-हीटिंग की जरुरत पड़ती है. तदुपरांत बीजों को बहते पानी में भिगोकर 4-5 दिनों के लिए ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है. 10 से 12 दिन में बीज अंकुरित हो जाते हैं और अंकुरित हो जाने के बाद बीजों की बुवाई करनी चाहिये.

खेत की तैयारी, दूरी एवं रोपाई (Palm tree farming)

Tad Ki Kheti के लिए खेत की मिट्टी को खरपतवार रहित कर देना लाभकारी होता है तथा खेत को दो बार जुअती करके मिट्टी को भुरभुरा बना ले. मिट्टी को समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए खेत को अच्छे कार्बनिक पदार्थों को डाले.ताड़ के पेड़  की रोपाई के लिए सबसे अच्छा मौसम जून से दिसंबर तक का होता है. इसे त्रिकोणीय रोपण विधि (Triangular Planting Method) के द्वारा 9 मीटर x 9 मीटर x 9 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए. इसके अलावा 1 हेक्टेयर भूमि में 143 से 145 ताड़ के पौधे लगाए जा सकते हैं. रोपण गड्ढों में 60 सेमी x 60 सेमी x 60 सेमी के आकार के साथ किया जाना चाहिए.

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ताड़ की फसल उपज (Palm tree farming)

खेत में पौधरोपण के  बाद 5 से 3 साल बाद पेड़ उपज देना प्रारंभ कर देते है.Tad Ki Kheti में फलों की तुड़ाई समय पर की जानी चाहिए है, क्योंकि यह तेल की गुणवत्ता और मात्रा को बहुत प्रभावित करता है. इसकी तुड़ाई   तब की जा सकती है जब फल पीले-नारंगी रंग के हो जाएं और 5 से 8 फल अपने आप गिर जाएं.इसके अलावा फलों को उंगली से जोर से दबाने पर ताड़ के फलों से नारंगी रंग का तेल निकल जाए तो समझ लीजिये यह कटाई के लिए तैयार है. इसकी कटाई  पूरे साल की जाती है और आम तौर यह तेज चाकू या दरांती की मदद से 10 से 14 दिनों के अंतराल में की जानी चाहिए.

ताड़ की खेती के फायदे (Benefits of palm oil farming)

ताड़ की खेती से जो तेल प्राप्त होता है वह अन्य तेल फसलों की तुलना में सबसे अधिक होता है. ताड़ की फसल में कीट और रोग का प्रकोप कम होता है. ताड़ के तेल की पूर्व-असर अवधि में अंतर-फसल से किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं .यह फसल पूरे वर्ष मासिक आय और अच्छे बाजार मूल्य का आश्वासन देती है. किसान उच्च रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक स्थिति में सुधार होता है. ताड़ का तेल मूल्यवान विदेशी मुद्रा की बचत करके खाद्य तेल के आयात को प्रतिस्थापित करता है.

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