फसलों को कम लागत मे होगी पोषक तत्वों आपूर्ति, किसान भाई खेती यह विधि अपनाएं

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प्राकृतिक खेती से होगा दोहरा लाभ

किसान भाई को प्राकृतिक खेती से होगा दोहरा लाभ

जिस तरह से आज प्रकृति का दोहन हो रहा है। उससे कहीं न कहीं मनुष्य के अस्तित्व खतरे मे नजर आ रहा है। आज जमीन, पानी, वायु आदि हर वह वस्तु जो प्राकृतिक है, वह प्रदूधित हो चुकी है। भूमि पर उगने वाली वनस्पति से लेकर अन्न तक सभी इस प्रदूषण से जहरीले हो चुके है।

इसलिए वर्तमान समय प्राकृतिक खेती की जरूरत को देखते हुए सरकार द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। क्योंकि सरकार इस बात को बाखूबी जानती है। दरसल प्राकृतिक खेती मिट्टी के साथ-साथ हमारी सेहत के लिए भी जरूरी है।

प्राकृतिक खेती क्यों करे किसान

देश के किसान आखिर प्राकृतिक खेती को क्यों अपनाएं इसकी मुख्य वजह  निम्नांकित है-

  • प्राकृतिक खेती से उपजाया गया खाद्यान मे विटामिन, खनिज एवं पोषक तत्व अधिक मात्रा मे पाए जाते है। साथ ही यह अनाज खाने मे काफी स्वादिष्ट लगता है।
  • इस विधि से पैदा किया गया अनाज को खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। एवं रोगों से भी छुटकारा मिलता है।
  • इससे पैदा की गई उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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  • प्राकृतिक खेती मे बाजार के लिए कम जोखिम और दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।
  • पर्यावरण, इंसान एवं अन्य जीवों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • प्राकृतिक खेती करने से जमीन बंजर होने से बचती है।
  • प्राकृतिक खेती मे देशी नस्ल के बीजों का उपयोग किया जाता है। जिससे हम बीजों मे भी आत्मनिर्भर बनते है।
  • इस विधि से मित्रकीट, केचुआ एवं अन्य जीव के सक्रिय भूमिका से मिट्टी की पोषक तत्वों मे बढ़ोत्तरी होती है, रोग एवं कीट प्रबंधन मे मदद मिलती है।

प्राकृतिक खेती के लिए खास बातें जरूरी

प्राकृतिक खेती मे देशी गाय को ही मूल आधार माना गया है। क्योंकि देशी गाय के गोबर मे 16 मुख्य पोषक तत्व पाए जाते है। जो किसी भी पौधे के विकास के लिए काफी जरूरी होते है।

इसके साथ ही देश गाय के गोमूत्र और गोबर की महक देशी केचुओं को बढ़ाने मे भी मददगार होता है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती मे किसान भाइयों को खेत की गहरी जुताई की जरुरत नही होती है. साथ ही प्राकृतिक खेती करते समय इसकी सिंचाई का भी तरीका थोड़ा अलग होता है. क्योकि प्राकृतिक खेती में पौधों की सिंचाई कुछ दूरी पर करनी होती है. जिससे सिर्फ 10 फीसदी ही पानी लगता है. वही पौधों को दूर से पानी देने के कारण पौधों की जड़े खूब लम्बी हो जाती है. जिसके कारण पौधे के तने मोटे और पौधे भी लम्बे हो जाते है. जिससे इनकी पैदावार भी ज्यादा होती है.

प्राकृतिक खेती में लगाए जाने वाले पौधों की दिशा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. यह खेती करते समय पौधों को उत्तर-दक्षिण दिशा में लगाया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे पौधो को सूरज की रौशनी अधिक समय तक मिल सके.

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ज्यादातर किसान भाई जैविक खेती को ही प्राकृतिक खेती समझ लेते है. जबकि ऐसा बिलकुल नही है, दोनों अलग-अलग है. जैविक खेती से मिट्टी के भौतिक गुणों में सुधार होता है. लेकिन फसल की अधिकतम पैदावार के लिए जैविक खेती काफी नही है. जबकि प्राकृतिक खेती में पहले ही वर्ष भरपूर पैदावार मिलाती है. इसके अलावा अधिक उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को बिलकुल भी अपनी फसलों के लिए रसायन की जरुरत नही पड़ती है.

वही पिछले नौ सालों में लगभग 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती तहत कवर किया जा चुका है.

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