फरवरी के महीने में लौकी की बुवाई करे किसान, होगा अधिक मुनाफा

0
bottle gourd in the month of February
लौकी की बुवाई कर किसान बनेगें मालामाल

फरवरी महीने मे लौकी की बुवाई कर किसान बनेगें मालामाल

फरवरी महीने की शुरुवात होने वाली है। और धीरे-धीरे मौसम में भी बदलाव आने वाला है। जहां सर्दी का मौसम समाप्ति की ओर रुख करेगा, वही धीरे-धीरे गर्मी के मौसम का आगाज होगा। ऐसे मौसम मे किसान भाई सब्जियों की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है। इसी कड़ी मे किसान भाई फरवरी के महीने में लौकी की बुवाई कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है। क्योंकि यह महीना लौकी की खेती शुरू करने के लिए एकदम उपयुक्त माना जाता है।

आज लौकी की सब्जी को काफी स्वास्थ्यवर्धक सब्जियों मे गिना जाता है। जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। लेकिन गर्मी के मौसम के शुरू होते ही इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। जिससे इसकी कीमतों मे उछाल आता है। लौकी की कीमत क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है। कहीं-कहीं यह प्रति पीस के हिसाब से तो कहीं-कहीं यह प्रति किलों के हिसाब से बिकती है। वैसे देखा जाए तो प्रति लौकी भी 10 रुपये से ऊपर ही बाजार मे बिकती है। इसलिए लौकी की खेती किसानों के लिए काफी फ़ाउआदेमंड साबित हो सकती है। तो आईये लौकी खेती की खास बातें आप सभी से इस लेख के जरिये साझा करते है-

लौकी की खेती के लिए उपयुत समय

किसान भाई लौकी की खेती वैसे तो पूरे साल की जा सकती है। लेकिन मुख्य रूप से गर्मी और बरसात के सीजन में देश के किसान इसकी खेती करना अधिक पसंद करते है। वही गर्मी मे इसकी उपज लेने के लिए इसकी बुवाई फरवरी महीने मे ही कर लेनी चाहिए। क्योंकि गर्मी के शुरुवाती मौसम मे इसकी अच्छी कीमत प्राप्त होती है। तब तक आप की फसल की उपज तैयार हो चुकी होगी। क्योंकि लौकी की कुछ किस्में 50 से 55 दिन मे उपज देना शुरू कर देती है।

यह भी पढे : आलू की खेती करने वाले किसान इन रोगों एवं कीटों से रहे सतर्क, नहीं तो उठाना पड़ेगा घाटा

लौकी की खेती की खास बातें 

किसान भाइयों को लौकी की करने से पहले कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिससे उन्हे इसकी खेती से अच्छी उपज प्राप्त हो सके।

  • लौकी की खेती में बुवाई से पहले खेतों की अच्छी तरह से खरपतवार मुक्त कर लेना चाहिए।
  • इसके लिए किसान भाई बुवाई से पहले ही अच्छी तरह निराई कर लेनी चाहिए।
  • खेत की अच्छी तरह सफाई के बाद जुताई कर खेत को समतल बना लेना चाहिए।

लौकी की खेती के लिए बीज एवं उर्वरक

किसान भाई लौकी की एक हेक्टेयर बुवाई के लिए 5 से 7 किलों संकर बीजों की जरूरत पड़ती है। वही अगर अन्य किस्मों की बात की जाए तो 6 से 8 किलों लौकी के बीजों की जरूरत पड़ती है।

लौकी की खेती में अगर खाद एवं उर्वरक की बात की जाए तो यह इसके अच्छे उत्पादन के लिए काफी आवश्यक होती है। लौकी की एक हेक्टेयर की खेती मे 100 किलों नाइट्रोजन, 50 किलों फॉस्फेट और 60 किलों पोटेशियम की जरूरत होती है। वही अगर खाद की बात करे तो 3 से 4 गाड़ी गोबर की सड़ी खाद की जरूरत इसकी खेती को होती है। यह खाद बुवाई से पहले खेत की तैयार के समय ही खेत मे दलनी चाहिए। वही उर्वरकों का उपयोग बुवाई के समय करना चाहिए।

लौकी की खेती मे सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण 

लौकी की बुवाई करने के बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए। किसान भाई इसके लिए ड्रिप सिस्टम का भी उपयोग कर सकते है। वही फूल आने की अवस्था मे हर पाँचवे दिन इसकी सिंचाई करनी चाहिए।

किसान भाई लौकी की खेती मे खरपतवार नियंत्रण के लिए दो बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इसके अलावा किसान भाई हर दस से बारह दिनों के अंतराल पर खरपतवारों को साफ करते रहना चाहिए।

लौकी की इन किस्मों का करे चुनाव 

किसान भाई लौकी की बुवाई अपने क्षेत्रों के अनुसार किस्मों का चयन करे। वही मैदानी क्षेत्रों के किसान इन किस्मों का चुनाव कर सकते है।

  • पूसा समृद्धि – लौकी की इस किस्म का चुनाव मैदानी क्षेत्रों के किसान कर सकते है। इसकी एक हेक्टेयर मे लगभग 270-300 कुंटल तक उपज तक प्राप्त हो सकती है। यह किस्म 50 से 55 दिन मे तैयार हो जाती है।
  • पूसा हाइब्रिड – लौकी की यह किस्म मैदानी क्षेत्रों खासकर दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं पंजाब क्षेत्र के किसान के लिए काफी उपयुक्त पाई गई है।

यह भी पढे : सरसों की अच्छी उपज के लिए कितनी उर्वरक और सिंचाइयाँ करे किसान ? आइए जाने

लौकी की फसल के लिए ये मक्खी है खतरनाक 

लौकी की फसल के लिए फल मक्खी का सबसे अधिक खतरा रहता है। यह इसकी फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचती है।

इसलिए लौकी फसल को इससे बचाने के लिए किसान भाईयों को मैलाथियान दवा की 2 मिली0 मात्रा प्रति लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

किसान भाई दवा का छिड़काव करते समय इस बात का ध्यान रखे दवा का छिड़काव उसी स्थान पर करना चाहिए। जहां फल मक्खी का प्रकोप हो। सभी जगह छिड़काव करने से फसल को लाभ के स्थान पर नुकसान हो सकता है।

किसान भाई दवा का छिड़काव करते समय इस बात का ध्यान रखे मौसम साफ होना चाहिए। साथ ही पौधे की पत्तियां गीली न हो। अन्यथा दवा के छिड़काव का लाभ नहीं मिल पाएगा।

इस दवा का इस्तेमाल किसान भाईयों को कृषि विशेषज्ञों की देखरेख मे करना लाभकारी साबित होता है। अतः दवा की मात्र कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ही करना चाहिए।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here