सर्दियों में उगाई जाने वाली हरी मटर की खेती में किसान भाई रखे, इन बातों का ध्यान, तो होगी अच्छी कमाई

0
Management of diseases in green pea
हरी मटर की खेती में ध्यान रखने वाली बातें

हरी मटर की खेती में ध्यान रखने वाली बातें

देश में इस समय रबी फसलों का दौर चल रहा है. जिसमें गेहूं के अलावा तिलहनी, दलहनी फसलों की खेती भी की जाती है. इन्हीं दलहनी फसलों में से हरी मटर की खेती मुख्य रूप से की जाती है. जिससे किसान भाई 4 से 5 महीनो में अच्छी कमाई कर लेते हैं. लेकिन कभी-कभी लेकिन कभी-कभी लापरवाहियों की वजह से किसान भाइयों को इसकी खेती में नुकसान उठाना पड़ता है.

हरी मटर को सब्जी के रूप में अधिक उपयोग किया जाता है. इसीलिए इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है. लेकिन इसकी खेती में किसान भाई अधिक सतर्क रहना पड़ता है, क्योंकि यह बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील पाई जाती है. सर्दियों के मौसम में यह बीमारियां इसकी वृद्धि और उपज को काफी हद तक प्रभावित करती हैं. इसीलिए किसान भाई इनकी अच्छी उपज के लिए इसमें लगने वाले रोगों का प्रबंधन जरूर करना चाहिए. भारतीय कृषि अनुसंधान द्वारा इसकी खेती के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं जो निम्नवत हैं-

हरी मटर की खेती में रोगों का प्रबंध

किसान भाई हरी मटर की खेती में अच्छी उपज लेकर लाभ कमाना चाहते हैं तो उन्हें निम्न रोगों से अपनी फसलों का बचाव करना पड़ेगा.

यह भी पढ़े : किसान सम्मान निधि की किस्त बढ़ाने को लेकर कृषि मंत्री ने दी बड़ी जानकारी, जानिए क्या बताया उन्होंने

पाउडरी मिल्ड्यू फफूंदी रोग

मटर की खेती में यह रोग लग जाने से पौधे की पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसे धब्बे बन जाते .हैं वही पौधे का विकास भी रुक जाता है. किसान भाई इसके प्रबंधन के लिए सबसे पहले प्रतिरोधी किस्म का चुनाव करके ही बुवाई करें. इसके अलावा बुवाई के समय इस बात का ध्यान रखें की हवा संचार के लिए पौधों के बीच उचित दूरी रखें. इसके अलावा खेत में रोग दिखाई पड़ने पर सल्फर फफूंद नाशकों का उपयोग इस रोग के बचाव में करना चाहिए.

मटर का डाउनी मिल्ड्यू रोग

मटर के पौधों पर इस रोग का प्रकोप होने से पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीलापन आ जाता है. एवं निचली सतह पर बैंगनी रंग का मलिन किरण दिखाई पड़ती है. किसान भाई इस रोग से बचाव के लिए भी मटर की उन किस्म का चुनाव करें, जो रोग प्रतिरोधी हो. इसके अलावा सही सिंचाई पद्धति को अपनाना इस रोग के लिए काफी जरूरी होता है. रोग का संचार होने पर फफूंद नाशकों का प्रयोग जरूर करें.

मटर के फ्यूजेरियम विल्ट रोग से करे बचाव  

मटर की खेती में जब यह रोग लग जाता है तो मटर के पौधे की पत्तियां मुरझा जात है. इसके अलावा निचली पीली पड़ने के साथ इसमें संवहनी मलिनकिरण होता है. इस रोग से बचाव के लिए सबसे पहले किसान भाईयो को रोग प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव करना चाहिए. इसके अलावा उचित फसल चक्र अपनाना चाहिए.

एस्कोकाइटा ब्लाइट रोग से फसलों का बचाव 

मटर की खेती के इस रोग से पौधे की पत्तियों पर गाढा छल्ले के साथ काले घाव बन जाते है. जिससे पौधे की पत्तियां गिरने लगती है. किसान इस रोग से बचाव के लिए फसल चक्र के साथ बीजोपचार करना जरुरी होता है. इसके अलावा रोग का प्रकोप होने पर फफूंदनाशकों का उपयोग करना चाहिए.

जड़ सडन रोग से करे बचाव 

मटर के इस रोग के प्रकोप से जड़ों में भूरे रंग के घाव बन जाने के साथ-साथ पौधा मुरझा जाता है. किसान भाई इसके प्रबंधन के लिए मटर खेती जल निकास वाले क्षेत्र में करनी चाहिए. इसके अलावा रोग के प्रकाप को देखते हुए फफूंदनाशकों का प्रयोग करे.

एफिड संक्रमण से करे बचाव 

मटर की खेती में एफिड संक्रमण की वजह से पौधे की पत्तियां मुड़ जाती है. तथा पौधे का विकास रुक जाता है. इसमें शहद जैसा स्राव होता है. किसान भाई कीट से बचाव के लिए एफिड को खाने वाले प्राकृतिक शिकारियों को बढ़ावा देना चाहिए. इसके अलावा कीटनाशक साबुन के उपयोग से इसके संक्रमण से बचा जा सकता है.

मटर एनेशन मोजेक वायरस करे बचाव

इस वायरस के फैलने से पौधों का विकास रुक जाता है. पत्तियों पर मोजैक वायरस के लक्षण दिखाई पड़ते है. इसके लिए किसान भाई वायरस से रहित बीजों का उपयोग करना चाहिए. संक्रमित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए.

यह भी पढ़े : मुर्गी पालक किसानों के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन, अब मुर्गी पालन के लिए इन नियमों को अपनाएंगे मुर्गी पालक किसान

सर्दियों के इस मौसम में किसान भाई रोगों से बचाव के लिए रखे इस बातों का ध्यान 

  • रोगों से बचाव के लिए किसान भाईयों को फसल चक्र अपनाना चाहिए. इससे रोगों का चक्र एवं मिट्टी जनित रोगजनको से बचाव होता है.
  • बुवाई के समय पौधे के बीच उचित दूरी रखनी चाहिए. इससे वायु संचार अच्छी तरह से होता है. इससे पत्ते सम्बन्धी बीमारियां कम होती है.
  • बुवाई से पहले बीजों को उपचारित करना चाहिए. इससे मृदा जनित रोगों से बचाव होता है.
  • फसल की सही समय पर सिंचाई करने से रोगों की आशंका कम हो जाती है.
  • भूमि से जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए.
  • मिट्टी से होने वाले रोगों से बचाव के लिए गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई कर ऐसे छोड़ देना चाहिए. जिससे बी अच्छी तरह से धुप लग जाए.
  • एफिड तथा अन्य कीटों से बचाव के लिए प्राकृतिक शिकारियों एवं उचित कल्चरों का उपयोग करना चाहिए.
  • मटर की खेती में फसल को वायरल जनित रोगों से बचाने के लिए मटर की फसल की कटाई सही समय पर करना चाहिए.
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here