mustard seed cultivation : सरसों की खेती में लगने वाले कीट एवं रोकथाम

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mustard seed cultivation
सरसों में लगने वाले कीट एवं रोकथाम

सरसों की खेती (mustard seed cultivation) में लगने वाले कीट एवं रोकथाम 

 नमस्कार किसान भाईयों, देश की तिलहनी फसलों में सरसों की खेती (mustard seed cultivation) का विशेष स्थान है. इसका रबी फसलों की मुख्य स्थान है. समय-समय पर सरसों की फसल पर कई तरह के कीट हमला करते हैं। इनमें से 4-5 बग आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इन कीड़ों की उचित पहचान करके उचित रोकथाम की जाए। यदि इन कीटों और बीमारियों पर समय रहते काबू पा लिया जाए तो सरसों के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसलिए गाँव किसान (GAON KISAN) आज अपने इस लेख में सरसों की खेती (mustard seed cultivation) के प्रमुख कीटों की जानकारी देगा.

सरसों की खेती (mustard seed cultivation) के प्रमुख कीट 

आरा मक्खी कीट 

वर्तमान में सरसों में चित्रित कीट व माहू कीट का प्रकोप होने की चिंता लगातार बनी हुई है। इसके प्रभाव से पौधों के छोटे-छोटे पौधे पहले तो कीड़ों (काले गिडार और बालों वाली गिडार) से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, गिडार काले रंग के होते हैं जो पत्तियों को किनारों से अलग-अलग छिद्र करते हुए बहुत जल्दी खाते हैं, जिससे गिरी हुई पत्तियाँ बिल्कुल छलनी होकर गिर जाती है.

रोकथाम –  गर्मी के मौसम में खेत की अच्छी प्रकार जुताई करनी चाहिए. इसके अलावा खेत की फसल मे पानी भरने से सूड़िया नष्ट हो जाती हैं। जब फसल में इस कीट का प्रकोप हुआ तो 50 ईसा पूर्व में मैलाथियान प्रस्तुत किया गया। जब इस फसल में कीट का प्रकोप ज्यादा हो तो मेलाथियान 50 ई.सी. की 200 मि.ली. मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करना चाहिए.

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माहूँ कीट 

सरसों में माहूँ यानी चेपा प्रमुख बग है। इस कीट के द्वारा कोमल तनों, पत्तियों, फूलों और नए कैप्सूलों का रस चूसकर वयस्क और युवा पौधे कमजोर होने के साथ-साथ उन्हें नुकसान भी पहुँचाते हैं, साथ ही रस निकालते समय पत्तों पर मधुस्राव भी पैदा करते हैं। इस मधुस्राव पर काले फंगस का प्रकोप होता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया भी बाधित हो जाती है। इस परजीवी का प्रकोप दिसंबर-जनवरी से मार्च तक रहता है और जब आकाश में बादल होते है इसका प्रकोप भी तेजी से होता है।

रोकथाम – सरसों की फसल (10-25 अक्टूबर तक) पर इस कीट का प्रकोप कम होता है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह या जनवरी के पहले सप्ताह में, जहां कीट समूह दिखाई देते हैं, यह पौधों की पत्तियों की क्षति के साथ-साथ शाखाओं के प्रभावित घटकों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कीटनाशकों के अनुपालन में से किसी एक का उपयोग तब करें जब कीट क्षेत्र के 20% पौधों पर या प्रति पौधे औसतन 13-14 कीड़ों पर छिडकाव करना चाहिए. छिडकाव शाम के समय पर ही करना चाहिए. जिससे मधुमक्खियों को नुकसान न हो. सरसों की फसल पर 250 से 500 मि.ली. मेलाथियान 50 ई.सी. को 250 से 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करना चाहिए. यदि आवश्यकता हो तो दूसरा छिड़काव 7 से 10 दिन के अंतराल पर करना उचित होगा.

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चितकबरा कीट 

इस कीट के युवा और बड़े भी पौधों के विभिन्न घटकों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। गंभीर प्रहार की स्थिति में पूरा पौधा सूख जाता है। इसका प्रकोप सरसों की खेती के विस्तार चरण में और कटाई के समय होता है।

रोकथाम – 200 मिली, मैलाथियान 50 ईसी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर 400 मिली मैलाथियान 50 ईसी को 400 लीटर पानी में मिलाकर मार्च में भी स्प्रे करना चाहिए.

मोयला कीट 

इस कीट का प्रकोप मुख्य रूप से सरसों की खेती में नमी और मौसम में बादल छाए रहने के कारण होता है। यह कीट  पीला और काला होने के साथ-साथ पीले रंग का भी होता है. यह पत्तों, फूलो, शाखाओं तथा फलियों का रस को खींचकर पौधे के विभिन्न घटकों को भी परेशान करता है।

रोकथाम – सरसों के इस कीट को नियंत्रित करने के लिए फास्फोमीडोन 85 डब्लू सी की 250 मिलीलीटर या इपीडाक्लोराप्रिड की 500 मिलीलीटर या मैलाथियोन 50 ई० सी० की 1.25 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर एक सप्ताह के अतंराल पर दो छिड़काव करना चाहिए.

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