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Introduction of Agriculture | कृषि का परिचय

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कृषि का परिचय

Introduction of Agriculture | कृषि का परिचय

मानव सभ्यता के विकास में कृषि की एक महत्वपूर्ण भूमिका है. औद्योगिक क्रांति से पहले, मानव आबादी का अधिकांश हिस्सा कृषि के कार्य करता था. कृषि तकनीकों के विकास के कारण कृषि की उत्पादकता में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.

कृषि, खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से सम्बंधित है. कृषि के विकास के कारण ही सभ्यताओं का विकास हुआ. इसमें पालतू जानवरों का पालन किया जाता है और पौधों (फसलों) को उगाया जाता है.

कृषि क्या है एक परिचय ? (What is agriculture)

कृषि फसलोत्पादन, फलोत्पादन, पशुपालन व भूमि पर विविध खेती सम्बन्धी उत्पादन हेतु अनन्य प्रकार की क्रियाएं सम्पन्न करने की कला व विज्ञान है.

“पृथ्वी के विभिन्न स्रोतों का इष्टतम एक विशिष्ट उपयोग करने के लिए, मानव द्वारा प्रारम्भिक उद्देश्यों जैसे – भोजन, कपड़ा व ईंधन आदि की पूर्ति के लिए जो क्रियाएं की जाती है, उन्हें कृषि कहते है.”

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मनुष्य ने सर्वप्रथम लगभग 7500 ई०पू० में फसल उगानी शुरू की थी, समय-चक्र के साथ-साथ इस कला का निरंतर विकास किया, जिससे कृषि विज्ञान की नींव पड़ी. मुख्यतः कृषि विज्ञान जीव विज्ञान की एक विशिष्ट शाखा है.

Agriculture’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर हुई है.

Agricuture = Agric (मृदा) + Cultura (कर्षण) अर्थात ‘मृदा का कर्षण’ करना ही कृषि कहलाता है.

कृषि विज्ञान एक कला व विज्ञान दोनों है. इसमें मिट्टी के उपयोग सम्बन्धी सभी मानवीय क्रियाओं का अध्ययन करते है.

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कृषि विज्ञान की विशिष्ट शाखाएं (Branches of Agriculture)

कृषि विज्ञान को निम्न लिखित शाखाओं में बांटा गया है –

  • शस्य विज्ञान – इसमें विशेषतया फसलों एवं मृदा प्रबंध का अध्ययन किया जाता है.
  • पादप रोग विज्ञान – इसके अंतर्गत फसलों में लगने वाले रोग एवं उनकी रोकथाम का अध्ययन किया जाता है.
  • कीट विज्ञान – इसमें फसलों पर लगने वाले कीटों एवं उनकी रोकथाम का अध्ययन किया जाता है.
  • मृदा विज्ञान – इसमें मृदा सम्बन्धी अध्ययन किया जाता है.
  • उद्यान विज्ञान – इसके अंतर्गत फलों, सब्जियों व पुष्पों का अध्ययन किया जाता है.
  • पादप आनुवंशिकी – इसमें पादप प्रजनन व नई प्रजातियों के विकास सम्बन्धी अध्ययन किया जाता है.
  • पादप दैहिकी – इसके अंतर्गत पौधों के होने वाली दैहिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है.
  • कृषि अभियंत्रण – इसमें कृषि कार्यों में उपयोग होने वाली मशीनों तथा कल-पुर्जों का अध्ययन किया जाता है.
  • मृदा संरक्षण – इसमें मृदा की उर्वराशक्ति के, मृदा, अपरदन आदि से नष्ट होने से बचाने तथा मृदा की उर्वराशक्ति में वृध्दि के उपायों का गहन अध्ययन किया जाता है.

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