गेहूं की इस नई विकसित किस्म को लगाकर किसान भाई ले सकते हैंअधिक पैदावार, आईये जाने इस किस्म के बारे में पूरी जानकारी-

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variety of wheat DBW 222 Karan Narendra
नई उन्नतशील किस्म DBW 222 (करण नरेंद्र)

गेहूं की नई उन्नतशील किस्म DBW 222 (करण नरेंद्र)

देश केज्यादातर किसान रबी के मौसम में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. इसीलिएदेश में गेहूं की पैदावार अधिक है. यहां तक देश गेहूं का निर्यात भी करता है. इसके लिए देश के वैज्ञानिकों द्वारा उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लि समय-समय पर गेहूं की नई किस्म विकसित करते रहते हैं. इसी कड़ी में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के द्वारा गेहूं की एक नई किस्म विकसित की गई है. गेहूं की यह किस्म किसानों को अधिक पैदावार देने में सक्षम है. गेहूं की इस किस्म का नाम करण नरेंद्र DBW 222 है.

मौजूदा समय में देश के किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में किसान भाइयों को गेहूं की नई किस्म के बारे में जानकारी होना बहुत ही जरूरी है.जिससे वह गेहूं की फसलों से अच्छा उत्पादन ले सकें. इसी कड़ी मेंआज हम आपको गेहूं की इस बेहतरीन किस्म करण नरेंद्र DBW 222 (variety of wheat DBW 222 Karan Narendra) के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं. क्योंकि यह किस्म किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है. तो आईए जानते हैं इसकी पूरी जानकारी-

करण नरेंद्र किस्म DBW 222 की खास बातें (variety of wheat DBW 222 Karan Narendra)

गेहूं की यह किस्म भूरा रतुवा रोग के लिए पूरी तरह से प्रतिरोधी पाई गई है. इसके अलावा पीले रतुवा की सभी प्रमुख रोग जनक प्रकारों से भी प्रतिरोधकता पाई गई है. साथ ही करनाल बंट ( 9.1 प्रतिशत) एवं खुला कंडुआ ( कंगयारी 4.9 प्रतिशत) रोगों के प्रति भी अत्याधिक रोग प्रतिरोधक है. 

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इस की किस्म उच्च गुणवत्ता इस बात से पता चलती है. इसकी बनायी गयी रोटि की गुणवत्ता 7.5 तक पायी गयी है. वही रोटी के फुलाव का आयतन 648 तक पाया गया है. इससे बनाये गए ब्रेड की गुणवत्ता 8.24 तक पायी गयी है. वही इससे बनाए गए बिस्किट के फैलाव का गुणांक 8.45 सेमी० तक पाया गया है. 

 इस किस्म की खेती कैसे करे किसान? 

करण नरेंद्र किस्म DBW 222 की बुवाई किसान भाई इस नवम्बर महीने में ही करे. जो कि इस किस्म के लिए सबसे उपयुक्त है. किसान भाई को कतारों में इसकी बुवाई के लिए 40 से 45 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की जरुरत पड़ेगी. वही अगर खाद एवं उर्वरक की बात की जाय तो प्रति हेक्टेयर किसान भाई को 120-150 किलो नाइट्रोजन, 40-60 किलो फ़ास्फ़ोरस 40 किलो पोटाश इसकी फसल को देनी पड़ेगी. किसान यहाँ इस बात का ध्यान रखे सभी उर्वरको का उपयोग करने से पहले अपने खेत की मृदा जांच जरुर कराये. 

इस किस्म के गेहूं की फसल को सामान्यतः 5 से 6 सिंचाइयों की जरुरत पड़ती है. जिसमें किसान भाई पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए. इसके अलावा किसान भाई 20 दिनों के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए. गेहूं की इस किस्म को पककर तैयार होने में लगभग 143 दिन का समय लग जाता है. 

करण नरेंद्र DBW 222 किस्म की उपज 

किसान भाई अच्छे रखरखाव और वैज्ञानिक विधि अपनाकर इस किस्म की खेती करे तो लगभग 61.3 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक इसकी उपज प्राप्त हो जाती है. जो कि अन्य किस्मों जिसमें एचडी 2967 से 13 प्रतिशत, DBW 88 से 9.4 प्रतिशत एवं HD 3086 से 4.0 प्रतिशत अधिक से अधिक पायी गयी है. 

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वैसे तो करण नरेंद्र DBW 222 किस्म की अधिकतम उतापदन क्षमता 82.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पायी गयी है. लेकिन देरी से बुआई करने पर भी इस किस्म की उत्पादन क्षमता में अन्य किस्मों की तुलना में बहुत कम अंतर पाया गया है.

किन क्षेत्रों के लिए है उपयुक्त ये नई किस्म 

गेहूं की यह नई किस्म करण नरेंद्र DBW 222 उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीज़नों को छोड़कर) पश्चिमी उत्तर प्रदेश ( झाँसी मण्डल को छोड़कर)। हिमाचल प्रदेश ( ऊना व पाटा घाटी), जम्मू-कश्मीर के हिस्सों (जम्मू और कठुआ ज़िले), और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) के सिंचित क्षेत्रों में समय से बुआई के लिए एकदम उपयुक्त है. 

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