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Mahogany Cultivation | महोगनी की खेती | Mahogany tree farming

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Mahogany Cultivation
Mahogany Cultivation | महोगनी की खेती

Mahogany Cultivation | महोगनी की खेती

महोगनी के पौधे (Mahogany tree) की लकड़ी व्यापारिक द्रष्टि से बहुत ही कीमती होती है. यह सीधी-दानेदार, लाल-भूरे रंग की इमारिती लकड़ी है. इसके पेड़ के सभी भागों का इस्तेमाल किसी न किसी रूप में किया जाता है.

देश के किसान अब हर दिन नए प्रयोग कर परम्परागत खेती में बड़ा बदलाव ला रहे है. ऐसे में अब अपने बगीचे में महोगनी के पेड़ लगाकर  अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. तो आइये जानते है महोगनी की खेती (Mahogany tree in hindi) की पूरी जानकारी –

महोगनी के फायदे (benefits of mahogany)

महोगनी के पेड़ सम्पूर्ण भाग का उपयोग किया जाता है. इसकी पत्तियों में खास तरह का गुण होता है. जिससे इस पेड़ के पास कीट और मच्छर नही आते है. इसलिए इसकी इसके पेड़ से प्राप्त तेल से मच्छर और कीटनाशक दवाये बनाने के काम में लिया जाता है. इसके अलावा इसका उपयोग साबुन, पेंट (Mahogany color), वार्निस और भी कई प्रकार की दवाइयाँ को बनाने में किया जाता है.

इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयां बनाने में किया जाता है. दवाइयां बनाने में इसके पत्तों का भी उपयोग किया जाता है. इससे  मुख्य रूप से कैंसर, ब्लडप्रेशर, अस्थमा, सर्दी और मधुमेह सहित कई रोगों के लिए दवाइयां बनाई जाती है.

इसके अलावा इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजे और मूर्तियों को बनाने में किया जाता है.

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महोगनी की उत्पति एवं क्षेत्र (Origin and area of mahogany)

महोगनी (Mahogany) जीनस स्वेतेनिया की उष्णकटिबंधीय दृढ लकड़ी है. यह एक पर्णपाती वृक्ष है. महोगनी का वैज्ञानिक नाम स्वेतेनिया मैक्रोफिला (Swietenia macrophylla) है. यह मिलिएसी (Meliaceae) कुल का पौधा है. यह दक्षिण अमेरिका और डोमिनिकन गणराज्य का राष्ट्रीय वृक्ष है. इसका साधारण नाम स्वेतेनिया, स्वेतेनिया महोगनी, अमेरिकी महोगनी, बड़े पत्ते वाली महोगनी, छोटे-छोटे पत्तों वाली महोगनी है.

भारत में महोगनी की खेती बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, और पंजाब आदि राज्यों में की जाती है.

इसका वृक्ष उन स्थानों में उगाया जाता है. जहाँ तेज हवाओं का प्रकोप कम होता है. इसके पेड़ की लम्बाई 40 से 200 फीट तक होती है. लेकिन भारत में 40 से 60 फीट तक के वृक्ष होते है. इसके वृक्ष की जड़े ज्यादा गहराई नही होती है. भारत में पहाड़ी/बर्फीले क्षेत्रों को छोड़कर किसी भी स्थान में उगाये जा सकते है.

उपयुक्त जलवायु एवं मिट्टी (Suitable climate and soil)

महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को कम बारिश में उगाया जा सकता है. सामान्य मौसम इसके वृक्ष के लिए अच्छा होता है. अधिक गर्मी और अधिक सर्दी इसके वृक्ष के लिए उपयुक्त नही होता है. तेज हवाओं से इसके वृक्ष को बचाना पड़ता है. पाला भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नही होता है. इसकी खेती के लिए 15 से 40 डिग्री तक का तापमान अच्छा रहता है.

इसकी खेती के लिए पथरीली मिट्टी को छोड़कर सभी मिट्टियों में की जा सकती है. भूमि का पी० एच० मान सामान्य होना चाहिए. इसके अलावा भूमि में जलभराव नही होना चाहिए. जलभराव इसकी खेती के लिए नुक्सान दायक हो सकती है.

महोगनी की उन्नत किस्में (improved varieties of mahogany)

महोगनी की उन्नत किस्मों में इन्डियन महोगनी, अफ्रीकन महोगनी, क्यूबन, होंडुरन, मेक्सिकन आदि प्रमुख है.

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खेत की तैयारी (farm preparation)

महोगनी की खेती के लिए खेत की दो तीन बार अच्छी प्रकार जुताई करके छोड़ दे. जुताई के बाद खेत में पाटा लगाकर समतल कर लेना चाहिए. जिससे खेत म जलभराव की स्थिति न आये.

इसके उपरांत खेत में 9 से 10 फीट की दूरी रखते हुए 2 फीट चौड़ाई और 2 फीट गहराई रखते हुए इनको पंक्तियों में खुदाई कर लेनी चाहिए. खुदाई किये हुए गड्ढो में जैविक और रासायनिक खादों को मिट्टी में मिलाकर गड्ढों में भर देना चाहिए. इसके बाद गड्ढों की सिंचाई कर देनी चाहिए. इस बात का ध्यान रखे इस गड्ढों को पौध रोपण के एक महीने पहले तैयार कर लेना चाहिए.

पौधा लगाने का समय और तरीका (Planting time and method)

महोगनी का पौधा लगाने का उचित समय जून से जुलाई तक सबसे उपयुक्त माना जाता है. पौधा लगाते समय इस बात का ध्यान रखे पौधा स्वस्थ और निरोग होना चाहिए. और उसकी उम्र लगभग दो साल की होनी चाहिए.

पौधों को खेत में पहले से तैयार गड्ढों में लगाना चाहिए. पहले तैयार गड्ढों के बीचोबीच एक गड्ढा तैयार कर लेना चाहिए. इस तेयार छोटे गड्ढे में पौधा लगाकर मिट्टी को चारों तरफ से दबा देना चाहिए.

उर्वरक की मात्रा (amount of fertilizer)

महोगनी के वृक्षों को अन्य वृक्षों वृक्षों की तरह खाद एवं उर्वरक की जरुरत होती है. इसके लिए पौधों को लगाते समय 20 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद और 80 ग्राम एन० पी० के० प्रति पौधे के दर से मिट्टी में मिलाकर देना फायदेमंद होता है. खाद की यह मात्रा पौधे को चार साल तक देनी चाहिए. चार साल के उपरांत खाद की इस मात्रा को बढ़ा देना चाहिए. एक पूर्ण विकसित पेड़ को 25 किलो जैविक और एक किलो रासायनिक खाद की मात्रा साल में तीन बार सिंचाई के पहले देनी चाहिए.

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सिंचाई (irrigation)

महोगनी के पौधे को लगाने के तुरंत बाद सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. मानसून के दौरान पौधों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है. बारिश न होने पर गर्मी के दिनों में 1 से 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. वही सर्दियों के मौसम में 7 से 15 दिन दिन के सिंचाई करनी चाहिए. एक बार में एक पेड़ को 5 से 7 लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है.

खरपतवार नियंत्रण (weed control)

महोगनी की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है. खरपतवार नियंत्रण से पौधा का अच्छा विकास होता है. इसके लिए 2 से 3 गुड़ाई करना पर्याप्त होता है.

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कीट, रोग एवं नियंत्रण (Pests, Diseases and Control)

महोगनी के पौधों में किसी तरह का रोग का प्रकोप नही होता है. क्योकि इसकी पत्तियों से कीटनाशक दवाएं बनायी जाती है. लेकिन जलभराव की स्थिति में तना गलन रोग लग जाता है. इससे बचाव के लिए जलभराव से पौधों को बचाना चाहिए. अगर पौधे में दीमक का प्रकोप होता है तो दीमक रोधी दवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए.

कटाई का उचित समय (proper harvesting time)

महोगनी का एक वृक्ष 12 से 15 साल में कटाने लायक हो जाता है. इसकी कटाई वृक्ष पूर्ण तैयार होने पर पर की जानी चाहिये. इसके पेड़ की कटाई जड़ के पास की जानी चाहिए.

उपज एवं लाभ (yield and profit)

महोगनी के एक पूर्ण विकसित पेड़ लगभग 2000 से 2200 क्यूब फीट तक का हो जाता है. एक एकड़ में 13 से 15 साल में तैयार पेड़ों से करोड़ों रुपये की कमाई की जा सकती है. इसकी लकड़ी के अलावा बीज और पत्तियों की भी बहुत ज्यादा कीमत होती है.

अन्य पूछे जाने वाले सवाल (FQA)

प्रश्न : महोगनी का पेड़ कहाँ मिलेगा?

उत्तर : महोगनी का पौधा आप ऑनलाइन मंगा सकते है. इसके अलावा आप नजदीकी उद्यान विभाग में भी जानकारी ले साकते है.

प्रश्न : महोगनी के बीज कहाँ मिलेंगे?
उत्तर : महोगनी का बीज आप अमेजन से ऑनलाइन मंगा सकते है.

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