गेहूं में खरपतवार की समस्या का प्रबंधन कैसे करें?

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weed problem in wheat
गेहूं में खरपतवार समस्या का प्रबंधन

गेहूं में खरपतवार समस्या का प्रबंधन

देश में गेहूं भोजन की एक प्रमुख खाद्य फसल है. जो चावल के बाद दूसरे नंबर की  खाद्यान्न फसल है. संपूर्ण खाद्यान्न का लगभग 34 प्रतिशत भाग गेहूं द्वारा पूरा किया जाता है.

गेहूं और धान खाद्यान्न की ऐसी फसलें हैं. जिनमें गरीबी और भुखमरी की समस्या से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है. ऐसे समय में गेहूं की वर्तमान में उत्पादन स्तर में 20% वृद्धि दर से उत्पादन बढ़कर 109 मिलियन टन गेहूं की आवश्यकता से खाद्यान्न पूर्ति हो सकती हैं.

देश में गेहूं की वर्तमान औसत उत्पादन क्षमता 3.14 टन प्रति हेक्टेयर है. जबकि औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 3.5 टन की दर से लक्ष्य की पूर्ति हो सकती है. अतः इस लक्ष्य को पाना तभी संभव है. जब उर्वरक, पानी आदि संसाधनों को वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार अपनाने के साथ-साथ फसल को खरपतवार की रोग आदि व्याधियों से बचाया जा सके. तो आइए जानते हैं गेहूं की फसल को खरपतवार की हानियों से कैसे बचाएं –

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गेहूं की फसल में खरपतवारों से हानियां

गेहूं की फसल में खरपतवारों की रोकथान न होने से इसका असर इसकी उपज पर पड़ती है. क्योंकि खरपतवार गेहूं में दी जाने वाली पोषक तत्वों को अपनी खुराक में ले लेते हैं. इसके अलावा आया नमी, प्रकाश एवं स्थान आदि में फसल के साथ प्रतिस्पर्धा कर उस की बढ़त उपज एवं गुणवत्ता में भारी कमी ले आते हैं.

खरपतवारों द्वारा भूमि से पोषक तत्व एवं नमी, का पलायन इनकी संख्या जाति एवं अन्य सस्य क्रियाओं पर निर्भर करता है.

खरपतवारों को इन फसलों से दूर करने के लिए बुवाई के 30 दिन से लेकर 45 दिन तक महत्वपूर्ण होते हैं. खरपतवार नियंत्रण ना करने से गेहूं की उपज में लगभग 25 से 40% तक की कमी आ जाती है.

गेहूं की फसल के मुख्य खरपतवार

गेहूं की फसल में दो प्रकार के खरपतवार पाए जाते हैं. पहले चौड़ी पत्ती वाले और दूसरे सकरी पत्ती वाले खरपतवार-

सकरी पत्ती वाले खरपतवार – गेहूं की फसल में सकरी पत्ती वाले खरपतवारों में गेहूं का मामा (फेलेरिस माइनर), जंगली जई (एवेना लूडोविसियाना) आदि प्रमुख हैं.

चौड़ी-पत्ती वाले खरपतवार – गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों में बथुआ (चिनोपोडियम अल्वम), हिरनखुरी (कानवाल्वुलस आरवेन्सिस), अकरी (विसिया सेटाइवा), वनमटरी (लेथाइरस अफाका०, पीली एवं सफ़ेद सेंजी (मिलिलोटस अल्बा या इंडिका), कृष्णनील (एनागैलिस अरवेन्सिस), चिकोरी (चिकोरियम इनटाइवस), बनप्याजी (एस्फोडिलस टेन्यूफोलियस), तारातेज (कोनोपस डिंडमस) आदि.

गेहूं की फसल में खरपतवारों की रोकथाम कब करे

देश की ज्यादातर किसानों को खरपतवारों से होने वाली हानियों के बारे में जानकारी नहीं होती है. इसीलिए वह इन खरपतवारों की रोकथाम के लिए कोई विशेष ध्यान नहीं रखते हैं.

इन खरपतवारों के नियंत्रण के अभाव में  फसलों की प्रारंभिक अवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. गेहूं की फसल में खरपतवार प्रतिस्पर्धा के क्रांतिक समय जो की बुवाई के 30 से 45 दिन तक होता है. इस समय खरपतवारों को मुक्त रखना चाहिए. इससे फसल की उत्पादन क्षमता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव ना के बराबर रह जाता है.

खेत से कैसे करें खरपतवारों का निवारण

खेतों में खरपतवार ओं की रोकथाम के लिए जो भी कार्य कलाप हैं. जैसे प्रमाणित बीजों का प्रयोग खरपतवार रहित सिंचाई नालियों का प्रयोग अच्छी सड़ी गोबर एवं कंपोस्ट खाद का प्रयोग, खेत की तैयारी व बीज बुवाई में प्रयुक्त यंत्रों के प्रयोग से पहले अच्छी तरह से सफाई आदि को अपनाने से खरपतवारों की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

खरपतवार दूर करने की यांत्रिक विधि

गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ,अकरी, बनमटरी, कृष्णशील, सेंजी, जंगली गाजर आदि की समस्या होने पर इनको हाथ से निराई-गुड़ाई करके दूर किया जाता है.

इसीलिए गेहूं की फसल की क्रांतिक अवस्था में खरपतवार मुक्त करना रखने के लिए सामान्यतः एक निराई-गुड़ाई बुवाई के बीच 25 दिन के अंदर कर लेनी चाहिए. इसके उपरांत फसल की बढ़वार में उगे खरपतवारों को आसानी से ढक लेती है.

ज्यादातर खरपतवारों के प्रकोप से बचने के लिए उचित फसल चक्र अपनाना चाहिए. जहां पर धान गेहूं फसल चक्र कई वर्षों से अपनाया जा रहा है. भूमि एवं परिस्थितियों के अनुकूल इस फसल चक्र को किसी दूसरे फसल-चक्र जैसे धान-सरसों,धान-मसूर, धान-चना, या गेहूं-मक्का आदि से बदलकर कुछ हद तक इन से बचा जा सकता है.

खरपतवार की रोकथाम के लिए रसायनों का उपयोग

गेहूं की फसल में सकरी पत्ती वाले खरपतवारों को पहचानना काफी मुश्किल होता है. इसी कारण उनकी निराई-गुड़ाई हाथ से करना काफी मुश्किल हो जाता है. इसीलिए इन खरपतवार पर उचित खरपतवारनाशी का प्रयोग करना उचित होता है.  खरपतवार नासी का उपयोग करने से प्रति हेक्टेयर लागत भी कम आती है. तथा समय की भी भारी बचत होती है.

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खरपतवारनाशी का उपयोग करने के लिए 500 से 600 लीटर  पानी में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए.

खरपतवारनासी रसायनों का प्रयोग करते समय रखे ये सावधानियां

  • खरपतवारनाशी रसायनों का प्रयोग करते समय उचित मात्रा में, उचित ढंग से, सन्तुति मात्रा में पानी लेकर उपयोग करना चाहिए.
  • खरपतवारनाशी का प्रयोग करते समय फसल की उचित अवस्था होना बहुत ही आवश्यक है.
  • खरपतवारनाशी खरीदते समय उसके उपयोग की तारीख की जांच जरूर कर ले.
  • खरपतवारनाशी का उपयोग करते समय आसमान साफ होना चाहिए वातावरण में हवा शांत एवं शाम के समय करना उचित होता है.

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