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Millet cultivation in Hindi | बाजरा की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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Millet cultivation in Hindi
बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) कैसे करे ?

बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) कैसे करे ?

नमस्कार किसान भाईयों, बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) देश के विभिन्न राज्यों राज्यों में की जाती है. यह देश के शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में यह प्रमुख खाद्य है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आज अपने इस लेख के जरिये बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) की पूरी जानकारी अपने देश की भाषा हिंदी में देगा. जिससे किसान भाई इसकी अच्छी उपज प्राप्त कर सके. तो आइये जानते है बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) की पूरी जानकारी-

बाजरा के फायदे (Advantages of millet)

बाजरा में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है. इसका सेवन मानव सेहत के लाभकारी होता है. पौषण की द्रष्टि से इसके दाने में अपेक्षाकृत अधिक प्रोटीन (10.5 से 15.5 प्रतिशत) और वसा (4 से 8 प्रतिशत) मिलती है. वही कार्बोहाइड्रेट, खनिज तत्व, कैल्शियम, कैरोटिन, राइबोफ्लेयिन (विटामिन बी-2) और नायसिन (विटामिन बी-6) प्रचुर मात्रा में पाए जाते है. गेहूं और चावल की अपेक्षा बाजरे में अधिक लौह तत्व पाए जाते है. अधिक ऊर्जा होने के कारण बाजरे को सर्दियों के मौसम में खाने में अधिक प्रयोग किया जाता है. बाजरे में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और खनिज लवण उपयुक्त मात्रा में एवं हाइड्रोरासायनिक अम्ल सुरक्षित मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा बाजरे से पशुओं को पौष्टिक चारा भी प्राप्त होता है.

बाजरे की उत्पत्ति एवं क्षेत्र (Origin and area of millet)

बाजरे का वैज्ञानिक नाम पेनिसिटम टाईफाॅइडिस (Penisitum typhoidis) है. यह पोएसी (Poaceae) कुल का पौधा है. इसकी उत्पत्ति मूल अफ्रीका को माना गया है. भारत में भी इसकी खेती राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों में की जाती है. भारत में सर्वाधिक बाजरा राजस्थान राज्य में उगाया जाता है.

बाजरे के जलवायु एवं भूमि (Climate and land for millet)

बाजरा की खेती के लिए गर्म जलवायु उपयुक्त होती है. इसकी अच्छी उपज के लिए 32 से 37 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम होता है. इसके अलावा कम वर्षा वाले स्थानों के लिए यह एक अच्छी फसल है. 40 से 50 सेमी० वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती सफलता पूर्वक की जा सकती है.

बाजरे की खेती लगभग सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है. परन्तु इसके लिए हल्की या दोमट बलुई मिट्टी सर्वोत्तम होती है. इसके यह धयान रखे भूमि से जल निकास का उचित प्रबन्ध होना चाहिए.

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बाजरे की उन्नत किस्में (Advanced varieties of millet)

बाजरे की अच्छी उपज के लिए उन्नतशील प्रजातियों का शुध्द बीज बोना चाहिए. बुवाई के समय एवं क्षेत्र की अनुकूलता के अनुसार प्रजाति का चयन करना चाहिए.

पूसा की उन्नत प्रजातियों में पूसा 605, पूसा 415, एच०एच०वी० 234, एच०एच०वी० 226, एच०एच०वी० 223, एच०एच०वी० 216, एच०एच०वी० 197, आर०एच०वी० 177, आर०एच०वी० 173, आर०एच०वी० 154, आर०एच०वी० 121, सी०जेड०पी० 9802, राज 171, डब्ल्यू०सी०सी० 75, पूसा 443, आर०एच०वी० 58, आर०एच०बी 30, आर०एच०बी 90, पूसा कंपोजिट 443, पूसा कंपोजिट 613 आदि प्रमुख है.

बाजरे के लिए खेत की तैयारी (Field preparation for millet)

बाजरे की अच्छी उपज के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा अन्य 2 से 3 जुताइयाँ देशी हल या कल्टीवेटर से करके खेत तैयार कर लेना चाहिए. इसके अलावा जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाये जिससे मिट्टी भुरभुरी और समतल हो जाए. भूमि से जल निकास का उचित प्रबंध करना चाहिए.

बाजरे की बुवाई का समय एवं विधि (Time and method of sowing millet)

बाजरे की बुवाई के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. बारानी अथवा असिंचित क्षेत्रों में मानसून की पहली वर्षा के बाद खेत में पर्याप्त नमी नमी होने पर बुवाई करनी चाहिए. इसके लिए मध्य जुलाई से अगस्त के मध्य तक बुवाई संपन्न कर लेनी चाहिए.

बुवाई के लिए बाजारों के दानों को 50 सेमी० की दूरी पर तथा पौधे से पौधे की दूरी 12 से 15 रखे एवं 4 सेमी० गहरे कूंड में हल के पीछे करनी चाहिए.

बीज की मात्रा एवं बीजोपचार (Seed quantity and seed treatment)

बाजरे की बुवाई के लिए बीज के दानों का भार एवं पौधो की संख्या प्रति हेक्टेयर पर निर्भर करती है. बाजरे की फसल में बीज की मात्रा 4 से 5 किलो प्रति हेक्टेयर प्रयोग की जाती है.

भूमि एवं बीज जनित बीमारियों से एवं कीटों से बचाव के लिए बीज उपचारित करना आवश्यक है. इसके लिए बीज को बुवाई से पूर्व 2.50 ग्राम थीरम से प्रति किलों बीज की दर से उपचारित करना चाहिए.

बाजरे के लिए खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and fertilizers for millet)

बाजरे की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक का प्रयोग मृदा परिक्षण के आनुसार करनी चाहिए. खेत की तैयारी की पहली जुताई के समय खेत में 8 से 10 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर की दर से डाल देनी चाहिए.

इसके अलावा सिंचित क्षेत्रो के लिए 80 से 100 किग्रा० नत्रजन, 40 से 50 किग्रा० फास्फोरस एवं 40 से 50 किग्रा० पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जाता है. सामान्यतः नत्रजन की आधी मात्रा एवं पोटाश और फास्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय खेत में डालनी चाहिए. नत्रजन की बाकी बची हुई शेष मात्रा दो भागों में बुवाई के 3 सप्ताह एवं 5 सप्ताह बाद प्रयोग करना चाहिए.

असिंचित क्षेत्रों में जहाँ पर कम वर्षा होती है वहां नत्रजन 30 से 40 किग्रा०, फास्फोरस 25 किग्रा० एवं पोटाश 25 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए.

बाजरे में सिंचाई (Irrigation in millet)

बाजार की फसल की अच्छी बढवार के लिए खेत में उचित नमी का होना आवश्यक है. इससे दानों का विकास अच्छा होता है. इसकी खरीफ फसल की बुवाई होने के कारण वर्षा का पानी ही उसके लिए पर्याप्त होता है. लेकिन बारिश न होने के दशा में इसको एक या दो सिंचाइयों की जरुरत होती है.

बाजरे में खरपतवार नियंत्रण (Weed control in millet)

बाजरे की अच्छी पैदावार के लिए समय से खरपतवार नियंत्रण अति आवश्यक है. अन्यथा इसकी उपज में बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है. बुवाई के बाद 30 दिन तक खरपतवार मुक्त रखना चाहिए. इसके लिए शुरुवात में बुवाई के 15 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए. इसे 15 दिन बाद फिर दुहराए. अधिक खरपतवार होने पर एट्राजीन 0.5 किग्रा० सक्रीय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के तुरंत बाद अथवा 1 से 2 दिन बाद 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

बाजरे की कटाई (Millet harvest)

बाजरे की फसल की कटाई फसल पकने पर ही करनी चाहिए. जब पौधे की पत्तियां पीले रंग की एवं सूखी दिखाई देती है. फसल पकने के समय दाने गहरे काले रंग के हो जाते है. बाजरे की फसल 75 से 80 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. बाजरे की कटाई में सबसे पहले बालियाँ काटी जाती है. बाद में पौधे को काटकर सुखा लिया जाता है.

बाजरे की उपज एवं भण्डारण (Market yield and storage)

बाजरे की उन्नत किस्में और बेहतर कृषि सस्य क्रियाएं अपनाने से 20 से 35 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज ली जा सकती है.

बाजरे की बालियों  को अच्छी तरह सुखाकर मड़ाई कर दानों को अलग कर लिया जाता है. इन दानों को अच्छी तरह धूप में सुखा लिया जाता है. इन दानों का भंडारण के समय दानों में नमी की मात्रा 12 से 14 प्रतिशत होना चाहिए. इसकों ऐसे स्थान पर भंडारण कर रखे जहाँ नमी मुक्त वातावरण हो.

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बाजरे के कीट एवं रोग प्रबन्धन (Pest and disease management of millet)

प्रमुख कीट एवं प्रबन्धन (Major Pests and Management)

दीमक – यह कीट बाजरे की खड़ी फसल के पौधों की जड़े खाकर नुकसान पहुंचती है.

रोकथाम – इसकी रोकथाम के लिए सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए.

सूत्रकृमि –  यह कीट भी बाजरे की फसल को काफी हानि पहुंचता है. जिससे उपज कम हो जाती है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए बुवाई के एक सप्ताह पूर्व खेत में 30 से 35 किलों कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी० जी० प्रति हेक्टेयर मिलाकर फैला डे.

तना छेदक कीट – यह बाजरे के पौधे एवं फसल को काफी नुकसान पहुंचता है.

रोकथाम – इस कीट की रोकथाम के लिए कार्बोफ्यूरान 3 जी 20 किग्रा० अथवा फोरेट 10 प्रतिशत सी० जी० को 500 से 600 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करवाएं.

प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन (Major Diseases and Management)

बाजरे का हरित बाली रोग – इस रोग से बाजरा की बालियाँ टेढ़ी-मेढ़ी हरी-हरी पत्तियां सी बन जाती है. जिससे पूरी बाली झाड़ू की तरह दिखाई देती है.

रोकथाम – खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए. फसल चक्र अपनाना चाहिये. फसल एवं खरपतवारों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए. रोग के लक्षण दिखाई देते ही कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर 10 दिन के अन्त्राल्पर दो छिड़काव करना चाहिए.

बाजरे का कंडुआ रोग – इस रोग से बीज के आकार में बड़े गोल अंडाकार हरे रंग के होते है. जिससे काला चूर्ण भरा होता है.

रोकथाम – खेत की गहरी जुताई करे. सिंचाई का समुचित प्रबंध होना चाहिए. रोग ग्रसित बालियों को नष्ट कर देना चाहिये. बीजोपचार जरुर करे. इसके अलावा जीरम 80 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० 2.0 किग्रा० को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए.

निष्कर्ष (The conclusion)

किसान भाईयों उमीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) से सम्बंधित इस लेख से सभी जानकारियां मिल पायी होंगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा बाजरा के फायदे से लेकर बाजरा के कीट एवं रोग प्रबन्धन तक की सभी जानकारियां दी गयी है. फिर भी बाजरा की खेती (Millet cultivation in Hindi) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट कर पूछ सकते है. इसके अलावा गाँव किसान (Gaon Kisan) का यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये. महान कृपा होगी.

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

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