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Napier Grass Farming – नेपियर घास की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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Napier Grass Farming
नेपियर घास की खेती (Napier Grass Farming) कैसे करे ?

नेपियर घास की खेती (Napier Grass Farming) कैसे करे ?

 नमस्कार किसान भाईयों, नेपियर घास की खेती (Napier grass farming) पशु चारे के लिए की जाती है. यह एक बहुवर्षी चारे की वाली फसल है. किसान भाई इसकी खेती कर अपने पशुओं को अच्छा हरा चारा पा सकते है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख के जरिये आप को नेपियर घास की खेती (Napier grass farming) कैसे करे पूरी जानकारी देगा, वह भी अपनी देश की भाषा हिंदी में. जिससे आप सभी किसान भाई इसकी अच्छी उपज कर सके. तो आइये जानते है नेपियर घास की खेती (Napier grass farming) की पूरी जानकारी-

नेपियर घास के फायदे 

नेपियर घास की खेती करने से पूरे साल पशुओं को हरा चारा उपलब्ध रहता है. इसका चारा पौष्टिकता से भरपूर होता है. इसमें औसतन प्रोटीन की मात्रा 7 से 12 प्रतिशत तक पायी जाती है. प्रारम्भिक अवस्था में चारे में लगभग 12 से 14 प्रतिशत शुध्द पदार्थ पाया जाता है. इसकी पत्तियों में 9.30 प्रतिशत और तने में 4.40 प्रतिशत प्रोटीन पायी जाती है.

उत्पत्ति एवं वितरण 

नेपियर घास का वानस्पतिक नाम पेनिसेटम परप्यूरियम (Pennisetum purpureum) है. इसकी उत्पत्ति दक्षिणी अमेरिका माना जाता है. इसका नाम कर्नल नेपियर के नाम पर रखा गया है. जिन्होंने सन 1901 में रोडेशिया सरकार का ध्यान इसके चारे के महत्त्व की और खीचा था. यह घास सन 1913 में संयुक्त राज्य अमेरिका में लाई गयी. भारत में इसकी खेती सन 1912 में आरम्भ की गई. भारत में यह इस घास को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के सिंचित स्थानों में की जाती है.

जलवायु एवं भूमि 

इस घास को कई प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है. इसके लिए दोमट एवं बलुई दोमट भूमि अच्छी मानी जाती है. जलभराव वाली जगह में इसकी खेती नही की जा सकती है. अच्छी उपज के लिए इसे दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकास का अच्छा प्रबंध हो, इसके लिए सबसे उपयुक्त होती है.

इसकी खेती गर्म जलवायु के अतरिक्त ठन्डे स्थानों पर भी उगाई जा सकती है. पाले वाले स्थानों पर इसे नही उगाना चाहिए, क्योकि पाले से इसकी फसल को भारी नुकसान होता है.

मिश्रित खेती/ अंतरवर्ती खेती 

नेपियर एक बहुवर्षीय घास है जिसे किसी भी खेत में कम से कम 3 से 4 वर्षों तक रखा है. सर्दियों में (नवम्बर से मार्च) में इसकी वृध्दि मही होती है. इसलिए दूसरा चारा खासकर फलीदार चारा बरसीम, लोबिया की बुवाई करनी चाहिए. नेपियर की जड़े सड़न क्रिया द्वारा अधिक से अधिक कार्बन युक्त पदार्थ प्रदान करती है. इसलिए इसकों पांच सालों के बाद खेत से निकालकर दूसरी फसल लगानी चाहिए.

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उन्नत किस्में (Napier Grass Farming)  

नेपियर घास – नेपियर, यूगांडा हैयरलेस

संकर नेपियर (नेपियर X बंजारा संकर) – एन० बी०-21, सी० ओ०-4, पूसा जायंट, आई० जी० एफ० आर० आई०-10 इसमें प्रोटीन की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत तथा शुष्क पदार्थ पाचन शीलता 58 से 65 प्रतिशत पायी जाती है. इसकी उपज लगभग 1600 कुंटल प्रति हेक्टेयर हरा चारा प्राप्त होता है. संकर नेपियर में खाद और पानी की आवश्यकता नेपियर से अधिक होती है. नेपियर के साथ बाजरे का संकरण कर नेपियर X बाजरा निकला गया है. यह संकर प्रत्येक नेपियर घास वाले भाग में उगाई जाती है.

खेत की तैयारी

नेपियर घास की बुवाई के लिए खेत को अच्छी प्रकार तैयार कर लेना चाहिए. खेत की तैयारी पिछली फसल पर निर्भर करती है. किसी भी दशा में गहरी जुताई और हैरो द्वारा मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. इस घास को लगाने से पहले खेत को समतल करना जरुरी है. खेत में खरपतवार विल्कुल नही होना चाहिए.

बुवाई (Napier Grass Farming)

नेपियर घास की बुवाई तने के टुकडे या जड़दार तने के भाग से करते है क्योकि नेपियर घास में बीज बनना थोडा कठिन है. तथा बीज का जमाव भी बहुत कम होता है. यह टुकडे तने के निचले भागों से चुने जाते है. इसकों दो या तीन गांठ वाले छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेना चाहिए. सर्दियों में कटाने के पश्चात इन टुकड़ों को 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

  • 40000 तने के टुकडे – 50 सेमी० ग 50 सेमी० दूरी पर बुवाई करनी चाहिए. (शुध्द फसल प्राप्त करने के लिए)
  • 20000 तने के टुकडे – 100 सेमी० X 50 सेमी० दूरी पर बुवाई करनी चाहिए. (अन्तः फसली पध्दति (Inter Cropping) करने के लिए)

इन टुकड़ों को गाड़ते समय इस बात का ध्यान रखे कि इसकी एक गाँठ जमीन के अन्दर और दूसरी गाँठ जमीन की सतह पर हो. इसके अतरिक्त इन टुकड़ों को 45 डिग्री के कोण पर गाड़ना चाहिए. बुवाई का सबसे अच्छा समय जून-जुलाई है.

खाद एवं उर्वरक (Napier Grass Farming)

नेपियर घास की अच्छी उपज के लिए अधिक खाद की आवश्यकता होती है. इसके लिए प्रति हेक्टेयर 125 से 150 कुंटल गोबर की सड़ी हुई खाद और 50 से 60 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम स्फूर तथा 40 किलोग्राम पोटाश की बुवाई के समय डालना चाहिए. इसके बाद प्रति कटान कम से कम 30 किलोग्राम नत्रजन कटाई के तुरंत बाद डालने से उपज में वृध्दि होती है. नत्रजन से दोबारा वृध्दि (Regrowth) अच्छी और तेज गति से होती है. नत्रजन डालने से प्रोटीन तथा शुष्क पदार्थ की मांग बढ़ जाती है.

सिंचाई एवं जल निकास 

नेपियर घास के खेत में जल-निकास का समुचित प्रबंध होना आवशयक है. पानी भरे खेतों में पौधे मर जाते है. गर्मी और सर्दियों में फसल को सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. गर्मियों में मार्च से जून तक फसल की सिंचाई 10 से 12 दिन के अंतर पर करनी चाहिए. सर्दी के मौसम में फसल को 15 से 20 दिनों के अंतर पर पानी देना चाहिए. प्रत्येक कटाई के पश्चात सिंचाई करने से पौधों की पुर्नवृध्दि अच्छी होती है और उपज में वृध्दि होती है.

सामान्यतौर पर बरसात को छोड़कर प्रत्येक 15 दिन के अंतर पर सिंची करनी चाहिए. इसके अलावा प्रत्येक कटाई के बाद सिंचाई करना आवश्यक है. इससे दोबारा वृध्दि ठीक प्रकार से होती है. बरसात में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए.

फसल-सुरक्षा (Napier Grass Farming)

नेपियर घास में प्रारम्भिक अवस्था में खरपतवार की समस्या पायी जाती है. इस समय फसल की निराई-गुड़ाई करने से यह समस्या हल की जा सकती है. चारे के लिए उगाई गई फसल में प्रायः कीड़े और बीमारियों का विशेष प्रकोप नही होता है. कभी-कभी टिड्ढ़ों का आक्रमण हो सकता है. परन्तु इसके लिए किसी भी प्रकार का रासायनिक उपचार आवश्यक नही है, क्योकि चारे को बार-बार काटकर खिलाना होता है.

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कटाई प्रबन्धन  

बुवाई के 75 से 80 दिनों के बाद कटाई करना उपयुक्त हो जाता है. इस समय पौधे की ऊंचाई 1.25 से 1.5 मीटर लगभग होती है. इस अवस्था में पौधे अधिक पौष्टिक तथा पाचनशील होता है तथा अच्छी उपज भी मिलती है. पहली कटाई के बाद अन्य कटाई 40 से 45 दिन के अंदर कटाई कर लेनी चाहिये. 15 से 20 सेमी० ऊपर से पौधों को काटते है ताकि इसमें पुनः वृध्दि आसानी से हो सके. इस प्रकार 8 से 10 कटाई पौधे में ले सकते है.

उपज 

कटाई संख्या एवं तापमान के अनुसार 1500 से 1800 कुंटल द्वारा हरा चारा प्राप्त कर सकते है. अंतरवर्ती खेती में 1800 से 2800 कुंटल हरा चारा प्राप्त होता है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) का नेपियर घास की खेती (Napier grass farming) से सम्बन्धित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होंगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा नेपियर घास के फायदे से लेकर इसकी उपज तक सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी नेपियर घास की खेती (Napier grass farming) से सम्बन्धित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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