फरवरी माह में पशुओं के चारा फसलों में किसान करे यह कृषि कार्य, उत्पादन मिलेगा अधिक

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agricultural work in fodder crops in February
चारा फसलों में करे यह कृषि कार्य

फरवरी में चारा फसलों में करे यह कृषि कार्य 

रबी फसलों के इस सीजन किसानों में अपने अनाज फसलों के साथ ही पशुओं के लिए चारा फसलों की भी बुवाई की है. ऐसे में अच्छी उपज के लिए चारा फसलों की समय पर सिंचाई एवं पौध संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए. वाही जायद चारा फसलों की बुवाई मध्य फरवरी से प्रारंभ हो जाती है.

इसलिए उपयुक्त फसल चक्र तथा मिश्रित फसल की योजना बनाकर चारा उत्पादन ले सकते है. चलिए इसी कड़ी में फरवरी में चारा फसलों में किये जाने वाले कृषि कार्यों के बारे जानकारी देंगे. जिनसे आप चारा फसलों से अच्छा उत्पादन ले सकते है.

चारा फसलों में जई की खेती 

  • किसान भाई अपनी जई की खेती में 18 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहे.
  • जई की एक कटान वाली किस्मों में कटाई 50 प्रतिशत पुष्पावस्था पर करनी चाहिए.
  • वही बहुकटान वाली किस्मों में पहली कटाई बुवाई के 60 दिन पर तथा शेष बाकी कटाईयां 45 दिन के अंतराल पर करना चाहिए.

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  • जई की कटाई करते समय किसान भाई इस बात का ध्यान रखे इसकी कटाई जमीन से 8 से 10 सेमी० ऊपर से करनी चाहिए.
  • हर कटाई के उपरांत 30 किग्रा० नत्रजन का छिड़काव करना चाहिए.
  • छिड़काव के उपरांत इसकी फसल की सिंचाई जरुर करे.
  • अगर किसान भाई इससे बीज लेना चाहते है तो एक कटाई के बाद इसकी चारा फसल से बीज उत्पादन कर सकते है.
  • जई के फसल में दो कटाई से 500 से 600 कुंतल प्रति हेक्टेयर हरा चारा प्राप्त होता है.
  • वही बीज का उत्पादन लेने वाली फसल से 300 से 400 कुंटल हरा चारा तथा 20 से 25 कुंटल प्रति हेक्टेयर दाना प्राप्त किया जा सकता है.

चारा फसलों में रिजका की खेती (लूर्सन)

  • किसान भाई रिजका चारा फसल में पहली कटाई बुवाई के 55 से 60 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए.
  • इसकी बाकी कटाईयां 30 से 35 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए.
  • प्रत्येक कटाई के बाद 15 से 16 किग्रा० नत्रजन प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए.
  • नत्रजन डालने के बाद सिंचाई जरुर करे. इससे अधिक पैदावार होगी.

चारा फसलों में बरसीम की खेती 

  • बरसीम की पहली कटाई बुवाई के 50 से 55 दिन पर की जाती है.
  • इसके बाद की सभी कटाईयां 25 से 30 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए.
  • इसमें भी प्रत्येक कटाई के बाद 15 से 16 किग्रा० नत्रजन प्रति हेक्टेयर के दर से डालनी चाहिए.
  • नत्रजन डालने के बाद बरसीम की फसल की सिंचाई करनी चाहिए.
  • बरसीम की कटाई जमीन से 5 सेमी० ऊपर से करनी चाहिए. इससे बरसीम की अच्छी वृध्दि होती है.

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चारा फसलों में जौ की खेती 

  • जौ की चारा फसल में 4 से 5 सिंचाइयों की जरुरत होती है.
  • पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद दिन करनी होती है उसके उपरांत आवश्यकतानुसार सिंचाई करनी चाहिए.
  • जौ की पहली कटाई-बुवाई के 55-60 दिन करनी चाहिए. द्वितीय कटाई बाली आने या दुधिया अवस्था पर करनी चाहिए.
  • किसान भाई यदि इसकी फसल से बीज लेना हो तो उस फसल क्षेत्र को प्रथम कटाई पश्चात बीज उत्पादन के लिए छोड़ देना चाहिए.
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