टमाटर की इन उन्नत किस्मों की बुवाई कर किसान बनेगें मालमाल, उत्पादन होगा अधिक

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tamatar ki unnat kisme
टमाटर की उन्नत किस्में

टमाटर की उन्नत किस्में जो देगीं अधिक उपज 

टमाटर की खेती पूरे देश में बड़े स्तर पर की जाती है. क्योकि यह एक लोकप्रिय सब्जी के रूप में उपयोग की जाती है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के कारण बाजार में इसकी मांग भी जबदस्त रहती है. इसके अलावा खाद्य पदार्थ उद्योग में भी अधिक उपयोग होता है.

टमाटर की खेती से किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा सके, इसके लिए सबसे जरुरी होता है. इसकी फसल से अच्छा उत्पादन लिया जा सके. वही टमाटर की अच्छे उत्पादन के लिए अच्छी किस्मों की जानकारी होना जरुरी होता है. तो आइये इस लेख के जरिये टमाटर की उन्नत और संकर किस्मों जानकारी आप सभी को देते है. जिससे आप टमाटर की खेती में अधिक उपज लग सके-

टमाटर की प्रमुख उन्नतशील किस्में  

टमाटर की उन्नत किस्म एच 66 (काषी विशेष) 

टमाटर की यह उन्नत किस्म सीमित बढ़वार वाली होती है. इस किस्म के पौधे करे, वही पत्तियों का रंग गहरा हरा होता है. पौधे अधिक शाखाओं वाले होते है.

पौधे की रोपाई के बाद इसकी पहली तुड़ाई 70 से 75 दिनों बाद पहली तुड़ाई ली जा सकती है. यह किसान को उपयोग के साथ-साथ बाजार में बेचने के लिए उपयुक्त होती है.

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टमाटर की इस किस्म के फल आकर्षक, बड़े, गोलाकार एवं ठोस औसत भार 80 ग्राम तथा 4 से 6 प्रकोष्ठ वाले होते है. इसके अलावा यह पर्ण कुंचन विषाणु के प्रति रोगरोधी किस्म है. इसका औसत उत्पादन 450 से 600 कुंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो जाता है. वही अगेती फसल तथा पर्ण कुंचन प्रभावित क्षेत्रों में उगने के लिए उपयुक्त किस्म होती है.

टमाटर डी०बी०आर०टी० -1 (काषी अमृत) किस्म 

टमाटर की यह किस्म भी सीमित बढ़वार वाली किस्म है. इस किस्म के फलों का आकर गोल, आकर्षक, लाल रंग के, मध्यम से बड़े आकार, गूदेदार होता है. इसके फल का औसत वजन 80 से 100 ग्राम के आसपास होता है. वही इसके 4 से 6 प्रकोष्ठ होते है.

इस किस्म की रोपाई के बाद इसकी फसल की पहली तुड़ाई 70 से 75 दिनों बाद की जाती है. इसके पौधे में औसतन 30 से 35 फल लगते है.

इस किस्म की औसत उत्पादन 500 से 620 कुंटल प्रति हेक्टेयर के लगभग हो जाता है. यह अधिकतर मैदानी क्षेत्रों में अगेती फसल उगाने के लिए उपयुक्त होती है. वही यह किस्म टमाटर पर्ण कुंचन विषाणु के लिए सहनशील होती है.

टमाटर डी०बी०आर०टी० -2 (काषी अनुपम) किस्म 

टमाटर की इस किस्म के पौधे सीमित बढ़वार वाले एवं औसत शाखाओं वाले होते है. इसके फल बड़े आकार, गोलाकार, चपटे होते है. वही पकने पर इनका रंग लाल रंग का एक समान होता है.

इस किस्म के फल का औसत वजन 80 से 120 ग्राम तक होता है. इसमें 4 से 8 प्रकोष्ठ पाए जाते है.  वही इस किस्म की पहली तुड़ाई 70 से 80 दिनों बाद की जाती है. इस किस्म की औसतन पैदावार लगभग 500 से 600 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है.

टमाटर की उन्नत किस्म काषी शरद

टमाटर की इस किस्म के पौधे असीमित बढ़वार होते है. इसकी पत्तियां लम्बी, चौड़ी तथा मोती होती है. इसके फल आकर्षक, लाल, ठोस तथा अधिक भण्डारण क्षमता वाले होते है.

इसके फल दूर-दराज के बाजारों में भेजने लायक उत्तम किस्म है. फल के छिलके मोटे होने के कारण पैकिंग में फूटते नही है. प्रति पौधे 35-40 फल प्राप्त हो जाते है.

इस किस्म के फल का भार 90 से 100 ग्राम तक होता है. वही इसका उत्पादन 400 से 450 कुंटल प्रति हेक्टेयर मिल जाता है. गर्मी के मौसम में उत्पादन करने के लिए यह किस्म सबसे उत्तम पायी जाती है.

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टमाटर की संकर किस्म अविनाश-2 

इस किस्म के पौधे सीमित बढ़वार वाली होती है. यह रोपाई के 50 से 55 दिनों में उत्पादन देने लगते है. इसके फल गोल, चमकीले, गहरे लाल रंग व मोटे छिलके होते है. इसके फल का औसत वजन 80 से 100 ग्राम तक होता है. जो तुड़ाई के 8 से 10 दिनों में तोड़ने योग्य हो जाता है.

इसके सभी फल लगभग गोलाकार पाए जाते है. वही इस किस्म का उत्पादन लगभग 600 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है.

टमाटर की संकर किस्म एन०एच०-5005 

टमाटर की यह एक अगेती किस्म है इसके फल गोलाकार , 4 से 5 प्रकोष्ठ वाले, ठोस तथा 2 से 4 गुच्छो में लगती है.

इस किस्म के पौधे की पत्तियां मध्यम चौड़ी, हरे रंग की तथा पौधे अच्छी बढ़वार वाले होते है. वही इसके पौधे में लगभग 56 से 60 फल प्रति पौधा प्राप्त हो जाते है. जिसका वजन 80 से 100 ग्राम प्रति फल होता है. इस किस्म का औसत उत्पादन 500 से 600 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है.

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