किसान अब बिना किसी मूल्य कटौती के बेच सकेंगे सूखे, मुरझाए और टूटे हुए गेहूं, सरकार ने इसके लिए दी छूट

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सरकार द्वारा गेहूं खरीदी
सूखे, मुरझाए और टूटे गेहूं की होगी सरकारी खरीदी

 सूखे, मुरझाए और टूटे गेहूं की होगी सरकारी खरीदी 

अभी हाल ही में ही केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाईं गयी है. वही अब इसकी सरकारी खरीद के लिए निर्धारित की तारीखों को भी आगे सरकार द्वारा आगे बढाया गया है. अब अधिकतर राज्यों के किसान अपने गेहूं को न्यूतम समर्थन मूल्य पर 31 मई तक बेंच पायेगें. इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा एफएक्यू में छूट देकर केंद्रीय पूल के लिए केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ सहित पंजाब और हरियाणा में गेहूं की खरीद की अनुमति देने का निर्णय किया गया है. लिए गये इस निर्यण हूं की बिक्री के बारे में किसानों की कठिनाइयां कम होंगी और संकट से बच पायेगें.

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा मंडियों से बहुत अधिक मात्रा में नमूने एकत्र करने के लिए अप्रैल-मई 2022 के दौरान केन्द्रीय दलों को प्रतिनियुक्ति किया गया था. उनके द्वारा इनका विश्लेषण एफसीआई की प्रयोगशालाओं में किया गया था. इनकी जांच के रिजल्ट में अलग-अलग प्रतिशत और एफएक्यू मानदंडों से अलग सूखे या मुरझाए हुए और टूटे हुए अनाज की उपस्थिति का संकेत मिले थे. इन परिणामों के बाद यह फैसला सरकार द्वारा लिया गया.

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सरकार द्वारा गेहूं खरीदी में दी बिना किसी मूल्य कटौती 18 प्रतिशत तक की छूट 

केंद्र सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम-एफसीआई को बिना किसी मूल्य कटौती के 18 प्रतिशत तक सूखे या मुरझाए हुए और टूटे हुए अनाज की खरीद की छूट देदी है. वही पंजाब और हरियाणा राज्य सरकारों द्वारा खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) को पत्र लिखकर रबी विपणन सत्र-आरएमएस 2022-23 के लिए गेहूं के समान विनिर्देशों में छूट देने की मांग की थी.इस समय सूखे या मुरझाए हुए और टूटे हुए अनाज की सीमा 6 प्रतिशत है। जब कि इन राज्यों ने 20 प्रतिशत तक की छूट मांगी थी.

गेहूं की उपज में आई है गिरावट 

आरएमएस 2021-22 के दौरान गेहूं का उत्पादन 1095 लाख मीट्रिक टन-एलएमटी और 433 एलएमटी गेहूं की खरीदी की गयी है. आरएमएस 2022-23 के दौरान, 1113 एलएमटी गेहूं के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। लेकिन गर्मियों की शुरुआत (मार्च 2022 के अंत तक) के परिणामस्वरूप पंजाब और हरियाणा में अनाज की बनावट में परिवर्तन हुआ और अनाज के सूखने या मुरझाने और टूटना सामने आया और प्रति एकड़ गेहूं की उपज में गिरावट आई। इसके बाद अखिल भारतीय स्तर पर गेहूं की खरीद के लक्ष्य को संशोधित कर 195 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है.

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सरकार द्वारा इसलिए लिया गया है यह फैसला 

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक मंत्रालय द्वारा यह बताया गया है कि अनाज का सूखे या मुरझाए हुए और टूटना एक प्राकृतिक घटना है जो मार्च के महीने में देश के उत्तरी भाग में अत्यधिक गर्मी होने के कारण यह सामने आई है. यह प्रतिकूल मौसम की स्थिति किसानों के नियंत्रण से बाहर हैं और इसलिए, ऐसी प्राकृतिक घटना के लिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए. इसके अनुसार, किसानों की कठिनाई को कम करने के लिए सरकार द्वारा अनाज की बनावट में बदलाव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। इस प्रकार, आम तौर से पूछे जाने वाले प्रश्नों के मानदंडों में उपयुक्त छूट किसानों के हितों की रक्षा करेगी और खाद्यान्न की उचित खरीद और वितरण को बढ़ावा देगी.

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