अब इस राज्य के किसानों को वर्षा संबंधित मिल सकेगी सटीक जानकारी, सरकार द्वारा लिया गया यह बड़ा फैसला

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किसानों को वर्षा संबंधित मिल सकेगी सटीक जानकारी

किसानों को वर्षा संबंधित मिल सकेगी सटीक जानकारी

देश के कुछ राज्यों में बारिश कम दर्ज की गई है, जिसके कारण किसान भाइयों को अपनी खेती की फसलों से नुकसान उठाना पड़ा है, इसीलिए इसे देखते हुए कुछ राज्य की सरकारों ने किसानों को भविष्य में मानसून संबंधी बदलाव के कारण फसलों में नुकसान न उठाना पड़े, इसके लिए अलग-अलग तरह की योजनाएं व व्यवस्थाएं की हैं.

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के कुछ जिलों में कम वर्षा होने के कारण बैठक की. इस बैठक में उनके द्वारा कहा गया कि कम बारिश के कारण किसी भी किसान का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को विकासखंड स्तर पर रेन गेज यंत्र की संख्या बढ़ाने को कहा गया है. जिससे किसानों को होने वाली बारिश की बिल्कुल सटीक व सही जानकारी मिल सके.

संभावित नुकसान से बच सकेंगे किसान 

राज्य के मुख्यमंत्री श्री योगी द्वारा बैठक में कहा गया, कि रेन गेज एक ऐसा यंत्र है जिससे वर्षा को मापा जा सकता है. इस यंत्र से वर्षा संबंधित सटीक आकलन किया जा सकता है. साथ में ही कि बरसात कम या ज्यादा दोनों तरह के आकलन को भी बताता है. इस आकलन के आधार पर तैयार डाटा की जानकारी किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है. वह अपनी फसलों की बुवाई को लेकर सजग रह सकते हैं. और होने वाले नुकसान से बच सकते हैं.

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विकासखंड स्तर पर लगाए जाएंगे रहेंगे

इसके अलावा श्री मुख्यमंत्री द्वारा कहां गया, कि अभी तक रेन गेज सिस्टम केवल तहसील स्तर पर लगाए गए थे. लेकिन अब विकासखंड स्तर पर भी लगाए जाएंगे. जिससे गांव में रहने वाले किसान भाइयों को बरसात संबंधी सटीक जानकारी मिल पाए और वह अपनी खेती वाले कार्य वर्षानरूप सुचार रूप से कर पाए.

मौसम संबंधी सही जानकारी सभी के जीवन को सुलभ व सुरक्षित बनाती हैं.रेन गेज यंत्र कमिश्नरी स्तर पर भी लगाए जाएंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम की सही व सटीक जानकारी देने के लिए राज्य स्तर पर पोर्टल विकसित किए जाने की आवश्यकता है.

300 से ज्यादा रेन गेज यंत्र राज्य में संचालित

उत्तर प्रदेश राज्य के मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता के द्वारा बताया गया राज्य में स्वचालित एवं मैनुअल दोनों तरह के रेन गेज संचालित हो रहे हैं. रेन गेज द्वारा यह पता हो सकता है कि एक निश्चित स्थान पर कितने मिमी० की बारिश हुई है. साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी दी कि राज्य में लगभग 300 से 400 के बीच रेल गेज यंत्र संचालित किए जा रहे हैं. इसके अलावा ब्लॉक में यंत्र लगाने से पहले या पता करना होगा कि किन ब्लॉकों में यंत्र लगे हैं और किन ब्लॉकों में यंत्र अभी नहीं लगे हैं. जहां जिन ब्लॉकों में यंत्र नहीं लगे हैं. वहां पर रेन गेज यंत्र लगाने की जरूरत है.

मौसम विभाग देता है मौसम संबंधी अलर्ट

राज्य में मौसम विभाग द्वारा अलग-अलग नोडल अफसर के जरिए. जिले स्तर पर प्रतिदिन, साप्ताहिक एवं सत्र स्तर पर मौसम बुलेटिन जारी किए जाते हैं. वही ब्लॉक स्तर पर विभाग की ओर से मौसम का पुरवा पूर्वानुमान जारी किया जाता है. लेकिन ब्लॉक स्तर पर रेन गेज बनाए जाने पर एक निश्चित स्थान पर वर्षा का सटीक आकलन हो सकेगा.

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आखिर क्या है रेन गेज यंत्र

रेन गेज दिन भर होने वाली बारिश को नापने का एक यंत्र है. जिसे रेन गेज या वर्षा मापी यंत्र भी कहते हैं. रेन गेज द्वारा हमें या पता चलता है की एक निश्चित स्थान पर निश्चित समय में कितने मिमी० की बरसात हुई है. इसके अलावा इसकी मदद से किसी निश्चित स्थान की भौगोलिक तथ्यों को भी मालूम किया जा सकता है. वैसे अगर साल में किसी स्थान पर 8 इंच से कम बारिश होती है. तो वह स्थान रेगिस्तान के जैसा कहा जाता है. इससे यहां पर होने वाली कृषि पैदावार के बारे में सटीक अनुमान लगाया जा सकता है. ऑटोमेटिक रेन गेज से रियल टाइम डाटा जैसे तापमान, वर्षा, आर्द्रता आंकड़ों को भी प्राप्त किया जा सकता है. रेन गेज किसानों के लिए एक उपयोगी यंत्र साबित हो सकता है. 

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