मधुमक्खी पालन के व्यासाय में लाखों का फायदा, बस किसान भाई इसको जान ले

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मधुमक्खी पालन में किसान कर सकते है मोटी कमाई

मधुमक्खी पालन में किसान कर सकते है मोटी कमाई

मधुमक्खी पालन एक कृषि आधारित लघु व्यवसाय है. जिसको देश के खेतिहर किसान, श्रमिक, महिलाएं, भूमिहीन किसान और बेरोजगार युवा कम समय एवं कम लागत में अन्य घरेलू व्यवसाय की तुलना में अच्छा मुनाफा कमा सकते है.

वही अगर मधुमक्खी पालन के बारे में बात की जाय तो यह खेती से जुड़ा एक व्यवसाय है. देश की विविध कृषि जलवायु परिस्थियों में मधुमक्खी पालन के लिए पर्याप्त संभावनाएं नजर आती है. किसान भाइयों को मधुमक्खी पालन करने के लिए कुछ अलग से करने की कुछ जरुरत नही होती है. इसको खेती के साथ-साथ आसानी से किया जा सकती है. मधुमक्खी पालन करने के लिए कुछ खास बातो का ध्यान रखना होता है तो आइये उन खास बातों को विस्तार से –

आइये सबसे पहले जाने मधुमक्खियों के बारे में

जंगली मधुमक्खियों की पूरे विश्व में लगभग 20,000 से अधिक प्रजातियाँ पायी जाती है. यह एक सामाजिक कीट होते है. जो फूलों से शहद का एकत्रित करके परिवार का भरण-पोषण करती है. यह कीट हाइमेनोप्टेरा गन के एपिस वंश के अंतर्गत आता है.

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भारतवर्ष में तीन तरह की मधुमक्खियाँ पायी जाती है. पहली भारतीय मधुमक्खी जिसे एपिस इण्डिका कहा जाता है. दूसरी चट्टानी मधुमक्खी जिसे एपिस डोस्रोटा कहा जाता है. वही तीसरी छोटी मधुमक्खी को एपिस फ्लोरिया कहा जाता है.

इसके अलावा एक विदेशी मधुमक्खी एपिस मेलिफेरा है. जिसे इटालियन या यूरोपियन मधुमक्खी भी कहा जाता है. जोकि अब भारत में पूर्णरूप से स्थापित हो चुकी है. वही इसका पूर्ण व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है.

किस स्थान पर करे मधुमक्खी पालन

किसान भाई मधुमक्खी पालन को किसी भी स्थान पर शुरू कर सकते है. लेकिन जिन क्षेत्रों में फूलों, सब्जियों, फूलों की खेती होती है. वहां पर मधुमक्खी पालन ज्यादा फायदेमंद साबित होती है. इसके अलावा मधुमक्खी पालन वाली जगह के समीप साफ़ पानी और ताज़ी हवा का होना जरुरी होता है.

मधुमक्खी पालन के लिए उचित समय

मधुमक्खी पालन के वैसे तो पूरे साल किया जा सकता है. लेकिन साल में दो बार इसका पालन करना लाभकारी साबित होता है. पहला जनवरी से लेकर मार्च तक और दूसरा नवम्बर से लेकर फरवरी तक का सबसे अच्छा होता है.

मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक उपकरण 

मधुमक्खी पालन के लिए मौन गृह (मधु बक्सा) , मधुमक्खियों की कालोनी, स्टैंड, बक्सा औजार, धुँआ दानी (स्मोकर) मुँह रक्षक जाली, दस्ताने, मधु निष्कासन यंत्र, बकछूट (स्वार्मिग), थैला, फीडर पालेन ट्रे, मोमी शीटे, मधुमक्खी अवरोधक जाली, मधु चलनी, चींटी अवरोधक प्यालियाँ आदि उपकरणों की जरुरत पड़ती है.

देश किस तरह की मधुमक्खियों का होता है पालन 

देश में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के लिए चार तरह की मधुमक्खियाँ पाली जाती है –

1 – एपिस मेलीफेरा 2- एपिस इंडिका 3- एपिस डोरसाला 4 – एपिस प्लोरिया 

लेकिन देश के ज्यादातर मधुमक्खी पालन किसान एपिस मेलिफेरा का पालन अधिक करते है. क्योकि यह अधिक उत्पादन देने वाली मधुमक्क्खियाँ होती है.यह स्वभाव से भी काफी शांत होती है. इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है. इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है.

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कैसे शुरू करे मधुमक्खी पालन

इन मधुमक्खियों को कृत्रिम रूप पालने के लिए डिब्बों का उपयोग किया जाता है. जिन्हें मौन गृह कहा जाता है. मौन गृह लकड़ी का एक खास तरह का बक्शा होता है. जिसमें मधुमक्खियों को पाला जाता है. यह सबसे खास उपकरण होता है.

मधुमक्खी पालन के महत्व को देखते हुए कृषि मंत्रालय द्वारा भी इसे बढ़ावा देने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. जिसमें केन्द्रीय सरकार द्वारा वित्तपोषित योजानाएं चलाई जा रही है. जिसमें राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन व शहद मिशन प्रमुख है. इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के समग्र प्रचार व विकास की मीठी क्रांति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह योजना शुरू की जा चुकी है.

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