किसान भाई अपने दुधारू पशुओं की बुरी आदतों को कैसे सुधारें, आइए जानते हैं

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पशुओं की बुरी आदतों को कैसे सुधारें

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 पशुओं की बुरी आदतों को कैसे सुधारें, आइए जानते हैं

देश में किसान भाई खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं. पशुपालन में किसान भाई तीन प्रकार के दुधारू पशुओं को पालते हैं. जिनमें गोवंशीय, भैंस वंशीय और बकरी वंशीय प्रमुख है. इन्हीं दुधारू पशुओं पर किसानों का पशुपालन व्यवसाय टिका हुआ है.

हमारे देश के देसी पशु विदेशी नस्ल के पशुओं की अपेक्षा काफी उपयोगी साबित हुए हैं. क्योंकि हमारे देसी पशु इन विदेशी पशु के मुकाबले कम बीमार पड़ते हैं, वातावरण के अनुकूल होते हैं, दूध देने की क्षमता भी अधिक होती है. साथ ही इनके नर पशु खेती के काम में आते हैं. आज भी हमारे देश  के कई क्षेत्रों में नर पशुओं से खेती की जाती है. जिससे किसानों को खेती में अच्छी बचत मिल जाती है. इन पशुओं की इतनी सारी खूबियां होने के बाद भी इनमें कुछ बुरी आदतें भी पाई जाती हैं. तो आइए जानते हैं, इन पशुओं की इन बुरी आदतों के बारे में और इनका सुधार कैसे किया जाए पूरी जानकारी –

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शिशु पशुओं की बुरी आदते 

पशुओं का दीवाल को चाटना 

पशुओं में दीवाल चाटने की आदत अक्सर नवजात बच्चों में होती है. पशु शिशु में इस आदत का मुख्य कारण है चारे की कमी, पेट में कीड़े, अपच, खनिज तत्वों की कमी, पेट में अम्लता बढ़ जाने से इत्यादि प्रमुख हैं.

ऐसे करें सुधार

पशु शिशु को अच्छा और सुपाच्य भोजन दें. भोजन में उचित मात्रा में खनिज तत्वों को शामिल करें, भोजन के बाद खाली समय में पशु शिशु के मुंह पर जाबा पहना कर रखें. इसके अलावा पशु शिशु को पेट में कीड़े मारने की दवा जरूर दें.

पशुओं में मिट्टी व अखाद्य पदार्थ खाने की आदत

पशुओं में अखाद्य पदार्थों की खाने की आदत लगभग सभी पशु वर्ग में होती है. इसका मुख्य कारण होता है. पशुओं को गंदे स्थानों पर चराना होती है. 

ऐसे करे सुधार 

पशुओं को साफ-सुथरे स्थान पर चराना चाहिए. इसके अलावा पशुओं के चरने वाले चारागाह को साफ सुथरा रखना चाहिए. साथ ही इस बात का ध्यान रखें पशु चरने वाली जगह पर मल विसर्जन अथवा किसी प्रकार की गंदगी न की जाए.

पशुओं का कपड़े को खाना

कभी-कभी नवजात पशुओं में कपड़े खाने की आदत लग जाती है. जिसके कारण वह जब युवा होते हैं तब भी वह इधर उधर पड़े कपड़ों को खाते रहते हैं. जिससे कभी-कभी पशुओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है. इस आदत का एक मुख्य कारण और भी है पशुओं में चारे की कमी तथा पशुओं को अधिक देर तक विश्राम में रखना. जिसके कारण खनिज तत्वों की कमी हो जाती .है और पशुओं में कपड़े खाने की आदत पड़ जाती है.

ऐसे करें सुधार

नवजात पशुओं के पास कपड़े संबंधित कोई चीज ना रखें और ना ही कोई कपड़ा नजदीक फैलाएं. इसके अलावा पशुओं को भरपूर मात्रा में चारा दिया जाय तथा चारा पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए..

पशुओं की बाल खाने की आदत

पशु में बाल खाने की आदत से पशुओं को सबसे ज्यादा नुकसान होता है. क्योंकि इस आदत के कारण कभी-कभी स्थित खतरनाक हो जाती हैं. यह आदत पशुओं के नवजात शिशु में ज्यादा होती है. वह ज्यादातर दूसरे पास बंधे पशुओं के बालों को चाटते, नाचते और खाते रहते हैं. जिससे कारण यह इनके पेट में इकट्ठा हो जाता है. क्योंकि बाल पाचन शील नहीं होते हैं. ऐसी स्थिति में पशुओं के पेट में दर्द शुरू हो जाता है. और उनका स्वास्थ्य दिन पर दिन गिरने लगता है. कभी-कभी पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है.

ऐसे करो सुधार

ऐसे स्थित से बचने के लिए पशुओं को एक दूसरे से उचित दूरी पर बांधे. अगर पशुओं को चाटते नजर आए. तो नीम के तेल का उपयोग करना चाहिए. यदि अपने बाल खा लिए हैं, बाल पेट में इक्कठे हो गए हैं. तो ऑपरेशन द्वारा ही इनको निकाला जा सकता है. 

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मादा पशुओ की बुरी आदते 

लात मारने या चलाने की आदत

लात मारने की आदत अक्सर मादा पशुओं में ज्यादा पाई जाती है. खासकर दूध देने वाली गाय में अधिक पाई जाती है. लेकिन कभी-कभी आदत भैंस में भी पाई जाती है. 

ऐसे करो सुधार

अगर कोई मादा पशु लात चला रही हैं. तो सबसे पहले इस बात की जांच करें कि आखिरी ऐसा एक क्यों कर रही है. गाय को दुहते समय पिछले पैरों को रस्सी से जरूर बांधे. इसके अलावा पीछे साइड में एक खुटा गाड़ कर उसमें भी गाय या भैंस के पिछले पैरों को बांधा जा सकता है. अगर जानवर ज्यादा पैर चला रहा है. तो एक बोरे में मिट्टी भरकर उसमें रस्सी बांधकर मवेशी की पिछली टांगों को बांधे. जिससे उसकी टांग मारने की आदत धीरे-धीरे छूट जाएगी.

पशुओं की दूध चुराने की आदत

दूध चुराने की आदत अक्सर भारतीय नस्ल की गायों में पाई जाती है. दूध चुराने के बाद जब भी बछड़ा इनके पास इनके आता है. तब वह बछड़े को दूध पिला देती हैं. जिससे पशुपालक किसान को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. 

ऐसे करें सुधार 

दूध चुराने वाली गायों के बछड़ों को गाय से दूर बांधना चाहिए. इसके अलावा गाय और बछड़े को एक साथ चरने के लिए ना भेजें. अगर भेज भेजें भी तो बछड़े के मुंह पर जावा बांधना चाहिए.

गायों द्वारा स्वयं दूध पी जाना 

स्वयं दूध पी जाने की आदत गायों में पाई जाती है. इसके कई कारण होते हैं जैसे ज्यादा दूध देने वाली गाय को अगर समय से दूध न निकाला जाए तो उसके थानों में दर्द होने लगता है. जिसके कारण वह अपने मुंह से इन थानों को चाटती हैं. जिसके कारण उनके मुंह में दूध लग जाता है. और धीरे-धीरे उनकी दूध पीने की आदत बन जाती है. कभी-कभी दूसरी गायों के आइन को चाटने के कारण भी इन्हें दूध पीने की लत लग जाती है.

ऐसे करें सुधार

दुधारू गायों को समय से दूध निकाला जाए. इसके अलावा अन्य दूसरी गाय जो दूध देती है. उनको उचित दूरी पर बांधा जाए.

पशुओं में चारा गिराने की आदत

ज्यादातर पशुओं में चारा गिराने की आदत पाई जाती है. यह चारा खाते समय चारा वाली नांद से चारा इधर-उधर गिराते हैं. बाद में गिरे हुए चरे को खाने की आदत लग जाती है. जिसके कारण पशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है और पशु का पेट भी अच्छे से नहीं भरता है.

ऐसे करें सुधार

पशुओं में इस आदत को छुड़ाने के लिए उसकी खाने वाली नांद ऐसी बनाई जाए. जिससे चारा गिरे नहीं साथ ही इतनी ऊपर या नीचे नहीं होनी चाहिए. कि पशु को खाने में दिक्कत हो. इसीलिए नांद को इस तरह लगाया जाए कि पशु आराम से चारा खा ले.

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नर पशुओं में बुरी आदतें

कार्य करते समय बैठ जाना

ज्यादातर नर पशु हल जोतने में या कार्य करते समय बैठ जाते हैं .यह अक्सर कमजोर और हीन भावना वाले बैलो में ज्यादातर देखने को मिलता है. इसका मुख्य कारण है शुरुआत से ही बछड़ों को भारी कार्य पर लगा दिया जाना. हल जोतने के लिए जुएँ में किसी प्रकार का कड़ापन होना.पशुओं में खरोच या गर्दन पर चोट या मोच या घाव होना या फिर कमजोर पशु को वरिष्ठ पशु बल के साथ जोत देना.

ऐसे करें सुधार 

इस आदत को दूर करने के लिए बछड़ों से शुरुआत में ज्यादा काम ना लें. उन्हें धीरे धीरे कठिन कार्य करने के लिए तैयार करें. इसके अलावा पशुओं की यह जांच करें, कि कोई पशु चोटिया खरोच या कोई घाव से ग्रसित तो नहीं है, इसके अलावा कंधे पर जुआ रखने से पहले नमक फिटकरी का पानी डालकर उसे मुलायम बना ले.

नर पशुओं में सींग मारने की आदत

पशुओं में सींग मारने की आदत खिन्नता और असुरक्षा की स्थिति के कारण उत्पन्न होती है. इसके अलावा अशांत वातावरण लंबे विश्राम करने या शरीर के ऊपर परजीवी या खुजली के कारण भी पशु सींग मार देता है.

ऐसे करें सुधार 

पशुओं में सींग मारने की आदत ना हो. इसलिए पशुओं को अनावश्यक मारना या धमकाना नहीं चाहिए. पशुओं को लंबे समय तक विश्राम नहीं करने देना चाहिए. पशुओं के शरीर में प्रतिदिन कुरेला करना चाहिए. इसके अलावा पशुओं को चराते समय पशुओं के मुंह पर बुल मास्क पहनाना चाहिए. जिससे सामने वाले पशु दिखाई ना पड़े. इसके अलावा मारने वाले पशु के नाक में नाथ पहना कर रखा जाए.

पशुओं में दूसरे पर हमला करने की आदत

अक्सर देखा गया है कि जो पशु कमजोर, असहाय, वृद्ध होते हैं उन पर खूंखार या लीडर के पशु अनायास ही हमला कर देते हैं. जिससे दूसरे पशु को काफी चोट पहुंचती है. और वह घायल भी हो जाता है. इसके अलावा अजनबी पर मनुष्य, जंगली जानवर देख कर बहुत से पशु हमलावर हो जाते हैं. जिससे लोगों को नुकसान पहुंचती है. अक्सर सांड खूंखार और हमलावर को ही जाते हैं.

ऐसे करें सुधार

हमलावर खूंखार सांडों को अन्य जानवर से अलग ही रखा जाए. चराते समय बुल मास्क पहनाना जरूरी है. इसके अलावा सीन रोधन करवा देना चाहिए. गले की रस्सी या लंबी जंजीर जरूर बांधी जाए. और पशु की नाक में नाथडाली जाए.

इस तरह से उपाय करने से पशुओं में होने वाली  बुरी आदतों को दूर किया जा सकता है और किसान भाई अपने पशु का अच्छी प्रकार ध्यान रख सकते है.

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