Drumstick Farming | Sahjan ki kheti kaise kare | सहजन की खेती

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Drumstick Farming
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Drumstick Farming |  सहजन की खेती

देश में सहजन की खेती (Drumstick Farming) बड़े पैमाने पर की जाती है. यह एक बहुवर्षीय सब्जी देने वाला पौधा है. इसके पेड़ को किसान भाई अपने घर के पास भी लगा सकते है. क्योकि इसको ज्यादा देखभाल की जरुरत नही होती है.

सहजन का पेड़ जाड़ों के मौसम में फल देता है. जिसकों सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है. इसके फूल से लेकर फल तक बाजार में अच्छा मूल्य मिलता है. इसलिए किसान भाई इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है.

इसलिए गाँव किसान आज अपने लेख में Sahjan ki kheti की पूरी जानकारी देगा. जिससे किसान भाई इसकी खेती कर अच्छी उपज प्राप्त कर सके. जिससे उनको इसकी खेती से अच्छा मुनाफा प्राप्त हो सके. तो आइये जानते है सहजन की खेती (Drumstick Farming) की पूरी जानकारी-

सहजन के फायदे (Benefits of Drumstick)

सहजन का पत्ता, फल और फूल सभी पोषक तत्वों से भरपूर होते है. जो मनुष्यों और जानवरों दोनों के काम में आते है. सहजन के पौधे का लगभग सारा हिस्सा खाने के योग होता है.

सहजन की हरी पत्तियां सलाद के तौर पर खाई जाती है. और करी में भी इस्तेमाल की जाती है. इसके बीज से करीब 38 से 40 फीसदी नही सूखने वाला तेल पैदा होता है. जिसे बेन तेल के नाम से जाना जाता है. इसका इस्तेमाल घड़ियों में किया जाता है.

इसका तेल साफ़, मीठा और गंधहीन होता है. और कभी खराब नही होता है. ईसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल इत्र बनाने में किया जाता है.

इसके अतरिक्त सहजन में कई तरह के खनिज पाए जाते है. इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, जस्ता, मैग्नीशियम, आयरन, तांबा, फास्फोरस और जस्ता जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते है. जो हमारे शरीर के विकास के लिए फायदेमंद होते है.

सहजन के उपयोग से आँख के रोग, दिल की बीमारी, पथरी की समस्या, दांतों में कीड़ा, पेट दर्द, लीवर से जुडी बीमारियों आदि में बहुत ही फायदेमंद साबित हुआ है.

इसकी पत्तियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता है. इसके सेवन से पशुओं का स्वास्थ्य काफी अच्छा रहता है. और दूध देने वाले पशुओं को खिलाने से पशु ज्यादा दूध देने लगते है.

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Sahjan ki kheti के क्षेत्र एवं विस्तार (Drumstick Farming area and expansion)

सहजन को अंग्रेजी में Drumstick (कहीं कहीं साइजन, सोजना) कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम मोरिंगा औलीफेरा है. हिंदी में इसे साइजन, मराठी में शेवागा, तमिल में मुरुन्गई, मलयालम में मुरिन्गंगा और तेलगु में मुनागाक्या कहते है.

सहजन की उत्पत्ति भारत में हुई है. लेकिन विश्व के अन्य देशों में औषधि के रूप में भी इसकी खेती की जाती है.

विश्व में इसकी खेती फिलीपिंस, हवाई, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में की जाती है. भारत में इसकी खेती बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा तथा दक्षिण भारत के राज्यों में की जाती है.

सहजन की खेती के लिए जलवायु एवं मिट्टी (Climate and soil for drumstick cultivation)

सहजन की खेती (Drumstick Farming) सूखे की स्थित में भी हो सकती है. क्योकि इसके पौधे कम से कम पानी में जिन्दा रह सकते है. इसके अच्छे विकास के लिए गर्म और नमीयुक्त जलवायु एवं फूल खिलते समय सूखा मौसम सटीक रहता है.

सहजन के फूल खिलते समय 25 से 30 डिग्री का तापमान अनुकूल माना जाता है. इस तापमान पर यह अच्छा से विकास करता है.

सहजन का पौधा कम गुणवत्ता वाली मिट्टी में भी लग जाता है. इसके अच्छे विकास के लिए सूखी बलुई या चिकनी बलुई मिट्टी उपयुक्त होती है. मिट्टी का पी० एच० मान 6.2 से 7.0 के बीच होना चाहिए. इसका पौधा समुद्र तटीय इलाके की मिट्टी और कमजोर गुणवत्ता वाली मिट्टी को भी सहन कर लेटा है.

सहजन की उन्नत किस्में (Improved varieties of drumstick)

सहजन का पौधा साल में दो बार फसल देता है. इसलिए जो उपलब्ध किस्मों में पी.के.एम.1, पी.के.एम.2, कोयंबटूर 1 व कोयंबटूर 2 आदि प्रमुख किस्में है.

इन सभी किस्मों केपौधों में ज्यादातर 4 से 6 मीटर की उंचाई के तथा 90 से 100 दिनों में फूल देने लगते है. जिनकी समय-समय पर विभिन्न अवस्थाओं में तुड़ाई होती रहती है.

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सहजन का पौधा लगाने की विधि (Drumstick Planting Method)

सहजन की पौध को रोपण गड्ढा बनाकर किया जाता है. इसके लिए खेत को खरपतवार मुक्त करने के बाद 2.5 मीटर X 2.5 मीटर की दूरी पर 45 X 45 X 45 सेमी० के आकर के गड्ढे बना लिये जाते जाते है.

इसके उपरांत गड्ढे की उपरी मिट्टी के साथ 10 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर गड्ढे में भर दिया जाता है. अब खेत सहजन रोपाई के लिए तैयार हो जाता है.

सहजन में बीज और शाखा के टुकड़ों दोनों ही प्रकार से ही प्रबर्द्धन किया जा सकता है. अच्छी फलन और साल में दो बार फलन के लिए बीज से प्रबर्द्धन उपयुक्त माना जाता है.

सहजन की बीज रोपाई (Drumstick seed planting)  

सहजन के पौधों को एक हेक्टेयर में लगाने ले लिए 500 से 700 ग्राम बीज पर्याप्त होता है. इसके बीज को सीधे गड्ढों में या फिर पॉलीथीन बैग तैयार कर सकते है. पॉलीथीन बैग पौधा एक महीने में लगाने योग्य तैयार हो जाते है.

सहजन के पौधों की रोपाई एवं शस्य प्रबंधन (Planting and Crop Management of Drumstick Plants)

खेत में तैयार गड्ढों में जून से लेकर सितम्बर तक इसके पौधों की रोपाई की जा सकती है. बाद में जब पौधा 75 सेमी० का हो जाए.  तब इसके पौधे के उपरी वाले भाग को तोड़ देना चाहिए, जिससे बगल में निकलने वाली शाखाओं को आसानी हो जाय.

सहजन के पौधों के लिए खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer for Drumstick Plants)

सहजन (Drumstick Farming) की बीज रोपाई क तीन महीने बाद 100 ग्राम यूरिया + 100 ग्राम सुपर फास्फेट + 50 ग्राम पोटाश की मात्रा से गड्ढों को उपचारित करना चाहिए. इसके उपरांत तीन महीने बाद दुबारा 100 ग्राम यूरिया से उपचारित करना चाहिए.

इसके अलावा 15 किलोग्राम गोबर की खाद एजोसपिरिलम और पी० एस० बी० (5 किलो० प्रति हेक्टेयर) की मात्रा गड्ढों में डालनी चाहिए.

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सहजन के पौधों की सिंचाई (Drumstick plant irrigation)

सहजन की अच्छी बढ़वार के लिए पौधों की आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए. बीज के अंकुरण के लिए और पौधों की रोपाई के समय सिंचाई की जरुरत होती है.

इसके अलावा फूल आने के समय अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है. लेकिन अधिक सोखापन भी इसके फूलों के लिए नुकसान दायक होता है. इससे फूल झड जाते है.

सहजन में कीट एवं रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control in Drumstick)

सहजन के पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान भुआ पिल्लू नामक कीट से होता है. यह कीट पौधों के लिए काफी नुकसान दायक होता है. यह कीट पौधे की पत्तियां काटकर नुकसान पहुंचता है. जिससे पैदावार प्रभावित होती है.

इसके नियंत्रण के लिए डाइक्लोरोवास (नूभान) दवा की 0.5 मिली० की मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड्काव कर इस कीट से बचाव किया जा सकता है.

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सहजन की फलों की तुड़ाई एवं पैदावार (Harvesting and yield of drumstick fruits)

सहजन की उन्नत किस्म से साल में दो बार फसल लि जा सकती है. जिनकी तुड़ाई फरवरी से मार्च एवं सितम्बर से अक्टूबर के महीने में की जा सकती है.

सहजन का एक पौधे से एक साल में तक़रीबन 40 से 50 किलों की पैदावार हो जाती है. जिसका बाजार में अच्छा मूल्य मिल जाता है. जिससे किसनों को अधिक लाभ प्राप्त होगा.

अन्य पूछे जाने वाले प्रश्न (Other FAQ)

प्रश्न : सहजन के पेड़ की पहचान कैसे करें?

उत्तर : सहजन के पेड़ पर सामान्‍यत: वर्ष में एक बार फूल और फिर फल लगते हैं। इसका फल पतला लंबा और हरे रंग का होता है जो पेड़ के तने से नीचे लटका होता है। इसका पौधा 4 – 6 मीटर उंचा होता है तथा 90-100 दिनों में इसमें फूल आता है।

प्रश्न : मोरिंगा का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर : मोरिंगा को सहजन भी कहा जाता है. आमतौर पर लोग सहजन का प्रयोग केवल उसकी सब्जी बनाने के लिए करते हैं.

प्रश्न : सहजन कितने रुपए किलो है?

उत्तर : सहजन का फुटकर रेट आमतौर पर 40 से 50 रहता है. थोक में इसका रेट 25 रुपए के आसपास होता है.

प्रश्न : सहजन कितने प्रकार का होता है?

उत्तर : सहजन (Drumstick tree ; वानस्पतिक नाम : “मोरिंगा ओलिफेरा” (Moringa oleifera) ) एक बहु उपयोगी पेड़ है। इसे हिन्दी में सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा आदि नामों से भी जाना जाता है।

प्रश्न : मोरिंगा खाने से क्या होता है?

उत्तर : मोरिंगा शरीर के ऊर्जा को बढ़ाता है, जिससे थकान से राहत मिलती है। आयरन से भरपूर मोरिंगा के पत्ते कमजोरी को कम करने में मदद करते हैं

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