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Broccoli Farming – ब्रोकली की खेती कैसे करे ? (हिंदी में)

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ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) कैसे करे ?

ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) कैसे करे ?

 नमस्कार किसान भाईयों, ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) देश के विभिन्न क्षेत्रो में की जा रही है. यह एक गोभीवर्गीय फसल है. इसकी खेती कर किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा सकते है. इसकी मांग शहरों और होटलों में ज्यादातर रहती है. इसलिए गाँव किसान (Gaon Kisan) आप अपने इस लेख के जरिये ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) कैसे करे ? की पूरी जानकारी देगा, वह भी अपनी भाषा हिंदी में, जिससे किसान भाई अच्छी उपज ले सके. तो आइये जानते है ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) की पूरी जानकारी-

ब्रोकली के फायदे 

ब्रोकली एक पौष्टिक सब्जी वाली फसल है. इसमें 3.3 प्रतिशत प्रोटीन तथा विटामिन ए व सी अत्यंत प्रचुर मात्रा में पायी जाती है. इसमें थियामीन राइबफ्लैविन, नियासिन, कैल्सियम तथा लौह पर्याप्त मात्रा में पाए जाते है. ब्रोकली का उपयोग साधारणतः सब्जी एवं सूप के लिए किया जाता है. ब्रोकली स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होती है. इसके सेवन से मधुमेह, कैंसर, ह्रदय, मोटापा, हड्डियों में मजबूती , लीवर और आँखों के लिए आदि में फायदेमंद होती है. पौष्टिकता से भरपूर होने के कारन यह गर्भवती महिलाओं के लिए भी अधिक फायदेमंद होती है.

उत्पत्ति एवं क्षेत्र

ब्रोकली को अमेरिका की प्रमुख सब्जी माना जाता है. ब्रोकली का प्रजनन कार्य मुख्य रूप से यूरोपीय देशों तथा जापान में किया जाता है. इसे इटालियन गोभी भी कहा जाता है. भारत में अधिक मांग होने के कारण इसकी खेती पर्वतीय क्षेत्रो में विशेषकर हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर की जाती है. उत्तराखंड में भी इसकी खेती की लोक प्रियता बढ़ रही है.

जलवायु (Broccoli Farming)

ब्रोकली एक शीतोष्ण जलवायु की फसल है. इसको फूलगोभी की भाँती ही जलवायु की आवश्यकता होती है. गर्म मौसम इसकी खेती के लिए बिलकुल उपयुक्त नही है. क्योकि वातावरण का तापमान से इसके शीर्ष में छोटी-छोटी पत्तियां निकल आती है जिससे शीर्ष ढीला हो जाता है और इसका स्वाद घाट जाता है. इसके पौधे को अधिक ठंढी में अच्छी प्रकार उगाया जा सकता है. इसकी फसल पाले से प्रभावित नही होती है.

भूमि (Broccoli Farming)

ब्रोकली की अच्छी उपज के लिए उपजाऊ भूमि की आवश्यकता होती है. ब्रोकली के लिए दोमट अथवा बलुई दोमट वाली भूमि सर्वोत्तम होती है. अधिक अम्लीय भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी नही होती है. भूमि से जल निकास का उचित प्रबन्ध होना चाहिए. खेत में पानी नही रुकना चाहिए अन्यथा इसकी बढ़वार रुक जाती है. और पौधे पीले पड़कर नष्ट हो जाते है.

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उन्नत किस्में (Broccoli Farming)

ब्रोकली दो तरह की होती है. स्प्राउटिंग ब्रोकरी तथा हेडिंग ब्रोकली. इसमें स्प्राउटिंग ब्रोकली का प्रचलन अधिक है. हेडिंग ब्रोकली बिलकुल फूलगोभी की तरह होती है, इसका रंग हरा, पीला अथवा बैंगनी होता है. हरे रंग की किस्म ज्यादा लोकप्रिय है. ब्रोकली की मुख्य उन्नत किस्में निम्नवत है-

पूसा के० टी० एस०-1 – यह किस्म भा० कृ० अ० स० कटराई द्वारा विकसित की गयी है यह 85 से 90 दिन में तैयार हो जाती है. इसके शीर्ष का भार 250 से 400 ग्राम होता है. इसकी उपज लगभग 125 से 150 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है. इसका शीर्ष ठोस व हरे रंग का होता है.

पंजाब ब्रोकली – ब्रोकली की यह किस्म पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गयी है. यह 65 से 70 दिन में तैयार हो जाती है. इसके शीर्ष का भार 300 से 400 ग्राम होता है. इसकी उपज 110 से 120 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है. इसका शीर्ष रंग हरा होता है.

शेर-ऐ-कश्मीर – ब्रोकली की इस किस्म को यू० एग्री० सा० टे०, कश्मीर ने विकसित किया है. यह 65 से 70 दिन में तैयार हो जाती है. इसका शीर्ष भार 300 से 400 ग्राम होता है. इसकी उपज लगभग 100 से 110 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है. इस किस्म का शीर्ष हरा होता है.

पालम कंचन – इस किस्म को हि० प्र० कृ० वि० वि०, पालमपुर द्वारा विकसित किया गया है. यह किस्म 140 से 145 दिन में तैयार हो जाती है. इसका शीर्ष भार 650 से 750 ग्राम तक होता है. इसकी उपज 250 से 270 कुंटल तक होती है. इअके शीर्ष का रंग पीला हरा होता है.

ब्रोकली संकर – 1 – इस किस्म की परिपक्वता 60 से 65 दिन बाद होती है. इसका शीर्ष का रंग हरा गठीला होता है. इसका किस्म का वजन 600 से 800 ग्राम तक होता है. इस किस्म के बीज राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा किसानों को उपलब्ध कराये जाते है.

खेत की तैयारी (Broccoli Farming)

ब्रोकली की खेती के लिए खेत की दो जुताइयाँ पर्याप्त होती है. जिसमें गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद दो कुंटल प्रति नाली की दर से मिलाकर रोपाई हेतु भली-भांति तैयार कर लेनी चाहिए.

बीज बुवाई का समय 

ब्रोकली की अच्छी उपज के लिए बुवाई एवं रोपाई का समय निर्धारण अति आवश्यक होता है-

निचले पर्वतीय क्षेत्र- इन क्षेत्रों में सितम्बर के अंत से अक्टूबर तक बीज बुवाई करनी चाहिए.

मध्य पर्वतीय क्षेत्र- इन क्षेत्रो में मध्य अगस्त से सितम्बर तक बीज बुवाई करनी चाहिए.

बेमौसमी खेती हेतु- इसके लिए बीज बुवाई नवम्बर से मध्य जनवरी तक करनी चाहिए.

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र- इन क्षेत्रों में मार्च  अथवा अप्रैल में की जाती है.

बीज दर (Broccoli Farming)

ब्रोकली की खेती के लिए 400 से 500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की जरुरत होती है.

पौधशाला की व्यवस्था 

पौधशाला की भूमि जमीन से 15 सेमी० ऊपर उठी हुई होनी चाहिए. इसकी मिट्टी में गोबर या कम्पोस्ट खाद तथा 50 से 60 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से सिंगल सुपर फास्फेट मिलाकर तैयार कर लेना चाहिए.

जमीन के अंदर के कीटो और रोगों से बचाव के लिए फर्मेसिल नामक रसायन को 5 प्रतिशत 50 मिली० दवा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर तैयार नर्सरी की क्यारियों में मिट्टी को लगभग 6 इंच गहराई तक करे. इसके बाद पोलीथिन शीट चारो और से अच्छी तरह से दबाकर दबाकर रख दे. जिससे गैस बाहर न निकल सके.

तीन दिन बाद पोलीथिन हटाकर क्यारियों की हल्की गुड़ाई कर खुला छोड़ दे. जिससे गैस उड़कर निकल जाए. इसके एक या दो दिन बाद भूमि को समतल कर 5 से 7 सेमी० की दूरी पर कतारे बना ले. इन कतारों को बारीक़ मिट्टी और गोबर की छनी हुई खाद से ढककर हलके हाथों से दबा देते है. अगर वर्षा अधिक होती है तो क्यारियों को ढकने के लिए छप्पर या पालीथीन का प्रबन्ध करना चाहिए.

इन क्यारियों को 5 ग्राम थायरन प्रति वर्गमीटर की दर से अच्छी प्रकार मिलाकर 5 से 7 सेमी० की दूरी पर 1.5 से 2.0 सेमी० गहरी कतारे निकाले. इसके बाद कवकनाशी 10 ग्राम ट्राईकोडर्मा को प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करके बुवाई करे. पौध जमने तक हल्की सिंचाई करे.

खाद एवं उर्वरक (Broccoli Farming)

ब्रोकली के लिए उपजाऊ भूमि की आवश्यकता होती है. हल्की भूमि में यह फसल उगाने के लिए कार्बनिक खाद की पर्याप्त मात्रा भूमि में देना अनिवार्य है. अच्छी उपज के लिए प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन गोबर प्रति कम्पोस्ट खाद, 100 किग्रा० नत्रजन, 100 किग्रा० फास्फोरस तथा 50 किग्रा पोटाश का उपयोग किया जाना चाहिए.

रोपण (Broccoli Farming)

तीन से चार सप्ताह की स्वस्थ पौध रोपण योग्य हो जाती है. साधरण रोपानांतर पंक्तियों के बीच 60 से 75 सेंटीमीटर तथा पौधों से पौधों के बीच की दूरी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए.

खरपतवार नियंत्रण  

शुरू के डेढ़ से दो माह तक खेत से खरपतवार निकालते रहे जिससे पौधों की बढवार अच्छी हो सके. इसके लिए आवश्यकतानुसार दो या तीन निराई-गुड़ाई अवश्य करे.

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रोग एवं कीट नियंत्रण 

ब्रोकली की फसल में बीमारियों का प्रकोप अधिक नही होता है. किन्तु रोपाई के बाद कुछ कीटों एवं ब्याधियों का प्रकोप हो सकता है.

प्रमुख रोग प्रबन्धन 

आर्द्रपतन 

पौधे जमीन की सतह से गलकर मरने लगते है. जिससे फसल को भारी हानि पहुंचती है.

रोकथाम- इसकी रोकथाम के लिए जल निकास की उचित व्यवस्था करनी चाहिए. बीजों का बुवाई से पहले बीजोपचार करना चाहिए. नर्सरी में घनी बुवाई न करे. बुवाई के 10 दिन बाद कार्बेन्डाजिम की 1 ग्राम दवा का घोल बनाकर क्यारियों में छिड़काव करे. 10 से 20 दिन बाद पुनः छिड़काव करना चाहिए.

जड़ विगलन 

इस रोग के कारण रोपाई के बाद कुछ पौधों की बढवार रुक जाती है. पौधे उखाड़कर देखने पर जड़े बिलकुल तार जैसी हो जाती है.

रोकथाम- इसकी रोकथाम के लिए रोपाई के समय पौधों को दवा के घोल से डुबोकर लगाना चाहिए. रोग के लक्षण दिखाए देते ही कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करे.

काली पर्ण चिट्टी रोग एवं मृदुल असिता रोग 

ब्रोकली के इस रोग में पत्तियों पर काले या भूरे धब्बे दिखाई देते है.

रोकथाम- इस रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से पौधों में छिड़काव करे.

कीट नियंत्रण 

मांहू

इस कीट के वयस्क तथा शिशु दोनों ही मुलायम पत्तियों से रस चूसकर हानि पहुंचाते है. पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है. अधिक प्रकोप होने पर माहू गोभी के शीर्ष पर दिखाई पड़ती है.

रोकथाम- इसके नियंत्रण के लिए एजेडारेक्टीन 1 से 2 मिली० अथवा इमिडाक्लोरप्रिड 0.3 मिली० प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करे.

गोभी की तितली 

या कीट सफेद रंग की एक तितली होती है. जिसके पीले रंग के गुच्छो में पत्तियों के पिछली सतह पर बहुतायत में दिखाई पड़ते है. अण्डों से निकलने वाली शुरुवाती अवस्था में ही पत्तियों को भारी मात्रा में क्षति पहुंचती है.

रोकथाम- इसके नियंत्रण के लिए सबसे पहले इसके अण्डों को नष्ट करना चाहिए. इसके बाद इंडोसल्फान 35 ई० सी० का 2 मिली० दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. 

फसल की कटाई 

ब्रोकली के शीर्ष की कटाई इसकी कलियाँ खुलने के पहले ही कर लेनी चाहिए. शीर्ष को 10 से 12 सेमी० तने के साथ काट लिया जाता है. इसके बाद निचले पत्तों के कक्षों से नई कपोले निकलती है. जिनमे छोटे-छोटे शीर्ष बनते है. इन्हें समय-समय पर काट लेना चाहिए.

उपज  

ब्रोकली की औसत उपज लगभग 150 से 200 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक हो जाती है.

निष्कर्ष 

किसान भाईयों उम्मीद है गाँव किसान (Gaon Kisan) के इस ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) से सम्बंधित लेख से आप सभी को पूरी जानकारी मिल पायी होगी. गाँव किसान (Gaon Kisan) द्वारा ब्रोकली के फायदे से लेकर ब्रोकली की उपज तक सभी जानकारी दी गयी है. फिर भी ब्रोकली की खेती (Broccoli Farming) से सम्बंधित आपका कोई प्रश्न हो तो कमेन्ट बॉक्स में कम्नेट कर पूछ सकते है. इसके अलावा यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट कर जरुर बताये. महान कृपा होगी.

आप सभी लोगो का बहुत-बहुत धन्यवाद, जय हिन्द.

 

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