लौकी की इस किस्म से मिलगा अधिक उत्पादन, जानिये कहाँ के किसानों के लिए है उपयुक्त

0
203
gourd new variety
लौकी की नई किस्म

लौकी की इस किस्म से मिलगा अधिक उत्पादन

नमस्कार किसान भाइयों साल के सभी महीने किसान भाईयों के लिए काफी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इन सभी महीनों में किसानों को खेती के अपने सभी कार्यों को पूरा करता है. जिसमें वह अपनी किसी फसल को पानी देता है तो किसी की कटाई या बुवाई करता है.

फरवरी महीने बाद मार्च महीने की शुरुवात होगी, जिसके साथ ही जायद सीजन की फसलों की बुवाई की भी शुरुआत हो जाएगी. इस महीने में किसान भाई कई तरह फसलों की बुवाई करगें, जिनमें कुछ किसान लौकी की बुवाई भी करेगें. लौकी गर्मियों के मौसम की एक महत्वपूर्ण सब्जी है, इसलिए मार्च के महीने में ही किसान भाई लौकी की खेती करना शुरू कर देते हैं. इस लिए गाँव किसान आज आपको इस लेख में लौकी की एक नई किस्म के बारे में जानकारी देगा. जिससे किसान भाई अच्छी उपज प्राप्त कर सकेगें. जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होगा.

लौकी की नई उन्नत किस्म (New Improved Variety of Bottle Gourd)

लौकी की यह नई किस्म बिहार कृषि विश्वविध्यालय सबौर, भागलपुर के वैज्ञानिक द्वारा विकसित की गई है, उन्होंने जिसका नाम बीआरबीजी–65 रखा है. इस बात का ध्यान रखे  कि यह किस्म बिहार राज्य के लिए उपयुक्त है. साथ ही इस किस्म की खेती पूरे साल की जा सकती है.

यह भी पढ़े : WHEAT FARMING : गेहूं की खेती में गेहूं के मामा का नियंत्रण कैसे करे ?

क्या ख़ास बात है इस किस्म की  (Variety of BRBG-65)

बीआरबीजी–65 किस्म के फलों की लंबाई 32 से 35 से.मी. तक हो जाती है और वजन लगभग 800 ग्राम से एक कि.ग्रा. तक हो जाता है. इस किस्म के फल देखने में बहुत खूबसूरत, छोटे और एक समान रूप से बेलनाकार होते है.

लौकी बीआरबीजी–65 किस्म की खेती करने का उपयुक्त समय (When to Cultivate Gourd BRBG-65 Variety)

लौकी की इस किस्म की बुवाई गर्मी, बरसात और अगेती शरद तीनों मौसम में करने के लिए एकदम उपयुक्त है. वैज्ञानिक का कहना है कि इस किस्म के फल उच्च गुणवत्तायुक्त होते है. साथ ही, किसान पूरे साल इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

यह भी पढ़े : Mustard in Mahu – सरसों की फसल को माहूँ कीट से कैसे बचाएं ?

उपज कितनी होगी ?(How Much Will You Get?)

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि लौकी की इस नई किस्म से औसत उपज 540 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक किसानों को उपज प्राप्त हो. जो अन्य किस्मों की तुलना में बहुत अधिक है. साथ में आपको जानकारी देते चले कि किसान भाई बरसात में इसकी खेती झालरी विधि या पंडाल विधि से कर सकते है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here