गेहूं की इस किस्म का उपयोग किया जाता है नूडल, पिज्जा बनाने में, इसीलिए किसान इसकी बुवाई कर कमा सकते है अच्छा मुनाफा

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Kathiya Wheat Cultivation
गेहूं की इस किस्म का उपयोग किया जाता है नूडल, पिज्जा बनाने में

गेहूं की इस किस्म की बुवाई से किसानों को अच्छा मुनाफा

देश के ज्यादातर किसान अब परम्परागत फसलों की खेती के स्थान पर पर अब ऐसी फसलों की खेती कर रहे है. जिससे किसानों को कम समय में ही ज्यादा लाभ हो सके. अभी देश में रबी फसलों की बुवाई का समय है. ऐसे में अधिकतर किसान भाई गेहूं की खेती (Whaet farming in India) करते है. लेकिन आज आप को गेहूं की ऐसी किस्म की जानकारी आप सभी को देने वाले है जिससे फ़ास्ट फ़ूड के निर्माण में उपयोग किया जाता है. गेहूं की इस किस्म का नाम कठिया गेहूं है.

कठिया गेहूं की खेती (Kathiya Wheat Cultivation) किसान भाइयों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है. गेहूं की यह किस्म (Wheat varity) कोई नई नही, बल्कि बहुत है. इसकी खेती देश के काफी लम्बे समय से करते चले आ रहा है. देश में इसकी खेती लगभग 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है. पहले यह उत्तर पश्चिम भारत के पंजाब में इसकी खेती अधिक मात्रा में की जाती थी. उसके उपरांत दक्षिण भारत के कर्नाटक के बाद गुजरात के कठियावाड़ क्षेत्र में की जाती थी.

औद्योगिक उपयोग के लिए उपयोगी कठिया गेहूं

कठिया गेहूं का ज्यादातर उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है. इस गेहूं से सिमोलिना यानि सूजी और रवा का निर्माण किया जाता है. इसके अवाला इससे नूडल, वर्मीसेली, पिज्जा और वर्मीसेली जैसे फ़ास्ट फ़ूड खाद्य पदार्थों का निर्माण में भी इसका उपयोग किया जात है. साथ ही रोग अवरोधी क्षमता होने के कारण इसके निर्यात की अधिक सम्भावना अधिक रहती है.

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कम सिंचाई में भी अधिक पैदावार

कठिया गेहूं की ख़ास बात यह है, इसकी पैदावार के के लिए अधिक सिंचाइयों की जरुरत नही होती है. कम पानियों में भी इसकी अच्छी पैदावार हो जाती है. क्योकि इसकी किस्मों में सूखा प्रतिरोधी क्षमता अधिक होती है. इसकी खेती के लिए केवल 3 सिंचाइयों की जरुरत होती है. जिससे इसकी फसल से लगभग 45 से 50 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ली जा सकती है. वही सूखा वाले क्षेत्रों में जहाँ कम पानी या असिंचित क्षेत्रों में भी 30 से 35 कुंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है.

पोषक तत्वों से भरपूर है ये गेहूं

कठिया गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्व शरबती (एस्टिवम) गेहूं की अपेक्षा अधिक प्रोटीन 1.5 से 2.0 परतिशत अधिक विटामिन ‘ए’ की अधिकता पायी जाती है. इसके अलावा इसमें ग्लूटेन और कैरोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है.

बुवाई के लिए यह समय उचित 

कठिया गेहूं की बुवाई के लिए उचित समय नवम्बर का दूसरा एवं तीसरा समप्ताह सबसे उपयुक्त होता है. वही असिंचित क्षेत्रों में इसकी बुवाई अक्टूबर माह के अन्तं सप्ताह से लेकर नवम्बर महीने के पहले सप्ताह में करना फायदेमंद साबित होता है.

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कटाई को लेकर किसान रखे इस बात का ध्यान

कठिया गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) करने वाले किसान भाई इस बात का ध्यान रखे कि इस गेहूं की झड़ने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए किसान भाइयों को इसकी खेती में फसल पकने से पहले ही इसकी कटाई कर लेनी चाहिए. इसकी खेती में अच्छी उपज के लिए समय पर ही इस गेहूं की बुवाई करना चाहिए. बुवाई के लिए किसान भाईयों को उन्नत किस्मों का चुनाव करना चाहिए. साथ ही बुवाई के समय खेत में उचित नमी होना आवश्यक है.

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