Medicinal plants cultivation : किसान भाई इन 5 औषधीय पौधों की खेती कर कमा सकते है कम लागत में अधिक मुनाफा

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Medicinal plants
इन 5 औषधीय पौधों की खेती कर कमा सकते है कम लागत में अधिक मुनाफा

Medicinal plants की खेती कर कमा सकते है करोडो वह भी कम लागत में 

देश के किसान ज्यादातर परम्परागत अनाज फसलों की खेती करते है. जिसमे लागत अधिक लगती है और मुनाफा भी कम मिलाता है. लेकिन अब किसान भाई नई फसलों में औषधीय खेती (medicinal plants) अपना को अपना रहे है. क्योकि इसमें (medicinal plant farming) लागत कम आती है और मुनाफा अधिक मिलता है. वह इसलिए क्योकि इन पौधों की दवा बनने के साथ-साथ अन्य उपयोग किये जाते है. देश-दुनिया में इनकी मांग काफी है. जिससे इनकी अच्छी कीमत भी मिलाती है. इसलिए किसान औषधीय फसलों की खेती (importance of medicinal plants) की तरफ आकर्षित हो रहे है.

अब किसान भाई पहले ज्यादा जागरूक है. वह अब कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की तरफ रुख कर रहे है. लेकिन अब भी बहुत सारे किसान भाई ऐसे है. जिनको इन नयी फसलों की जानकारी नही है. इसलिए गाँव किसान आज अपने इस लेख में पांच औषधीय पौधों की खेती (Medicinal plants cultivation) की जानकारी देगा. तो आइये जानते है औषधीय पौधों की खेती कैसे करे (how to grow medicinal plants) की पूरी जानकारी —

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पांच प्रमुख औषधीय पौधे (Medicinal plants) जिनकी खेती से है अधिक मुनाफा

सतावर (satavar) की खेती 

सतावर की खेती (satavar cultivation) से किसानों को अधिक मुनाफा होगा. आयुर्वेद में शतावर या सतवारी को बहुत ही महत्वपूर्ण पौधा बताया गया है. इसका शाब्दिक अर्थ होता है सौ पत्ते वाला पौधा. इसके पत्तों और डंठलों से कई सारी दवायें बनायी जाती है. इसकी खेती से एक बीघा में लगभग 4 कुंटल सूखी सतावर प्राप्त हो जाती है. जिसकी बाजार की कीमत लगभग 40,000 रुपये तक होती है. इस प्रकार एक एकड़ इसकी खेती कर 5 से 6 लाख रुपये किसान भाई आराम से कमा सकते है.

सहजन (Drumstick) की खेती 

सहजन की खेती (Drumstick farming) से लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है. इसका इस्तेमाल सब्जी से लेकर दवायें बनाने तक में किया जाता है. आयुर्वेद में इसके पत्ते, छाल और जड़ के तक के उपयोग बताये गए है. इसकी एक हेक्टेयर की खेती में केवल 50 हजार रुपये तक का खर्चा आता है. और कई वर्षों तक लाखों की कमाई लि जा सकती है. किसान भाई इसे बंजर और बाढ़ वाली जमीन पर भी लगा सकते है.

अकरकरा (Anacyclus Pyrethrum) की खेती 

अकरकरा की खेती (Anacyclus Pyrethrum cutivation) से अधिक लाभ प्राप्त होता है. यह कम समय में तैयार हो जाती है. आयुर्वेद में इसके डंठल का उपयोग दवा के रूप में क्या जाता है. बाजार में इसके डंठल और बीज की काफी ज्यादा मांग रहती है. बाजार में इसके बीजों की कीमत 10 हजार रुपये प्रति कुंटल तक रहती है. तथा जड़े 20 हजार प्रति कुंटल तक बिक जाती है. एक एकड़ खेत में डेढ़ से दो कुंटल तक बीज और 8 से 10 कुंटल जड़े प्राप्त हो जाती है.

अश्वगंधा (Ashwagandha) की खेती 

अश्वगंधा की खेती (Ashwagandha cutivation) एक झाड़ीदार पौधे के रूप में की जाती है. इसके फल, बीज और छल के उपयोग से कई दवाएं बनती है. इसकी जड़ से अश्व जैसी गंध आने के कारन इसे अश्वगंधा कहा जाता है. बाजर में इसकी काफी मांग रहती है. जिस कारण बाजार में इसकी कीमत काफी अच्छी मिलती है. एक हेक्टेयर खेत से लगभग 6 से 8 कुंटल सूखी जड़ अश्वगंधा प्राप्त हो जाती है. तथा लगभग 50 किलो बीज प्राप्त हो जाता है.

लेमनग्रास (Lemon Grass) की खेती 

लेमन ग्रास की खेती (Lemon grass cultivation) एक औषधीय पौधे (medicinal plants) के रूप में की जाती है. बोलचाल की भाषा में इसे नीबू घास कहा जाता है. इसकी फसल को पशु खाना नही पसंद करते है. एक बार इसकी फसल लगाने से कई साल तक उपज देती है. एक हेक्टेयर में लगभग 100 टन हरी घास प्राप्त हो जाती है. जिससे 500 किलोग्राम तेल पाप्त हो जाता है. बाजार में इस तेल की कीमत लगभग 1200 रुपये प्रति किलोग्राम तक आसानी से मिल जाता है.एक साल की पैदावार से प्राप्त तेल से किसान भाई लगभग 3 से 4 लाख रुपये मुनाफा कम सकते है.

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अन्य पूछे जाने वाले प्रश्न (Other FAQ)

प्रश्न : औषधीय फसल कौन कौन सी है?

उत्तर : औषधीय फसलों में मुख्य रूप से आंवला, अशोक, अश्वगंधा, अतिस, बेल, भू आमलकी, ब्राह्मी, चिरायता, गिलोय, गुड़मार, गूगल, ग्वारपाठा, ईसबगोल, कलिहारी, कालमेघ, कटुका, मकोय, मुलेठी, सफेद मूसली, पत्थर चूर, पीपली, सर्पगंधा, सताय, शतावरी, तुलसी, वायविडंग, वत्सनाभ, सदाबहार, रतनजोत, लेमनग्रास, निगुंडी, मेहंदी, चित्रक सफेद, वांसा, शिकाकाई, माल कांगनी, हड़जोड़, दमाबेल, बाचची, चंद्रसुर, अमलतास, अर्जुन व अरीठा आदि फासले शामिल हैं।

प्रश्न : आयुर्वेदिक औषधि की खेती कैसे करें?

उत्तर : सर्पगंधा की एक हेक्टेयर की खेती के लिए सर्पगंधा की ताजी जड़ी 100 किलो, अश्वगंधा के लिए लिए प्रति हेक्टेयर 8 से 10 किलो बीज, ब्राम्ही के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलो बीज, कालमेघ के लिए प्रति हेक्टेयर 450 ग्राम बीज, कौंच के लिए प्रति हेक्टेयर नौ से लेकर 10 किलो बीज, सतावरी के लिए प्रति हेक्टेयर तीन किलो बीज, तुलसी के लिए प्रति हेक्टेयर एक किलो बीज, एलोवेरा के लिए प्रति हेक्टेयर पांच हजार पौधे, वच के लिए प्रति हेक्टेयर 74074 तना और आर्टीमीशिया के लिए प्रति हेक्टेयर 50 ग्राम बीज की आश्यकता होती है.

प्रश्न : औषधीय पौधों का क्या महत्व है?

उत्तर : औषधीय पौधों से कफ एवं वात का शमन करने, पीलिया, आँव, हैजा, फेफड़ा, अण्डकोष, तंत्रिका विकार, दीपन, पाचन, उन्माद, रक्त शोधक, ज्वर नाशक, स्मृति एवं बुद्घि का विकास करने, मधुमेह, मलेरिया एवं बलवर्धक, त्वचा रोगों एवं ज्वर आदि रोग में काफी फायदेमंद होते हैं।

प्रश्न : सबसे शक्तिशाली जड़ी बूटी कौन सी है?

उत्तर : नीम और हल्दी हर दिन प्रकृति माँ से मिले इन अद्भुत उपहारों की एक चुटकी निगलने से हमें कुछ ज़बरदस्त लाभ मिल सकते हैं। यह सद्गुरु द्वारा बताया गया है.

प्रश्न : औषधियों का राजा कौन है?

उत्तर : हरड़ को आयुर्वेद में हरितकी नाम से जाना जाता है और इसे औषधियों का राजा कहा जाता है.

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